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Kathua News: एनडीपीएस मामले में अदालत ने 15 साल बाद किया आरोपी को बरी
Tue, 12 Aug 2025 01:33 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 12 Aug 2025 01:33 AM IST
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नशीले कैप्सूल के साथ वर्ष 2010 में हटली पुलिस ने किया था गिरफ्तार
कठुआ। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने एनडीपीएस मामले में 15 साल पुराने मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार अभियोजन पक्ष आरोपी विशाल मेहरा के खिलाफ अपराध सिद्ध करने में असफल रहा।
अदालत ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है। साथ ही जमानती और व्यक्तिगत बांड से भी मुक्त करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि मामले में सह आरोपी सुशील सिंह के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 512 के तहत मामला लंबित है। लिहाजा रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए जब तक सह आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश नहीं किया जाता।
पुलिस की ओर से कोर्ट में दायर रिपोर्ट के अनुसार आरोपी विशाल मेहरा निवासी वार्ड तीन कठुआ और आरोपी सुशील सिंह निवासी बरवाल कठुआ को हटली पुलिस ने नशीली दवाओं की तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। मामला तीन जनवरी 2010 का है जब हटली पुलिस ने खरोट मोड़ स्थित नाका चेकिंग के दौरान दोनों आरोपियों को 430 और 590 पार्वोन स्पा कैप्सूल की खेप के साथ गिरफ्तार किया था।
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गिरफ्तारी के समय दोनों आरोपी मोटरसाइकिल पर कालीबड़ी से हटली मोड़ की तरफ जा रहे थे। इसके बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। दोनों के खिलाफ 27 अप्रैल 2010 को आरोप तय किए गए थे। इसमें दोनों ने खुद को निर्दोष बताकर मुकदमा चलाने का दावा किया था। इसके बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को आरोप-पत्र के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। अभियोजन पक्ष के 15 में से 11 गवाहों से पूछताछ की गई थी। सुनवाई के दौरान गवाहों की ओर से दी गई गवाहियों पर कोर्ट ने इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। अदालत ने माना कि बरामद कैप्सूलों की सुरक्षित हिरासत को लेकर अभियोजन पक्ष स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करने में असफल रहा। इसके अलावा बरामद कैप्सूलों के नमूने 72 घंटे के भीतर फॉरेंसिक लैब नहीं भेजे गए। इसके अलावा कोर्ट ने माना कि मालखाना रजिस्टर की प्रति या अन्य दस्तावेजी साक्ष्य भी रिकॉर्ड में मौजूद नहीं हैं।
साथ ही कोर्ट ने कहा कि एनडीपीएस मामलों में जांच की निष्पक्षता सर्वोपरि है यदि सुरक्षा उपायों का पालन नहीं होता तो पूरे मामले की वैधता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है। कोर्ट ने आरोपी विशाल को संदेह का लाभ देते हुए उसे बरी करने का फैसला सुनाया है। मामले में सह-आरोपी सुशील सिंह जमानत के बाद से फरार चल रहा है।
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कठुआ। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने एनडीपीएस मामले में 15 साल पुराने मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार अभियोजन पक्ष आरोपी विशाल मेहरा के खिलाफ अपराध सिद्ध करने में असफल रहा।
अदालत ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है। साथ ही जमानती और व्यक्तिगत बांड से भी मुक्त करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि मामले में सह आरोपी सुशील सिंह के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 512 के तहत मामला लंबित है। लिहाजा रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए जब तक सह आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश नहीं किया जाता।
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पुलिस की ओर से कोर्ट में दायर रिपोर्ट के अनुसार आरोपी विशाल मेहरा निवासी वार्ड तीन कठुआ और आरोपी सुशील सिंह निवासी बरवाल कठुआ को हटली पुलिस ने नशीली दवाओं की तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। मामला तीन जनवरी 2010 का है जब हटली पुलिस ने खरोट मोड़ स्थित नाका चेकिंग के दौरान दोनों आरोपियों को 430 और 590 पार्वोन स्पा कैप्सूल की खेप के साथ गिरफ्तार किया था।
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गिरफ्तारी के समय दोनों आरोपी मोटरसाइकिल पर कालीबड़ी से हटली मोड़ की तरफ जा रहे थे। इसके बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। दोनों के खिलाफ 27 अप्रैल 2010 को आरोप तय किए गए थे। इसमें दोनों ने खुद को निर्दोष बताकर मुकदमा चलाने का दावा किया था। इसके बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को आरोप-पत्र के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। अभियोजन पक्ष के 15 में से 11 गवाहों से पूछताछ की गई थी। सुनवाई के दौरान गवाहों की ओर से दी गई गवाहियों पर कोर्ट ने इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। अदालत ने माना कि बरामद कैप्सूलों की सुरक्षित हिरासत को लेकर अभियोजन पक्ष स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करने में असफल रहा। इसके अलावा बरामद कैप्सूलों के नमूने 72 घंटे के भीतर फॉरेंसिक लैब नहीं भेजे गए। इसके अलावा कोर्ट ने माना कि मालखाना रजिस्टर की प्रति या अन्य दस्तावेजी साक्ष्य भी रिकॉर्ड में मौजूद नहीं हैं।
साथ ही कोर्ट ने कहा कि एनडीपीएस मामलों में जांच की निष्पक्षता सर्वोपरि है यदि सुरक्षा उपायों का पालन नहीं होता तो पूरे मामले की वैधता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है। कोर्ट ने आरोपी विशाल को संदेह का लाभ देते हुए उसे बरी करने का फैसला सुनाया है। मामले में सह-आरोपी सुशील सिंह जमानत के बाद से फरार चल रहा है।