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कोटी के लिए 15 साल पहले बनी थी सड़क, आज तक नहीं चला यात्री वाहन
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बिलावर। उपमंडल मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर स्थित कोटी गांव के लिए सरकार ने 15 वर्ष पहले सड़क बनाई थी, लेकिन आज तक इस सड़क पर कोई भी यात्री वाहन नहीं चलाया गया। लोगों को कच्चे रास्ते से 10 किलोमीटर पैदल चलकर बिलावर पहुंचना पड़ता है। गांव के जिन लोगों के पास निजी वाहन हैं, वे तो सड़क के रास्ते बिलावर पहुंच जाते हैं लेकिन 90 फीसदी आबादी आज भी यात्री वाहन की सुविधा से वंचित है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ समय पूर्व सड़क पर यात्री वाहन चलाए गए थे, लेकिन अनुमति न होने पर उन्हें बंद करा दिया गया। कई बार इस बारे में अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को अवगत करवा चुके हैं, लेकिन आज तक सुनवाई नहीं हुई।
लोगों ने कहा के तीन हजार से अधिक आबादी वाले गांव के लोग पैदल सफर करने को मजबूर हैं। लाखों रुपये खर्च कर सरकार ने सड़क तो बना दी, लेकिन यात्री वाहन न चलने से इसका फायदा नहीं मिल पा रहा। अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। लोगों ने सरकार से मांग की कि जल्द उपमंडल मुख्यालय से सटे कोटी गांव के लिए यात्री वाहन चलाया जाए। यात्री वाहनों को सड़क पर चलने के लिए रूट परमिट जारी किया जाए।
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निजी वाहन चालक भी
बसूलते हैं मनमाना किराया
स्थानीय निवासी राज सिंह, जोगेंद्र सिंह, नरेंद्र खजूरिया ने बताया कि कोटी गांव के साथ-साथ अन्य कई गांवों के लोग हर दिन अपने कामकाज के लिए बिलावर आते-जाते हैं, जिन्हें पैदल पहुंचना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों और छोटे बच्चों को होती है। जब वे गांव से बिलावर या फिर बिलावर से अपने घर पैदल कच्चे रास्ते करीब डेढ़ घंटा सफर तय करने के बाद पहुंचते हैं। मिस्त्री विक्रम सिंह ने बताया कि मुलाजिमों व विद्यार्थियों को भी रोज परेशान होना पड़ता है। निजी वाहन चालक लोगों से मनमाना किराया वसूलते हैं और लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं। टाटा सूमो या फिर अन्य कई वाहन 600 या फिर 700 रुपये किराया वसूलते हैं।
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लोगों ने कहा के तीन हजार से अधिक आबादी वाले गांव के लोग पैदल सफर करने को मजबूर हैं। लाखों रुपये खर्च कर सरकार ने सड़क तो बना दी, लेकिन यात्री वाहन न चलने से इसका फायदा नहीं मिल पा रहा। अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। लोगों ने सरकार से मांग की कि जल्द उपमंडल मुख्यालय से सटे कोटी गांव के लिए यात्री वाहन चलाया जाए। यात्री वाहनों को सड़क पर चलने के लिए रूट परमिट जारी किया जाए।
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निजी वाहन चालक भी
बसूलते हैं मनमाना किराया
स्थानीय निवासी राज सिंह, जोगेंद्र सिंह, नरेंद्र खजूरिया ने बताया कि कोटी गांव के साथ-साथ अन्य कई गांवों के लोग हर दिन अपने कामकाज के लिए बिलावर आते-जाते हैं, जिन्हें पैदल पहुंचना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों और छोटे बच्चों को होती है। जब वे गांव से बिलावर या फिर बिलावर से अपने घर पैदल कच्चे रास्ते करीब डेढ़ घंटा सफर तय करने के बाद पहुंचते हैं। मिस्त्री विक्रम सिंह ने बताया कि मुलाजिमों व विद्यार्थियों को भी रोज परेशान होना पड़ता है। निजी वाहन चालक लोगों से मनमाना किराया वसूलते हैं और लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं। टाटा सूमो या फिर अन्य कई वाहन 600 या फिर 700 रुपये किराया वसूलते हैं।
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