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आरक्षण सूची में संशोधन के लिए सीमावर्ती लोगों ने किया प्रदर्शन
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हीरानगर। अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) से 6 किलोमीटर की पट्टी में आने वाले गांवों को आरक्षण के लिए बनाई गई सूची में संशोधन की मांग को लेकर बॉर्डर वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों ने रविवार को सीमावर्ती गुज्जर चक गांव में प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि आईबी आरक्षण सूची में केवल 0 से 6 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांव को ही शामिल किया जाए। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत भूषण शर्मा ने कहा कि सीमावर्ती लोगों ने जद्दोजहद कर एलओसी की तर्ज पर आईबी पर रहने वाले लोगों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण मंजूर कराया, लेकिन कुछ सियासी दल प्रशासन पर दबाव बनाकर आरक्षण के लिए तय दूरी से बाहर के गांवों को शामिल करा कर वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, सोची समझी साजिश के तहत सीमावर्ती इलाकों के लोगों के अधिकारों में हिस्सेदारी बनाने की कोशिश की जा रही है। जिसे हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे, क्योंकि आरक्षण उन लोगों का अधिकार है जो लोग रोजाना पाकिस्तानी गोलाबारी का शिकार होते हैं। जिनके बच्चों की पढ़ाई गोलाबारी के कारण बर्बाद हुई है।
उन्होंने कहा अंतरराष्ट्रीय सीमा से 6 किलोमीटर की दूरी में आने वाले गांव की सूची जो प्रशासन की ओर से तैयार की गई है उसमें राजनीतिक दलों के नेताओं की दखलअंदाजी साफ तौर पर दिखाई देती है। अगर इसी सूची के हिसाब से आरक्षण मिलना शुरू हुआ तो जरूरतमंदों को इसका कोई फायदा नहीं होगा।
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उन्होंने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि 6 किलोमीटर की दूरी में आने वाले गांवों को चयनित करने के लिए कमेटी का गठन किया जाए। जिसमें सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और सीमावर्ती लोगों को शामिल किया जाए। इस दौरान उन्होंने यह चेतावनी दी कि आरक्षण सूची को सही नहीं किया गया तो प्रशासन और सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो यहां से पलायन भी करेंगे।
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उन्होंने कहा, सोची समझी साजिश के तहत सीमावर्ती इलाकों के लोगों के अधिकारों में हिस्सेदारी बनाने की कोशिश की जा रही है। जिसे हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे, क्योंकि आरक्षण उन लोगों का अधिकार है जो लोग रोजाना पाकिस्तानी गोलाबारी का शिकार होते हैं। जिनके बच्चों की पढ़ाई गोलाबारी के कारण बर्बाद हुई है।
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उन्होंने कहा अंतरराष्ट्रीय सीमा से 6 किलोमीटर की दूरी में आने वाले गांव की सूची जो प्रशासन की ओर से तैयार की गई है उसमें राजनीतिक दलों के नेताओं की दखलअंदाजी साफ तौर पर दिखाई देती है। अगर इसी सूची के हिसाब से आरक्षण मिलना शुरू हुआ तो जरूरतमंदों को इसका कोई फायदा नहीं होगा।
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उन्होंने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि 6 किलोमीटर की दूरी में आने वाले गांवों को चयनित करने के लिए कमेटी का गठन किया जाए। जिसमें सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और सीमावर्ती लोगों को शामिल किया जाए। इस दौरान उन्होंने यह चेतावनी दी कि आरक्षण सूची को सही नहीं किया गया तो प्रशासन और सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो यहां से पलायन भी करेंगे।