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Kathua News: अतिक्रमण मामले में चार आरोपी आठ साल बाद बरी
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कठुआ। विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट अमनदीप कौर ने आठ साल पुराने आपराधिक अतिक्रमण और चारदीवारी को नुकसान पहुंचाने के मामले में चार आरोपियों को बरी किया है। आदेश के अनुसार, अभियोजन पक्ष आरोपी व्यक्तियों के अपराध को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। इसके चलते चालान को साबित न होने के कारण खारिज कर सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। इसके अलावा कोर्ट ने आरोपियों के जमानत और व्यक्तिगत बांड को भी खारिज कर दिया है।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी कृष्ण चंदर निवासी सुमवां, राकेश कुमार निवासी चज्याल, दीपक कुमार निवासी मुट्ठी खुर्द और रणधीर कुमार निवासी चज्याल कठुआ पर आरोप था कि उन्होंने 15 अप्रैल 2016 को देर शाम गांव धलौट में अतिक्रमण करने के इरादे से एक जमीन के टुकड़े की चारदीवारी को तोड़ दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना तुरंत संबंधित पुलिस थाने में दी। अगली सुबह पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत कोर्ट में की। कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने आरपीसी की धारा 447/427/34 के तहत मामला दर्ज कर मामले की जांच तत्कालीन एएसआई ओंकार चंद को सौंपी। कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद सभी आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया और मुकद्दमा चलाने का दावा किया। इसके बाद अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाहों में से आठ को पेश किया गया। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश गवाहों की गवाही में कुछ विसंगतियां पाई गईं, जिसमें गवाहों ने घटना के बारे में अलग-अलग समय का जिक्र करने के साथ-साथ भूमि स्वामित्व के दावों, चारदीवारी के निर्माण और उसे क्षतिग्रस्त करने में गवाहों की अलग-अलग राय सामने आई। इसके अलावा कोर्ट ने पाया कि दीवार को गिराने में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई किसी भी सामग्री या उपकरण की जब्ती न होना। जो जांच की गहनता पर गंभीर संदेह पैदा करता है। इसके बाद कोर्ट ने सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी करने का फैसला सुनाया।
यह था मामला
शिकायतकर्ता तरसेम लाल के अनुसार, मार्च 2011 में उसने करतार सिंह से खसरा नंबर 361 गांव धलोट में आठ मरला जमीन का टुकड़ा और आठ फुट का रास्ता खरीदा था। उक्त जमीन का टुकड़ा खरीदने के बाद शिकायतकर्ता ने उक्त प्लॉट का प्लिंथ भर दिया गया था। वर्ष 2016 में उक्त जमीन के टुकड़े की चारदीवारी का निर्माण करवाया था। बाद में चारों आरोपियों ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर तोड़ दिया था।
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पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी कृष्ण चंदर निवासी सुमवां, राकेश कुमार निवासी चज्याल, दीपक कुमार निवासी मुट्ठी खुर्द और रणधीर कुमार निवासी चज्याल कठुआ पर आरोप था कि उन्होंने 15 अप्रैल 2016 को देर शाम गांव धलौट में अतिक्रमण करने के इरादे से एक जमीन के टुकड़े की चारदीवारी को तोड़ दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना तुरंत संबंधित पुलिस थाने में दी। अगली सुबह पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत कोर्ट में की। कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने आरपीसी की धारा 447/427/34 के तहत मामला दर्ज कर मामले की जांच तत्कालीन एएसआई ओंकार चंद को सौंपी। कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद सभी आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया और मुकद्दमा चलाने का दावा किया। इसके बाद अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाहों में से आठ को पेश किया गया। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश गवाहों की गवाही में कुछ विसंगतियां पाई गईं, जिसमें गवाहों ने घटना के बारे में अलग-अलग समय का जिक्र करने के साथ-साथ भूमि स्वामित्व के दावों, चारदीवारी के निर्माण और उसे क्षतिग्रस्त करने में गवाहों की अलग-अलग राय सामने आई। इसके अलावा कोर्ट ने पाया कि दीवार को गिराने में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई किसी भी सामग्री या उपकरण की जब्ती न होना। जो जांच की गहनता पर गंभीर संदेह पैदा करता है। इसके बाद कोर्ट ने सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी करने का फैसला सुनाया।
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यह था मामला
शिकायतकर्ता तरसेम लाल के अनुसार, मार्च 2011 में उसने करतार सिंह से खसरा नंबर 361 गांव धलोट में आठ मरला जमीन का टुकड़ा और आठ फुट का रास्ता खरीदा था। उक्त जमीन का टुकड़ा खरीदने के बाद शिकायतकर्ता ने उक्त प्लॉट का प्लिंथ भर दिया गया था। वर्ष 2016 में उक्त जमीन के टुकड़े की चारदीवारी का निर्माण करवाया था। बाद में चारों आरोपियों ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर तोड़ दिया था।
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