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Kathua News: महाआरती के बाद महामाई का जागरण
Sat, 04 Apr 2026 01:38 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sat, 04 Apr 2026 01:38 AM IST
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श्री हनुमान सुरसा माता मंदिर में आयोजित महाआरती में भाग लेते भक्त। संवाद
- फोटो : संवाद
महामाई के जागरण के साथ श्री हनुमान जयंती कार्यक्रम संपन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। शहर के रामलीला मैदान स्थित श्री हनुमान माता सुरसा मंदिर में जारी श्री हनुमान जयंती कार्यक्रम संपन्न हो गया। बीती रात मंदिर परिसर में महाआरती के बाद महामाई के भव्य जागरण का आयोजन किया गया। इसमें पंडित अभितेष शर्मा ने मधुर आवाज में मोहक भजन पेश कर उपस्थित श्रद्धालुओं को झूमने के लिए मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम के तहत शाम को श्री हनुमान कथा के दौरान से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। इस दौरान कतार में श्रद्धालुओं ने एक-एक कर विशेष रूप से सुसज्जित पवन पुत्र की प्रतिमा का दर्शन किया। वहीं इसके बाद मंदिर परिसर में भगवान की भव्य महा आरती का आयोजन किया गया
रात करीब 9 बजे शुरू हुए महामाई के जागरण के दौरान पं. अभितेष शर्मा ने एक के बाद एक जब भजनों को प्रस्तुत करना शुरू किया तो वहां उपस्थित संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। तारा रानी की कथा के साथ सुबह जागरण का समापन हुआ। इसके साथ ही मंदिर में पवनपुत्र के जन्मोत्सव पर चलने वाले चौबीस घंटों के कार्यक्रम का समापन हो गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। शहर के रामलीला मैदान स्थित श्री हनुमान माता सुरसा मंदिर में जारी श्री हनुमान जयंती कार्यक्रम संपन्न हो गया। बीती रात मंदिर परिसर में महाआरती के बाद महामाई के भव्य जागरण का आयोजन किया गया। इसमें पंडित अभितेष शर्मा ने मधुर आवाज में मोहक भजन पेश कर उपस्थित श्रद्धालुओं को झूमने के लिए मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम के तहत शाम को श्री हनुमान कथा के दौरान से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। इस दौरान कतार में श्रद्धालुओं ने एक-एक कर विशेष रूप से सुसज्जित पवन पुत्र की प्रतिमा का दर्शन किया। वहीं इसके बाद मंदिर परिसर में भगवान की भव्य महा आरती का आयोजन किया गया
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रात करीब 9 बजे शुरू हुए महामाई के जागरण के दौरान पं. अभितेष शर्मा ने एक के बाद एक जब भजनों को प्रस्तुत करना शुरू किया तो वहां उपस्थित संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया। तारा रानी की कथा के साथ सुबह जागरण का समापन हुआ। इसके साथ ही मंदिर में पवनपुत्र के जन्मोत्सव पर चलने वाले चौबीस घंटों के कार्यक्रम का समापन हो गया।
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