फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Kathua News ›   Old eyes kept waiting for their sons in the old age home

Kathua News: वृद्धाश्रम में बेटों की राह देखती रह गईं बूढ़ी आंखें

Mon, 12 May 2025 12:40 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Mon, 12 May 2025 12:40 AM IST
विज्ञापन
Old eyes kept waiting for their sons in the old age home
कठुआ के वृद्ध आश्रम में बच्चों का इंतजार करने वाली बुजुर्ग महिलाएं। संवाद - फोटो : kathua
मां वृद्धाश्रम से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हर रोज जानती थी परिवार का कुशल मंगल
विज्ञापन

कठुआ। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हर रोज वृद्धाश्रम से फोन पर घर का कुशल मंगल जाने वाली मां को मातृ दिवस पर उसके ही परिवार वाले भूल गए। सुबह से ना कोई फोन कॉल आई और न ही किसी परिवार वाले ने उनका हालचाल जाना।
वृद्धाश्रम में लंबे समय से रह रही महिलाओं का कहना था कि आज मातृ दिवस है इसका पता ही नहीं चला। भारत पाकिस्तान तनाव के चलते स्कूल और कॉलेज बंद हैं। इसके चलते न तो इस बार स्कूली बच्चे मातृ दिवस मनाने वृद्धाश्रम आए। अगर स्कूल लगे होते कई स्कूलों के बच्चे अपने शिक्षकों के साथ जहां अवश्य आते। हमारे साथ बात करते, हमें गिफ्ट देते और हमसे हमारे बारे में जानते।
विज्ञापन

वृद्धाश्रम ने रहने वाली शक्ति देवी ने बताया कि भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच पिछली चार रात बम और मिसाइलों के धमाकों से वे बेचैन हो जाती थी। इन दिनों में उन्होंने कभी भी अपने बारे में चिंता नहीं की। हमेशा प्रार्थना की कि इन बमों और मिसाइलों से परिवार और खासकर पोता-पोतियों की रक्षा हो। हमने हमेशा ही उनकी चिंता की है, लेकिन उन्होंने कभी हमें याद नहीं किया। हां, शादीशुदा बेटियां मां को जरूर याद करती हैं और अपने साथ आने को भी कहती हैं, लेकिन हम कभी भी बेटियों के साथ नहीं रहना चाहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

शक्ति देवी, निवासी वृद्धाश्रम
पिछले कई वर्षों से यहां रह रही हूं। एक ही बेटा था। उसका भी ध्यान किसी बाबा के साथ लग गया और वह बाबा के साथ ही किसी आश्रम में रहने लगा। महीनों घर नहीं आता था। इसके चलते वह कठुआ स्थित वृद्धाश्रम में आकर रहने लगी। अब यही मेरा परिवार है। हालांकि मेरे पास फोन नहीं है। फिर भी वृद्धाश्रम के सचिव मेरी बात मेरे घर वालों से करवाते हैं।

पुष्पा देवी, निवासी वृद्धाश्रम
भाई की मौत के बाद भतीजा दिल्ली में रहता है और मुझे यहां छोड़ दिया। मां-बाप की मौत के बाद भाई ने ही मुझे हमेशा साथ रखा। भाई की आकस्मिक मृत्यु के बाद भतीजे ने मुझे छोड़ दिया। आठ दिन पहले ही वृद्धाश्रम आई। दो बेटे और घर होने के बावजूद उनके साथ नहीं रहती हूं। बेटे दिन-रात मेरे साथ लड़ते रहते हैं। इसके चलते में यहां आ गई, जहां कम से कम सुकून तो है।
संतोष देवी, निवासी वृद्धाश्रम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed