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Kathua News: सीआईएसएफ फायरिंग में जान गंवाने वाले रफीक को नम आंखों से अंतिम विदाई

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RAFEEK KO DE VIDAAI
-पैतृक गांव कंडालो में पूरे सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया
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संवाद न्यूज एजेंसी
डोडा/गंदोह। कठुआ के बसोहली स्थित सेवा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में हुई फायरिंग की घटना में जान गंवाने वाले सीआईएसएफ कांस्टेबल मोहम्मद रफीक अहमद को बुधवार को उनके पैतृक गांव कंडालो, गंदोह में पूरे सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया। तिरंगे में लिपटे रफीक के पार्थिव शरीर को जब अंतिम विदाई दी गई तो माहौल गमगीन हो उठा।
परिजनों, रिश्तेदारों, ग्रामीणों और साथियों की आंखें नम थीं। रफीक अहमद डोडा जिले के भलेसा क्षेत्र के कंडालो गांव के रहने वाले थे। वह कठुआ के बसोहली क्षेत्र स्थित सेवा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे। 29 सितंबर की शाम परियोजना परिसर में हुई फायरिंग में रफीक समेत चार सीआईएसएफ कर्मियों की मौत हुई थी। मृतकों में असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडेय, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह और कांस्टेबल संजीव कुमार भी शामिल थे।
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उनके परिवार में तीन भाई हैं और तीनों ही सीआईएसएफ में सेवा दे रहे हैं। देश की सुरक्षा के लिए वर्दी पहनने वाले परिवार के लिए रफीक की अचानक मौत किसी गहरे सदमे से कम नहीं है। बीती देर रात रफीक का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंचा तो उनके घर से आ रही विलाप की चीख पुकार से पूरा क्षेत्र गमगीन और भावुक हो गया। अंतिम विदाई के दौरान उनके दोनों भाइयों और साथी जवानों ने पूरे सम्मान के साथ उन्हें विदाई दी। रफीक के पीछे उनकी पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं। उनके दोनों बच्चों की उम्र महज करीब चार और छह वर्ष है। जिन बच्चों के सिर पर पिता का साया था, वे अब उन्हें हमेशा के लिए खो चुके हैं। परिवार के लिए सबसे कठिन क्षण वह रहा जब तिरंगे में लिपटा रफीक का पार्थिव शरीर घर पहुंचा।
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बेटे के पार्थिव शरीर को देखकर माता-पिता का दर्द हर किसी को भावुक कर गया। जिस बेटे को उन्होंने देश की सेवा के लिए वर्दी पहनाकर रवाना किया था, उसी बेटे की अंतिम विदाई उन्हें अपने हाथों से करनी पड़ी। ग्रामीणों के अनुसार रफीक परिवार और गांव के लोगों के साथ हमेशा जुड़े रहते थे और उनकी असमय मौत से पूरे इलाके में शोक की लहर है। रफीक की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। हर आंख नम थी और हर चेहरे पर इस त्रास्दी का दर्द साफ दिखाई दे रहा था। सैन्य और पुलिस परंपरा के अनुरूप सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। कंडालो की मिट्टी में रफीक को अंतिम विदाई के साथ एक परिवार ने अपना बेटा, एक पत्नी ने अपना जीवनसाथी और दो मासूम बच्चों ने अपना पिता खो दिया। वहीं, देश की सेवा में लगे तीन भाइयों वाले इस परिवार पर आई त्रासदी ने पूरे भलेसा क्षेत्र को गहरे शोक में डाल दिया है।
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