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कोरोना काल में भी धूमधाम से होगा रामलीला का मंचन
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बसोहली में रामलीला मंचन के लिए तैयार किया जा रहा रामलीला मैदान, संवाद।
- फोटो : KATHUA
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बसोहली। कोरोना महामारी के चलते जिले के अधिकांश क्लबों ने रामलीला का मंचन रद्द कर दिया है। लेकिन, एक सदी से ज्यादा समय पूरा कर चुकी बसोहली की ऐतिहासिक रामलीला इस बार भी सीमित दर्शकों के सामने आज से प्रस्तुत की जाएगी।
महामारी को ध्यान में रखते हुए इस बार रामलीला मंचन की तैयारी की गई है। इसके दौरान रामलीला मैदान के भीतर लगने वाली दुकानों और झूलों को अनुमति नहीं है। शारदीय नवरात्र के उपलक्ष्य में हर साल आयोजित होने वाले महा आयोजन में न सिर्फ बसोहली नगर और आसपास इलाकों के लोग पहुंचते हैं, बल्कि पड़ोसी राज्य पंजाब से भी लोग रामलीला देखने के लिए बसोहली तक खिंचे चले आते हैं।
रामलीला क्लब के प्रधान चंद्रशेखर बसोत्रा बताते हैं कि एक साथ कई मंच बनाकर रामलीला के दृश्यों को प्रस्तुत किया जाता है। मंचन में पर्दे का इस्तेमाल नहीं किया जाता। खुले आसमान के नीचे राम दरबार सजाया जाता है। इस दौरान एक से बढ़कर एक दृश्यों के मंचन पर हजारों दर्शकों की आंखें टिकी रहती हैं। अभिनय करने वाले कलाकारों दृश्यों को सजीव बनाते हैं।
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सांसे अटका देता है संजीवनी बूटी लाने का दृश्य
रामलीला मैदान से करीब 50 मीटर ऊंचाई पर तार बांधा जाता है। हनुमान बने किरदार इस तार के सहारे एक हाथ पर संजीवनी पर्वत को लेकर हवा में उड़ता है। इसमें जोखिम होने के बावजूद कलाकार इससे विचलित नहीं होते। इस दृश्य के मंचन के पूर्व 100 मीटर की दूरी पर स्थित किले पर पूर्ण रूप से सुरक्षा व्यवस्था होती है। इसकी तैयारी बहुत पहले से ही शुरू हो जाती है। इसके अलावा सीता जन्म, सीता स्वयंवर, सीता हरण, बाली सुग्रीव युद्ध, राम बनवास, लक्ष्मण शक्ति, आदि दृश्य आकर्षण पैदा करते हैं।
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मुस्लिमों का भी रहता है विशेष योगदान
रामलीला को सफल बनाने के लिए न सिर्फ हिंदू, बल्कि मुस्लिम समुदाय का भी विशेष योगदान रहता है। तारिक अंसारी मूर्छित लक्ष्मण को संजीवनी बूटी देकर जीवनदान देने वाले वैद्य का किरदार निभाते हैं। इसी तरह मोहम्मद अफजल समेत उनके कई साथी रामलीला की तैयारियों में अपना बहुमूल्य योगदान देते हैं। इस दौरान आसपास के इलाकों में पुलिस भी तैनाती रहती है, ताकि सुरक्षा चाक-चौबंद रहे।
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महामारी को ध्यान में रखते हुए इस बार रामलीला मंचन की तैयारी की गई है। इसके दौरान रामलीला मैदान के भीतर लगने वाली दुकानों और झूलों को अनुमति नहीं है। शारदीय नवरात्र के उपलक्ष्य में हर साल आयोजित होने वाले महा आयोजन में न सिर्फ बसोहली नगर और आसपास इलाकों के लोग पहुंचते हैं, बल्कि पड़ोसी राज्य पंजाब से भी लोग रामलीला देखने के लिए बसोहली तक खिंचे चले आते हैं।
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रामलीला क्लब के प्रधान चंद्रशेखर बसोत्रा बताते हैं कि एक साथ कई मंच बनाकर रामलीला के दृश्यों को प्रस्तुत किया जाता है। मंचन में पर्दे का इस्तेमाल नहीं किया जाता। खुले आसमान के नीचे राम दरबार सजाया जाता है। इस दौरान एक से बढ़कर एक दृश्यों के मंचन पर हजारों दर्शकों की आंखें टिकी रहती हैं। अभिनय करने वाले कलाकारों दृश्यों को सजीव बनाते हैं।
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सांसे अटका देता है संजीवनी बूटी लाने का दृश्य
रामलीला मैदान से करीब 50 मीटर ऊंचाई पर तार बांधा जाता है। हनुमान बने किरदार इस तार के सहारे एक हाथ पर संजीवनी पर्वत को लेकर हवा में उड़ता है। इसमें जोखिम होने के बावजूद कलाकार इससे विचलित नहीं होते। इस दृश्य के मंचन के पूर्व 100 मीटर की दूरी पर स्थित किले पर पूर्ण रूप से सुरक्षा व्यवस्था होती है। इसकी तैयारी बहुत पहले से ही शुरू हो जाती है। इसके अलावा सीता जन्म, सीता स्वयंवर, सीता हरण, बाली सुग्रीव युद्ध, राम बनवास, लक्ष्मण शक्ति, आदि दृश्य आकर्षण पैदा करते हैं।
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मुस्लिमों का भी रहता है विशेष योगदान
रामलीला को सफल बनाने के लिए न सिर्फ हिंदू, बल्कि मुस्लिम समुदाय का भी विशेष योगदान रहता है। तारिक अंसारी मूर्छित लक्ष्मण को संजीवनी बूटी देकर जीवनदान देने वाले वैद्य का किरदार निभाते हैं। इसी तरह मोहम्मद अफजल समेत उनके कई साथी रामलीला की तैयारियों में अपना बहुमूल्य योगदान देते हैं। इस दौरान आसपास के इलाकों में पुलिस भी तैनाती रहती है, ताकि सुरक्षा चाक-चौबंद रहे।

बसोहली में रामलीला मंचन के दौरान लगा राम दरबार का दृश्य, फाइल फोटो।- फोटो : KATHUA

बसोहली में होनी रामलीला का फाइल फोटो, संवाद।- फोटो : KATHUA