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Kathua News: टीकाकरण तक सिमटी यू-पीएचसी, न डॉक्टर, न इमारत
Thu, 07 May 2026 01:03 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Thu, 07 May 2026 01:03 AM IST
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फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन व एएनओ के भरोसे चल रहा केंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (यू-पीएचसी) सिर्फ टीकाकरण केंद्र बनकर रह गई है। हैरानी की बात यह है कि स्थापना के 10 साल बाद भी यहां किसी एमबीबीएस डॉक्टर की नियमित तैनाती नहीं हो पाई और न ही इसे आज तक अपनी इमारत मिल सकी है।
स्थापना के समय से यह पीएचसी किराये के मकान में चल रही है। इसमें सिर्फ गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के विभिन्न टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग हर वर्ष लाखों रुपये की राशि किराये के रूप में दे रहा है। वर्तमान में यह पीएचसी फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और एएनओ के भरोसे चल रही है। इसमें शुरुआती दो महीनों को छोड़कर कभी भी एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब इस केंद्र की स्थापना हुई थी तब उम्मीद थी कि नाग नगर सहित आसपास के वार्डों के लोगों को सामान्य जांच और प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएं मिलेंगी। हकीकत यह है कि यहां आने वाले मरीजों को छोटी-मोटी बीमारी का इलाज होता और न पर्याप्त दवाइयां मिलती हैं। इसके चलते मरीजों को जीएमसी कठुआ के चक्कर लगाने पड़ते हैं। मरीजों की शिकायत है कि बुखार, संक्रमण, त्वचा रोग, बुजुर्गों की सामान्य बीमारियां या महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी यहां चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध नहीं होता।
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पहली मंजिल में किराये के मकान में चल रही यू-पीएचसी
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नाग नगर एक निजी मकान की पहली मंजिल पर किराये के भवन में संचालित हो रही है। स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने के लिए अस्थायी रूप से लोहे की सीधी और खड़ी सीढ़ियां लगाई गई हैं। इनपर चढ़ना बुजुर्ग मरीजों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को गोद में लेकर आने वाली माताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि कम से कम स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था ऐसी इमारत में हो जहां लोग आसानी से उपचार करवा सकें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (यू-पीएचसी) सिर्फ टीकाकरण केंद्र बनकर रह गई है। हैरानी की बात यह है कि स्थापना के 10 साल बाद भी यहां किसी एमबीबीएस डॉक्टर की नियमित तैनाती नहीं हो पाई और न ही इसे आज तक अपनी इमारत मिल सकी है।
स्थापना के समय से यह पीएचसी किराये के मकान में चल रही है। इसमें सिर्फ गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के विभिन्न टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग हर वर्ष लाखों रुपये की राशि किराये के रूप में दे रहा है। वर्तमान में यह पीएचसी फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और एएनओ के भरोसे चल रही है। इसमें शुरुआती दो महीनों को छोड़कर कभी भी एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई।
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स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब इस केंद्र की स्थापना हुई थी तब उम्मीद थी कि नाग नगर सहित आसपास के वार्डों के लोगों को सामान्य जांच और प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएं मिलेंगी। हकीकत यह है कि यहां आने वाले मरीजों को छोटी-मोटी बीमारी का इलाज होता और न पर्याप्त दवाइयां मिलती हैं। इसके चलते मरीजों को जीएमसी कठुआ के चक्कर लगाने पड़ते हैं। मरीजों की शिकायत है कि बुखार, संक्रमण, त्वचा रोग, बुजुर्गों की सामान्य बीमारियां या महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी यहां चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध नहीं होता।
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पहली मंजिल में किराये के मकान में चल रही यू-पीएचसी
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नाग नगर एक निजी मकान की पहली मंजिल पर किराये के भवन में संचालित हो रही है। स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने के लिए अस्थायी रूप से लोहे की सीधी और खड़ी सीढ़ियां लगाई गई हैं। इनपर चढ़ना बुजुर्ग मरीजों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को गोद में लेकर आने वाली माताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि कम से कम स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था ऐसी इमारत में हो जहां लोग आसानी से उपचार करवा सकें।