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Kathua News: मक्खन दीन मामले में एसआईटी के अधिकारी अगली सुनवाई में तलब

Sat, 11 Oct 2025 01:35 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Sat, 11 Oct 2025 01:35 AM IST
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कठुआ। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कठुआ जिले में कथित पुलिस प्रताड़ना के बाद आत्महत्या करने वाले युवक मक्खन दीन के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) के दो पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल की एकल पीठ ने बीते बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए एसआईटी प्रमुख पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन्स) और उप-प्रभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) बिलावर को 27 अक्टूबर को अगली सुनवाई पर अदालत में उपस्थित होने को कहा।
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दरअसल, बिलावर निवासी 25 वर्षीय मक्खन दीन ने 4 फरवरी को कीटनाशक पीकर आत्महत्या कर ली थी। उसने एक वीडियो रिकॉर्ड कर अपनी बेगुनाही जताई थी और आतंकवादियों से किसी भी प्रकार के संबंध से इनकार किया था। इस घटना के बाद पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने अलग-अलग जांच शुरू की थी।
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अप्रैल 25 को हुई पिछली सुनवाई में एसडीपीओ नीरज पडियार ने अदालत को बताया था कि बिलावर थाने के थाना प्रभारी का तबादला हो चुका है और जिन दो अधिकारियों जुगल और हरीश पर आरोप लगे हैं, वे उस थाने में तैनात नहीं थे। लेकिन याचिकाकर्ता की वकील अप्पू सिंह सलाथिया ने एक पेन ड्राइव के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पेश किए, जिसमें यह दर्शाया गया कि जुगल और हरीश 5 फरवरी को मृतक को उसके घर ले जाने के समय मौजूद थे। बाद में मृतक ने भटोड़ी गांव की मस्जिद में आत्महत्या कर ली थी। याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि जब मृतक का शव अस्पताल ले जाया गया, उस समय भी चार पुलिस अधिकारी मौजूद थे, जिनमें जुगल और हरीश शामिल थे।
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न्यायमूर्ति नरगल ने कहा कि एसडीपीओ द्वारा दिए गए बयान में अस्पष्टता है, इसलिए उन्हें अगली सुनवाई पर अदालत में उपस्थित होकर अपना विस्तृत बयान न्यायिक रजिस्ट्रार के समक्ष दर्ज कराना होगा। साथ ही, यह जांचना आवश्यक है कि जुगल और हरीश कभी बिलावर थाने में तैनात थे या नहीं, और क्या वे घटनास्थल पर मौजूद थे। इसके अलावा, एसआईटी प्रमुख को भी व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर अब तक की जांच की जानकारी देने को कहा गया है। एसआईटी का गठन 10 मार्च को किया गया था। सरकारी अधिवक्ता सुनील मल्होत्रा को निर्देश दिया गया है कि वे अगली सुनवाई पर एसआईटी की केस फाइल अदालत में प्रस्तुत करें और जांच की स्थिति से अवगत कराएं। मुख्य सचिव और गृह सचिव द्वारा 16 अप्रैल को जारी नोटिस का जवाब न देने पर अदालत ने उन्हें एक अंतिम अवसर दिया है कि वे एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करें, अन्यथा मामला मेरिट के आधार पर सुना जाएगा।
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