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फैसले के विरोध में वकीलों में गुस्सा बरकरार
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बार एसोसिएशन के सदस्य प्रदर्शन करते हुए। अमर उजाला
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। भूमि पंजीकरण के अधिकारों को राजस्व विभाग को दिए जाने के विरोध में कोर्ट का कामकाज ठप कर धरना प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने हड़ताल को वीरवार तक तीन दिन के लिए बढ़ा दिया है।
सोमवार को जिला व सत्र न्यायालय कठुआ में जिला बार एसोसिएशन कठुआ के अध्यक्ष अजात शत्रु शर्मा के नेतृत्व में बार एसोसिएशन के सदस्य 12वें दिन भी मांगों के समर्थन में कोर्ट परिसर में नारेबाजी करते हुए धरने पर रहे।
धरने के दौरान बोलते हुए बार अध्यक्ष ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों से राजस्व अधिकारियों को भूमि पंजीकरण के अधिकारों के हस्तांतरण का निर्णय जम्मू-कश्मीर प्रशासन का गलत निर्णय है। प्रदेश प्रशासन को इस तरह के बड़े फैसले लेने से पहले कमेटी का गठन करना चाहिए था। बार एसोसिएशन जम्मू से सलाह मशविरा करके इस बात का संज्ञान लेना चाहिए था कि न्यायिक अधिकारियों को सौंपे गए भूमि पंजीकरण के अधिकार सुचारु ढंग से चल रहे हैं या नहीं। उसके बाद ही ऐसे निर्णय लेने चाहिए थे। प्रदेश सरकार की ओर से जल्दबाजी में पंजीकरण का अधिकार राजस्व अधिकारियों को सौंप दिया है, जो वकीलों के साथ अन्याय है। इस कदम से जनता में भ्रम और अराजकता की भावना पैदा होगी। बार एसोसिएशन ने उपराज्यपाल जीसी मुर्मू से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई है।
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सोमवार को जिला व सत्र न्यायालय कठुआ में जिला बार एसोसिएशन कठुआ के अध्यक्ष अजात शत्रु शर्मा के नेतृत्व में बार एसोसिएशन के सदस्य 12वें दिन भी मांगों के समर्थन में कोर्ट परिसर में नारेबाजी करते हुए धरने पर रहे।
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धरने के दौरान बोलते हुए बार अध्यक्ष ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों से राजस्व अधिकारियों को भूमि पंजीकरण के अधिकारों के हस्तांतरण का निर्णय जम्मू-कश्मीर प्रशासन का गलत निर्णय है। प्रदेश प्रशासन को इस तरह के बड़े फैसले लेने से पहले कमेटी का गठन करना चाहिए था। बार एसोसिएशन जम्मू से सलाह मशविरा करके इस बात का संज्ञान लेना चाहिए था कि न्यायिक अधिकारियों को सौंपे गए भूमि पंजीकरण के अधिकार सुचारु ढंग से चल रहे हैं या नहीं। उसके बाद ही ऐसे निर्णय लेने चाहिए थे। प्रदेश सरकार की ओर से जल्दबाजी में पंजीकरण का अधिकार राजस्व अधिकारियों को सौंप दिया है, जो वकीलों के साथ अन्याय है। इस कदम से जनता में भ्रम और अराजकता की भावना पैदा होगी। बार एसोसिएशन ने उपराज्यपाल जीसी मुर्मू से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई है।
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