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Kathua News: ज्ञान प्राप्त कर मिलेगी चिंता और बेचैनी से मुक्ति
Mon, 18 Sep 2023 01:20 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Mon, 18 Sep 2023 01:20 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। नगरी स्थित माता बाला सुंदरी के भवन में श्रीमद देवी का कथा का आयोजन जारी है। कथा के सातवें दिन कथा वाचक सुभाष शास्त्री ने उपस्थित संगत को ज्ञान प्राप्त करने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि मनुष्य को सदैव कामनाओं की पूर्ति न होने और जो प्राप्त है उसके खोने का भय बना रहता है। इससे मुक्ति मार्ग उसे नहीं मिल पाता है। ज्ञान प्राप्त कर वह इस चिंता और बेचैनी से मुक्त हो सकता है।
उन्होंने कहा कि योग दर्शन में बतलाया है कि अविद्या, अस्मिता, आसक्ति, द्वेष और मरण भय ये पांच क्लेश हैं। इन पांचों क्लेशों में बाद वाले चारों का कारण अविद्या है। इस अविद्या से ही संशय, भ्रम और प्रमाद की उत्पत्ति होती है। अज्ञान का नाश होता है यथार्थ ज्ञान से और उस यथार्थ ज्ञान की प्राप्ति के लिए शास्त्रों में बहुत उपाय बताए गए हैं। ईश्वर भक्ति कर उसकी कृपा का पात्र बनने से ही ज्ञान होता है। शास्त्री जी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने भी गीता में अर्जुन को माध्यम बनाकर कहा है कि महापुरुषों के बताए हुए साधन के अनुसार चलने से भी इस यथार्थ ज्ञान की प्राप्ति हो जाती है। इसलिए हे अर्जुन उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर उनकी सेवा कर, कपट छोड़कर सरलतापूर्वक पूछने पर वह महात्मा तुझे उस ज्ञान का उपदेश देंगे। इस प्रकार हर मनुष्य अविद्या का त्याग कर ज्ञान और अभय प्राप्त कर सकता है। जिसके मन में कोई भय नहीं, फिर उसके जीवन में शांति और आनंद का वास होता है। अंत में शास्त्री जी ने कहा कि संसार में जितने भी दुष्कर्म हो रहे हैं, उनका मुख्य कारण अशिक्षा है। इसलिए हमें कम से कम एक अशिक्षित को शिक्षा का दान देने का प्रण लेना होगा।
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कठुआ। नगरी स्थित माता बाला सुंदरी के भवन में श्रीमद देवी का कथा का आयोजन जारी है। कथा के सातवें दिन कथा वाचक सुभाष शास्त्री ने उपस्थित संगत को ज्ञान प्राप्त करने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि मनुष्य को सदैव कामनाओं की पूर्ति न होने और जो प्राप्त है उसके खोने का भय बना रहता है। इससे मुक्ति मार्ग उसे नहीं मिल पाता है। ज्ञान प्राप्त कर वह इस चिंता और बेचैनी से मुक्त हो सकता है।
उन्होंने कहा कि योग दर्शन में बतलाया है कि अविद्या, अस्मिता, आसक्ति, द्वेष और मरण भय ये पांच क्लेश हैं। इन पांचों क्लेशों में बाद वाले चारों का कारण अविद्या है। इस अविद्या से ही संशय, भ्रम और प्रमाद की उत्पत्ति होती है। अज्ञान का नाश होता है यथार्थ ज्ञान से और उस यथार्थ ज्ञान की प्राप्ति के लिए शास्त्रों में बहुत उपाय बताए गए हैं। ईश्वर भक्ति कर उसकी कृपा का पात्र बनने से ही ज्ञान होता है। शास्त्री जी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने भी गीता में अर्जुन को माध्यम बनाकर कहा है कि महापुरुषों के बताए हुए साधन के अनुसार चलने से भी इस यथार्थ ज्ञान की प्राप्ति हो जाती है। इसलिए हे अर्जुन उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर उनकी सेवा कर, कपट छोड़कर सरलतापूर्वक पूछने पर वह महात्मा तुझे उस ज्ञान का उपदेश देंगे। इस प्रकार हर मनुष्य अविद्या का त्याग कर ज्ञान और अभय प्राप्त कर सकता है। जिसके मन में कोई भय नहीं, फिर उसके जीवन में शांति और आनंद का वास होता है। अंत में शास्त्री जी ने कहा कि संसार में जितने भी दुष्कर्म हो रहे हैं, उनका मुख्य कारण अशिक्षा है। इसलिए हमें कम से कम एक अशिक्षित को शिक्षा का दान देने का प्रण लेना होगा।
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