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Kathua News: अदालत ने मवेशी तस्कर पर लगाया 6,550 रुपये का जुर्माना
Sat, 19 Jul 2025 01:23 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sat, 19 Jul 2025 01:23 AM IST
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कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने मवेशी तस्करी मामले में दोषी को छह हजार 550 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। आदेश के अनुसार यह जुर्माना दोषी को जिला मजिस्ट्रेट के सरकारी आदेश की अवहेलना, बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने और मवेशी तस्करी तस्करी मामले में दोषी पाए जाने पर दी गई है।
पुलिस की ओर से कोर्ट में दायर रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी मोहम्मद वहीद पुत्र अब्दुल कयूम निवासी दरहाल राजौरी को राजबाग पुलिस ने मवेशी तस्करी के आरोप में बीते महीने राजबाग से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने अपनी जांच में पाया कि आरोपी के पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस है। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 223, पीसीए की धारा 11 और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 3/181 के तहत मामला दर्ज कर बीते 7 जुलाई को चालान को कोर्ट में प्रस्तुत किया। इसी दिन आरोपी ने कोर्ट के समक्ष अपने अपराध की स्वीकारोक्ति बयान के लिए आवेदन दिया। कोर्ट ने अभियुक्त को बताया कि वह ऐसा बयान देने के लिए बाध्य नहीं है और यदि वह ऐसा करता है, तो यह बयान उसके खिलाफ भी पढ़ा जा करता है। कोर्ट ने आरोपी पर लगाए गए अपराध के बारे में विस्तार से बताया और उसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के प्राप्त समय दिया गया। जिसके बाद भी आरोपी अपने बयान पर अड़ा रहा कि वह अपनी इच्छा से बयान दर्ज करवाना चाहता है। इसके बाद कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए उस पर 6550 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। जिसे दोषी ने मौके पर ही अदा कर दिया। जिसके बाद कोर्ट ने मामला का निपटारा कर दोषी के जमानती और व्यक्तिगत बांड को रद्द करने का निर्देश दिया।
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पुलिस की ओर से कोर्ट में दायर रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी मोहम्मद वहीद पुत्र अब्दुल कयूम निवासी दरहाल राजौरी को राजबाग पुलिस ने मवेशी तस्करी के आरोप में बीते महीने राजबाग से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने अपनी जांच में पाया कि आरोपी के पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस है। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 223, पीसीए की धारा 11 और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 3/181 के तहत मामला दर्ज कर बीते 7 जुलाई को चालान को कोर्ट में प्रस्तुत किया। इसी दिन आरोपी ने कोर्ट के समक्ष अपने अपराध की स्वीकारोक्ति बयान के लिए आवेदन दिया। कोर्ट ने अभियुक्त को बताया कि वह ऐसा बयान देने के लिए बाध्य नहीं है और यदि वह ऐसा करता है, तो यह बयान उसके खिलाफ भी पढ़ा जा करता है। कोर्ट ने आरोपी पर लगाए गए अपराध के बारे में विस्तार से बताया और उसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के प्राप्त समय दिया गया। जिसके बाद भी आरोपी अपने बयान पर अड़ा रहा कि वह अपनी इच्छा से बयान दर्ज करवाना चाहता है। इसके बाद कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए उस पर 6550 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। जिसे दोषी ने मौके पर ही अदा कर दिया। जिसके बाद कोर्ट ने मामला का निपटारा कर दोषी के जमानती और व्यक्तिगत बांड को रद्द करने का निर्देश दिया।
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