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Kathua News: कठुआ में धान की बौनी बीमारी का खतरा
Sun, 27 Jul 2025 12:46 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 27 Jul 2025 12:46 AM IST
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स्कॉस्ट-जम्मू ने दी सतर्कता बरतने की सलाह
कठुआ। कठुआ जिले के जगतपुर (ब्लॉक कीड़ियां गंडियाल) में धान की फसल में बौनेपन के लक्षण दिखाई देने पर स्कॉस्ट-जम्मू के वैज्ञानिकों ने सतर्कता बरतने की अपील की।
यह बौनापन शुरुआती रोपित क्षेत्रों में देखा गया है, जो संभवतः साउदर्न राइस ब्लैक-स्ट्रिक्ड ड्वार्फ वायरस के कारण हो सकता है। इस चेतावनी की शुरुआत केवीके कठुआ ने की, जिसके बाद स्कॉस्ट-जम्मू की टीम ने खेतों का निरीक्षण कर वाइट बैक्ड प्लांहॉपर की हल्की उपस्थिति दर्ज की।
यह कीट साउदर्न राइस ब्लैक-स्ट्रिक्ड ड्वार्फ वायरस वायरस का मुख्य वाहक है। इससे पहले वर्ष 2022 में पंजाब हरियाणा और जम्मू क्षेत्र के कुछ हिस्सों में ऐसे ही प्रकोप सामने आए थे।
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स्कॉस्ट-जम्मू के वैज्ञानिक सर्वेक्षण में डॉ. राजन सलारिया (कीट विज्ञान), डॉ. वीबी सिंह (पादप रोग विज्ञान), डॉ. विशाल महाजन और डॉ. अनामिका जम्वाल (केवीके कठुआ) शामिल रहे। वैज्ञानिकों ने पीआर 113 और समान शक्ति 7501 किस्मों में 1–4 प्रतिशत तक बौनापन पाया।
किसानों को सलाह दी गई है कि यदि प्लांटाहॉपर की संख्या प्रति पौध 5–10 से अधिक हो। प्राकृतिक शत्रुओं जैसे परजीवी ततैया, मकड़ियां और जलजीवी शिकारी कीटों (जैसे डैम्सेलफ्लाई व बीटल) को संरक्षित करने की अपील की गई है।
ईटीएल से अधिक की स्थिति में डिनोटेफुरान, पाइमेट्रोजिन, ट्राईफलूमिजोपाइरिन और थियामिथोजाम जैसे सीआईबाआरसी-मान्यता प्राप्त कीटनाशकों का उपयोग किया जा सकता है जबकि सामान्य स्थिति में एनएसकेई 5% या अजादिराचिन जैविक विकल्प अपनाने की सलाह दी गई है। स्प्रे के लिए प्रति एकड़ 100–120 लीटर पानी की आवश्यकता है।
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कठुआ। कठुआ जिले के जगतपुर (ब्लॉक कीड़ियां गंडियाल) में धान की फसल में बौनेपन के लक्षण दिखाई देने पर स्कॉस्ट-जम्मू के वैज्ञानिकों ने सतर्कता बरतने की अपील की।
यह बौनापन शुरुआती रोपित क्षेत्रों में देखा गया है, जो संभवतः साउदर्न राइस ब्लैक-स्ट्रिक्ड ड्वार्फ वायरस के कारण हो सकता है। इस चेतावनी की शुरुआत केवीके कठुआ ने की, जिसके बाद स्कॉस्ट-जम्मू की टीम ने खेतों का निरीक्षण कर वाइट बैक्ड प्लांहॉपर की हल्की उपस्थिति दर्ज की।
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यह कीट साउदर्न राइस ब्लैक-स्ट्रिक्ड ड्वार्फ वायरस वायरस का मुख्य वाहक है। इससे पहले वर्ष 2022 में पंजाब हरियाणा और जम्मू क्षेत्र के कुछ हिस्सों में ऐसे ही प्रकोप सामने आए थे।
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स्कॉस्ट-जम्मू के वैज्ञानिक सर्वेक्षण में डॉ. राजन सलारिया (कीट विज्ञान), डॉ. वीबी सिंह (पादप रोग विज्ञान), डॉ. विशाल महाजन और डॉ. अनामिका जम्वाल (केवीके कठुआ) शामिल रहे। वैज्ञानिकों ने पीआर 113 और समान शक्ति 7501 किस्मों में 1–4 प्रतिशत तक बौनापन पाया।
किसानों को सलाह दी गई है कि यदि प्लांटाहॉपर की संख्या प्रति पौध 5–10 से अधिक हो। प्राकृतिक शत्रुओं जैसे परजीवी ततैया, मकड़ियां और जलजीवी शिकारी कीटों (जैसे डैम्सेलफ्लाई व बीटल) को संरक्षित करने की अपील की गई है।
ईटीएल से अधिक की स्थिति में डिनोटेफुरान, पाइमेट्रोजिन, ट्राईफलूमिजोपाइरिन और थियामिथोजाम जैसे सीआईबाआरसी-मान्यता प्राप्त कीटनाशकों का उपयोग किया जा सकता है जबकि सामान्य स्थिति में एनएसकेई 5% या अजादिराचिन जैविक विकल्प अपनाने की सलाह दी गई है। स्प्रे के लिए प्रति एकड़ 100–120 लीटर पानी की आवश्यकता है।