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Kathua News: टीन की छत के नीचे उज्ज्वल बनाया जा रहा देश का भविष्य
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बिलावर। किशनपुर में मौजूद लड़कों के सरकारी मिडिल स्कूल की इमारत खस्ताहाल है जिस कारण विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण ने बताया कि कई बार शिक्षा विभाग से पक्की इमारत बनाने की मांग की गई, लेकिन विभाग ने आज तक संज्ञान नहीं लिया।
स्थानीय निवासी ओमप्रकाश, रोशन लाल, राहुल, अनिल, कुलदीप और रमेश चंद्र ने बताया कि सरकार ने 1963 में इसे मिडिल स्कूल का दर्जा दिया था। इसके बाद वर्ष 1996 में स्कूल में दो पक्के कमरे बनाए गए जो विद्यार्थियों के लिए ना काफी हैं। एक कमरे में हेड मास्टर का कार्यालय चलता है। केवल एक पक्का कमरा विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए उपलब्ध है। यहां पर आठवीं के विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। पहली कक्षा से लेकर सातवीं कक्षा तक के छात्र 1963 में बनाए गए टीन की छत वाले चार कमरों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इन कमरों हालत जर्जर हो चुकी है। अगर जोरदार बारिश हो जाए तो छत से पानी टपकने लगता है।
लोगों ने कहा जिन चार कमरों पर टीन की छत लगाई गई है, उनकी दीवारें भी कच्ची हैं। विभाग शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे करता है लेकिन आज भी इलाके में कई ऐसे स्कूल हैं जिनकी इमारतें जर्जर हाल में हैं। लोगों ने मांग की है कि स्कूल के लिए पक्की इमारत बनाई जाए।
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स्थानीय निवासी ओमप्रकाश, रोशन लाल, राहुल, अनिल, कुलदीप और रमेश चंद्र ने बताया कि सरकार ने 1963 में इसे मिडिल स्कूल का दर्जा दिया था। इसके बाद वर्ष 1996 में स्कूल में दो पक्के कमरे बनाए गए जो विद्यार्थियों के लिए ना काफी हैं। एक कमरे में हेड मास्टर का कार्यालय चलता है। केवल एक पक्का कमरा विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए उपलब्ध है। यहां पर आठवीं के विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। पहली कक्षा से लेकर सातवीं कक्षा तक के छात्र 1963 में बनाए गए टीन की छत वाले चार कमरों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इन कमरों हालत जर्जर हो चुकी है। अगर जोरदार बारिश हो जाए तो छत से पानी टपकने लगता है।
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लोगों ने कहा जिन चार कमरों पर टीन की छत लगाई गई है, उनकी दीवारें भी कच्ची हैं। विभाग शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे करता है लेकिन आज भी इलाके में कई ऐसे स्कूल हैं जिनकी इमारतें जर्जर हाल में हैं। लोगों ने मांग की है कि स्कूल के लिए पक्की इमारत बनाई जाए।
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