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Kathua News: राहत शिविरों में जूझते लोग...उम्मीदों से भरी आंखें, पर भविष्य का संकट

Thu, 21 Aug 2025 02:05 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Thu, 21 Aug 2025 02:05 AM IST
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People struggling in relief camps...eyes full of hope, but future in danger
भेड़ बलोर पंचायत घर के राहत ​शिविर में शाम के भोजन की व्यवस्था करने में जुटी महिलाएंसंव
कठुआ। जिले में हाल ही में हुई भारी बारिश और बाढ़ के बाद सुरक्षित स्थानों पर बनाए गए राहत शिविरों में रह रहे लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। घाटी औद्योगिक क्षेत्र में जोड़ जुथाना के बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए बनाए गए राहत शिविर में रह रही रजिया बेगम, शिफा, वीना और ज़ुल्फां ने बताया कि प्रशासन ने उन्हें सुरक्षित आश्रय, भोजन, पानी और दवाएं तो उपलब्ध कराई हैं, लेकिन शिविर में तीन दिन से बाथरूम में पानी की व्यवस्था नहीं है। महिलाओं को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी दिनचर्या और स्वाभिमान दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने शिविर की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है।
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वहीं, घाटी पंचायत के मन्हास मोहल्ला वार्ड नंबर 6 के निवासी राकेश सिंह ने कहा कि राहत शिविरों में रखा जाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उनके मोहल्ले के लगभग 44 लोग शिविरों में रह रहे हैं, जिनकी पूरी जिंदगी की कमाई पहाड़ से आए मलबे के नीचे दब गई है। रात को उन्हें नींद नहीं आती, क्योंकि हर पल उन्हें अपने उजड़े घरों की याद सताती है। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन्हें शिविरों में कितने दिन रहना होगा, जिससे उनका भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।
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घाटी के पूर्व सरपंच पृथीपाल सिंह ने बताया कि मन्हास मोहल्ले में पहाड़ से आए मलबे ने दस घरों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। यह क्षेत्र हर साल बाढ़ की चपेट में आता है, इसलिए सरकार को इन परिवारों को स्थायी रूप से सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए जमीन उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि वे फिर से अपना आशियाना बना सकें। जिंदगी की जद्दोजहद में सिर्फ राहत की जरूरत नहीं, बल्कि पुनर्वास की पुकार है। ये आवाजें उस उम्मीद की हैं जो हर त्रासदी के बाद एक नई शुरुआत चाहती हैं। एक ऐसा ठिकाना जहां डर नहीं, सिर्फ गरिमा और सुरक्षा हो।
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