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Kathua News: लापरवाही से वाहन चलाने के मामले में आरोपी को किया बरी
Mon, 29 Dec 2025 01:09 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Mon, 29 Dec 2025 01:09 AM IST
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वर्ष 2021 का हीरानगर का है मामला, आरोपी ने कोर्ट में स्वीकारोक्ति बयान दर्ज कर अपने गुनाह को स्वीकार किया
कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने लापरवाही से वाहन चलाने से हुई दुर्घटना मामले में दोषी को सजा से मुक्त कर सिर्फ चेतावनी देकर बरी कर दिया। आदेश के अनुसार अदालत ने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 360 के तहत प्रावधान का उपयोग कर दोषी को केवल उचित चेतावनी देकर छोड़ने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह फैसला आरोपी को कम आयु को देखते हुए लिया है। बता दें कि मामले में आरोपी ने कोर्ट में स्वीकारोक्ति बयान दर्ज कर अपने गुनाह को स्वीकार किया है।
कोर्ट में दायर स्वीकारोक्ति बयान के अनुसार दुर्घटना का मामला 2 अगस्त 2021 का हीरानगर इलाके का है। इसमें आरोपी सुशांत शर्मा निवासी हीरानगर पर आरोप है कि उसने घटना के दिन लापरवाही और तेज गति से मोटरसाइकिल चलते हुए शिकायतकर्ता के पिता को टक्कर मार दी। इसमें शिकायतकर्ता के पिता गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद शिकायतकर्ता ने 3 अगस्त 2021 को पुलिस थाना हीरानगर में शिकायत की थी जिसके बाद पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 279 और 338 के तहत मामला दर्ज कर चालान को अदालत में 23 दिसंबर 2021 को प्रस्तुत किया था। बीते 20 दिसंबर 2025 को दुर्घटना में घायल व्यक्ति ने कोर्ट बयान दर्ज करवाकर आरोपी द्वारा आईपीसी की धारा 338 के तहत अपराध को खत्म करना चाहता है। इसे अदालत ने मान लिया और आरोपी को निर्दोष साबित कर दिया गया। इसके बाद आरोपी ने खुद भी अदालत के सामने पेश होकर आईपीसी की धारा 279 के तहत अपना जुर्म कबूल करने की बात कही। आरोपी ने अदालत में कहा कि वह 22 साल का है और घटना के समय वह सिर्फ 18 साल का था। उसने यह दलील दी है कि अगर उसे दोषी ठहराया जाता है तो इससे उसका भविष्य खराब हो जाएगा।
अदालत ने आरोपी को समझाया कि वह अपने स्वीकारोक्ति बयान दर्ज करवाने के बाध्य नहीं है अगर वह ऐसा करता है तो उसका बयान उसके खिलाफ भी पढ़ा जा सकता है। अदालत ने आरोपी को बताया कि धारा 279 के तहत अधिकतम छह माह की सजा या पांच सौ रुपये जुर्माने का प्रावधान है। अदालत ने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 360 के तहत प्रावधान का उपयोग करते हुए आरोपी को केवल उचित चेतावनी देकर छोड़ने का आदेश दिया। इसके बाद न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस दोषसिद्धि से आरोपी के भविष्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, न ही सेवा, न ही पासपोर्ट या अन्य अवसरों में। इसके अलावा अदालत ने उसके जमानती व व्यक्तिगत बांड को भी रद्द कर दिया।
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कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने लापरवाही से वाहन चलाने से हुई दुर्घटना मामले में दोषी को सजा से मुक्त कर सिर्फ चेतावनी देकर बरी कर दिया। आदेश के अनुसार अदालत ने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 360 के तहत प्रावधान का उपयोग कर दोषी को केवल उचित चेतावनी देकर छोड़ने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह फैसला आरोपी को कम आयु को देखते हुए लिया है। बता दें कि मामले में आरोपी ने कोर्ट में स्वीकारोक्ति बयान दर्ज कर अपने गुनाह को स्वीकार किया है।
कोर्ट में दायर स्वीकारोक्ति बयान के अनुसार दुर्घटना का मामला 2 अगस्त 2021 का हीरानगर इलाके का है। इसमें आरोपी सुशांत शर्मा निवासी हीरानगर पर आरोप है कि उसने घटना के दिन लापरवाही और तेज गति से मोटरसाइकिल चलते हुए शिकायतकर्ता के पिता को टक्कर मार दी। इसमें शिकायतकर्ता के पिता गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद शिकायतकर्ता ने 3 अगस्त 2021 को पुलिस थाना हीरानगर में शिकायत की थी जिसके बाद पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 279 और 338 के तहत मामला दर्ज कर चालान को अदालत में 23 दिसंबर 2021 को प्रस्तुत किया था। बीते 20 दिसंबर 2025 को दुर्घटना में घायल व्यक्ति ने कोर्ट बयान दर्ज करवाकर आरोपी द्वारा आईपीसी की धारा 338 के तहत अपराध को खत्म करना चाहता है। इसे अदालत ने मान लिया और आरोपी को निर्दोष साबित कर दिया गया। इसके बाद आरोपी ने खुद भी अदालत के सामने पेश होकर आईपीसी की धारा 279 के तहत अपना जुर्म कबूल करने की बात कही। आरोपी ने अदालत में कहा कि वह 22 साल का है और घटना के समय वह सिर्फ 18 साल का था। उसने यह दलील दी है कि अगर उसे दोषी ठहराया जाता है तो इससे उसका भविष्य खराब हो जाएगा।
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अदालत ने आरोपी को समझाया कि वह अपने स्वीकारोक्ति बयान दर्ज करवाने के बाध्य नहीं है अगर वह ऐसा करता है तो उसका बयान उसके खिलाफ भी पढ़ा जा सकता है। अदालत ने आरोपी को बताया कि धारा 279 के तहत अधिकतम छह माह की सजा या पांच सौ रुपये जुर्माने का प्रावधान है। अदालत ने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 360 के तहत प्रावधान का उपयोग करते हुए आरोपी को केवल उचित चेतावनी देकर छोड़ने का आदेश दिया। इसके बाद न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस दोषसिद्धि से आरोपी के भविष्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, न ही सेवा, न ही पासपोर्ट या अन्य अवसरों में। इसके अलावा अदालत ने उसके जमानती व व्यक्तिगत बांड को भी रद्द कर दिया।
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