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Kathua News: सात साल बाद भी नैदानिक मनोविज्ञानी का पद रिक्त
Wed, 14 Jan 2026 12:32 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Wed, 14 Jan 2026 12:32 AM IST
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कठुआ। राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) कठुआ के मनोरोग विभाग में स्थापना के सात साल बाद नैदानिक मनोविज्ञानी और मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता के पद नहीं भरे गए हैं। इसका सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिकित्सा सेवाओं पर पड़ रहा है।
हैरानी की बात है कि एम्स के प्रोजेक्ट एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (एटीएफ) के तहत तैनात अस्थायी और अप्रशिक्षित काउंसलर से मदद ली जा रही है। युवाओं में बढ़ते तनाव, अवसाद, नशे की लत, बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्याएं और मानसिक रोगों के मामलों के बावजूद इस अहम पदों को नहीं भरा जाना स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जीएमसी में प्रतिदिन दर्जनों मरीज मनोरोग विभाग में इलाज के लिए आते हैं लेकिन कई बार कुछ जटिल मामलों में नैदानिक मनोविज्ञानी के परामर्श की जरूरत महसूस होती है। ऐसे में मरीजों को नैदानिक मनोविज्ञानी परामर्श के लिए जम्मू रेफर किया जाता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और समय पर इलाज न मिलने से बीमारी और गंभीर हो जाती है।
मनोरोग विशेषज्ञ के अनुसार एक नैदानिक मनोविज्ञानी का कार्य मनोचिकित्सकों के इलाज को सहयोग देना होता है। इससे मरीजों को समुचित परामर्श, मनोवैज्ञानिक परीक्षण, व्यवहार चिकित्सा और काउंसलिंग जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करवाई जाती है।
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मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता मनोचिकित्सक के बीच पुल का काम करता है जो यह सुनिश्चित करता है कि मरीज समय पर दवा ले रहा है कि नहीं या इस दवा से एक मरीज के व्यवहार में क्या-क्या बदलाव आ रहे हैं। मगर दोनों पदों पर नियुक्ति न होने से इसका सीधा असर संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है। संवाद
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हैरानी की बात है कि एम्स के प्रोजेक्ट एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (एटीएफ) के तहत तैनात अस्थायी और अप्रशिक्षित काउंसलर से मदद ली जा रही है। युवाओं में बढ़ते तनाव, अवसाद, नशे की लत, बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्याएं और मानसिक रोगों के मामलों के बावजूद इस अहम पदों को नहीं भरा जाना स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जीएमसी में प्रतिदिन दर्जनों मरीज मनोरोग विभाग में इलाज के लिए आते हैं लेकिन कई बार कुछ जटिल मामलों में नैदानिक मनोविज्ञानी के परामर्श की जरूरत महसूस होती है। ऐसे में मरीजों को नैदानिक मनोविज्ञानी परामर्श के लिए जम्मू रेफर किया जाता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और समय पर इलाज न मिलने से बीमारी और गंभीर हो जाती है।
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मनोरोग विशेषज्ञ के अनुसार एक नैदानिक मनोविज्ञानी का कार्य मनोचिकित्सकों के इलाज को सहयोग देना होता है। इससे मरीजों को समुचित परामर्श, मनोवैज्ञानिक परीक्षण, व्यवहार चिकित्सा और काउंसलिंग जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करवाई जाती है।
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मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता मनोचिकित्सक के बीच पुल का काम करता है जो यह सुनिश्चित करता है कि मरीज समय पर दवा ले रहा है कि नहीं या इस दवा से एक मरीज के व्यवहार में क्या-क्या बदलाव आ रहे हैं। मगर दोनों पदों पर नियुक्ति न होने से इसका सीधा असर संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है। संवाद