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Kathua News: राजामंडलीक देवस्थान पर समागम यात्रा जारी
Mon, 10 Jul 2023 02:00 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Mon, 10 Jul 2023 02:00 AM IST
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श्रद्धालुओं ने हाथ की कलाई पर धागा बंधवाया
बसोहली। आषाढ़ माह के चौथे रविवार को बसोहली से 10 किलोमीटर दूर फरनाट इलाके में स्थित राजा मंडलीक देवस्थान पर समागम यात्रा जारी रही। हालांकि भारी बारिश की वजह से यहां श्रद्धालुओं की संख्या में कमी रही। केवल चार पहिया, निजी वाहन और यात्री वाहनों में सवार होकर ही श्रद्धालु देवस्थान तक पहुंचे। इस देव स्थान पर पहुंचकर श्रद्धालुओं ने हाथ की कलाई पर धागा बंधवाया और यहां कयूर, आटा, गुड, रोट, फल, मीठे पकवान चढ़ाकर अपना शीश नवाया और अपने परिवार के लिए मंगलकामना की।
देव स्थान तक आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए मंदिर कमेटी की ओर से लंगर की भी व्यवस्था की गई थी। कमेटी के सदस्यों ने बताया कि कुछ लोग इस देवस्थान को राजा मंडलीक तो कुछ लोग इसे बढेटे बाबा के नाम से भी जानते हैं। मान्यता है कि इस देवस्थान का धागा जो भी व्यक्ति अपने हाथ की कलाई पर धारण कर लेता है उसे जहरीले जीव जंतु तक स्पर्श नहीं कर सकते। हालांकि जिस इलाके में यह मंदिर है वह घने जंगलों से घिरा है। यहां अकसर जहरीले जीव जंतु दिखाई देते हैं। नाग देवता की कृपा से आज तक इस इलाके में किसी भी व्यक्ति की मौत जहरीले जीव जंतुओं की वजह से नहीं हुई है।
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बसोहली। आषाढ़ माह के चौथे रविवार को बसोहली से 10 किलोमीटर दूर फरनाट इलाके में स्थित राजा मंडलीक देवस्थान पर समागम यात्रा जारी रही। हालांकि भारी बारिश की वजह से यहां श्रद्धालुओं की संख्या में कमी रही। केवल चार पहिया, निजी वाहन और यात्री वाहनों में सवार होकर ही श्रद्धालु देवस्थान तक पहुंचे। इस देव स्थान पर पहुंचकर श्रद्धालुओं ने हाथ की कलाई पर धागा बंधवाया और यहां कयूर, आटा, गुड, रोट, फल, मीठे पकवान चढ़ाकर अपना शीश नवाया और अपने परिवार के लिए मंगलकामना की।
देव स्थान तक आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए मंदिर कमेटी की ओर से लंगर की भी व्यवस्था की गई थी। कमेटी के सदस्यों ने बताया कि कुछ लोग इस देवस्थान को राजा मंडलीक तो कुछ लोग इसे बढेटे बाबा के नाम से भी जानते हैं। मान्यता है कि इस देवस्थान का धागा जो भी व्यक्ति अपने हाथ की कलाई पर धारण कर लेता है उसे जहरीले जीव जंतु तक स्पर्श नहीं कर सकते। हालांकि जिस इलाके में यह मंदिर है वह घने जंगलों से घिरा है। यहां अकसर जहरीले जीव जंतु दिखाई देते हैं। नाग देवता की कृपा से आज तक इस इलाके में किसी भी व्यक्ति की मौत जहरीले जीव जंतुओं की वजह से नहीं हुई है।
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