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Kathua News: श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन सुनाया कंस वध व रुक्मिणी विवाह का प्रसंग
Sat, 10 May 2025 12:50 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sat, 10 May 2025 12:50 AM IST
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नगरी के रामलीला मैदान में श्रीमद् भागवत कथा संकीर्तन महामहोत्सव जारी
कठुआ। नगरी के रामलीला मैदान में श्रीमद् भागवत कथा संकीर्तन महामहोत्सव जारी है। कथा के छठे दिन पंडाल कथाव्यास मधुसूदन दासनूदास जी महाराज ने कंस वध व रुक्मिणी विवाह के प्रसंग सुनाए।
उन्होंने बताया कि जब कंस के अत्याचार से पृथ्वीवासी भगवान से गुहार लगाने लगे तब भगवान अवतरित हुए और कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों ही होना निश्चित है। इसलिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को कई बार मरवाने का प्रयास किया, लेकिन हर प्रयास असफल साबित होता रहा। कंस ने अपने प्रमुख अकरुर के द्वारा मल्ल युद्ध के बहाने 11 वर्ष की अल्पायु में कृष्ण और बलराम को मथुरा बुलवाकर शक्तिशाली योद्धा और पागल हाथियों से कुचलवाकर मारने का प्रयास किया, लेकिन वह सभी श्रीकृष्ण और बलराम के हाथों मारे गए। अंत में श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिला दी। कंस वध के बाद श्रीकृष्ण ने माता-पिता वसुदेव और देवकी और महाराज उग्रसेन को कारागार से मुक्त कराया।
उन्होंने बताया कि माता लक्ष्मी का अवतार रुक्मिणी विदर्भ साम्राज्य की पुत्री थी। वह श्रीकृष्ण से विवाह करने की इच्छुक थी, मगर रुक्मिणी के पिता व भाई इससे सहमत नहीं थे। इसके चलते उन्होंने रुक्मिणी के विवाह में जरासंध और शिशुपाल को भी विवाह के लिए आमंत्रित किया था, जैसे ही यह खबर रुक्मिणी को पता चली तो उन्होंने दूत के माध्यम से अपने दिल की बात श्रीकृष्ण तक पहुंचाई और काफी संघर्ष हुआ युद्ध के बाद श्री कृष्ण रुक्मिणी से विवाह करने में सफल रहे।
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कठुआ। नगरी के रामलीला मैदान में श्रीमद् भागवत कथा संकीर्तन महामहोत्सव जारी है। कथा के छठे दिन पंडाल कथाव्यास मधुसूदन दासनूदास जी महाराज ने कंस वध व रुक्मिणी विवाह के प्रसंग सुनाए।
उन्होंने बताया कि जब कंस के अत्याचार से पृथ्वीवासी भगवान से गुहार लगाने लगे तब भगवान अवतरित हुए और कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों ही होना निश्चित है। इसलिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को कई बार मरवाने का प्रयास किया, लेकिन हर प्रयास असफल साबित होता रहा। कंस ने अपने प्रमुख अकरुर के द्वारा मल्ल युद्ध के बहाने 11 वर्ष की अल्पायु में कृष्ण और बलराम को मथुरा बुलवाकर शक्तिशाली योद्धा और पागल हाथियों से कुचलवाकर मारने का प्रयास किया, लेकिन वह सभी श्रीकृष्ण और बलराम के हाथों मारे गए। अंत में श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिला दी। कंस वध के बाद श्रीकृष्ण ने माता-पिता वसुदेव और देवकी और महाराज उग्रसेन को कारागार से मुक्त कराया।
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उन्होंने बताया कि माता लक्ष्मी का अवतार रुक्मिणी विदर्भ साम्राज्य की पुत्री थी। वह श्रीकृष्ण से विवाह करने की इच्छुक थी, मगर रुक्मिणी के पिता व भाई इससे सहमत नहीं थे। इसके चलते उन्होंने रुक्मिणी के विवाह में जरासंध और शिशुपाल को भी विवाह के लिए आमंत्रित किया था, जैसे ही यह खबर रुक्मिणी को पता चली तो उन्होंने दूत के माध्यम से अपने दिल की बात श्रीकृष्ण तक पहुंचाई और काफी संघर्ष हुआ युद्ध के बाद श्री कृष्ण रुक्मिणी से विवाह करने में सफल रहे।
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