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संसार का प्रत्येक मानव दुखों से ग्रस्त : संत सुभाष शास्त्री
Sat, 28 Mar 2026 02:24 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sat, 28 Mar 2026 02:24 AM IST
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संत सुभाष शास्त्री प्रवचण करते हुए संवाद
भल्लड़ पंदराड़ में श्रीमद् देवी भागवत कथा का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। भल्लड़ पंदराड़ गांव स्थित माता बाला सुंदरी मंदिर में नौ दिन से चल रही श्रीमद् देवी भागवत कथा का शुक्रवार को विधिवत समापन किया गया। संत सुभाष शास्त्री ने कहा कि संसार का प्रत्येक मानव दुखों से ग्रस्त है क्योंकि वह स्वयं को जगत के बंधनों में बांध लेता है। जब तक मनुष्य संकल्पों से मुक्त नहीं होता तब तक उसके दुखों का अंत संभव नहीं।
मंदिर समिति के सदस्य मुख्य यजमान और भक्तों ने कथाव्यास संत सुभाष शास्त्री का आशीर्वाद लिया। शास्त्री ने मां भगवती की महिमा का यशगान करते हुए कथा का अंतिम सत्र सुनाया। उन्होंने समझाया कि प्रभु के नाम का उच्चारण और उनकी छवि को हृदय, मन और नेत्रों में धारण करने से व्यक्ति सहजता से प्रभु के अनुग्रह का अधिकारी बन जाता है और दुखों से मुक्ति प्राप्त करता है। उन्होंने परिवार, गुरु, माता-पिता, संतान, व्यवसाय और समाज के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन करने पर बल दिया। कथा के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें कथा में सम्मिलित भक्तों के साथ-साथ बड़ी संख्या में अन्य श्रद्धालुओं ने भी प्रसाद ग्रहण किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। भल्लड़ पंदराड़ गांव स्थित माता बाला सुंदरी मंदिर में नौ दिन से चल रही श्रीमद् देवी भागवत कथा का शुक्रवार को विधिवत समापन किया गया। संत सुभाष शास्त्री ने कहा कि संसार का प्रत्येक मानव दुखों से ग्रस्त है क्योंकि वह स्वयं को जगत के बंधनों में बांध लेता है। जब तक मनुष्य संकल्पों से मुक्त नहीं होता तब तक उसके दुखों का अंत संभव नहीं।
मंदिर समिति के सदस्य मुख्य यजमान और भक्तों ने कथाव्यास संत सुभाष शास्त्री का आशीर्वाद लिया। शास्त्री ने मां भगवती की महिमा का यशगान करते हुए कथा का अंतिम सत्र सुनाया। उन्होंने समझाया कि प्रभु के नाम का उच्चारण और उनकी छवि को हृदय, मन और नेत्रों में धारण करने से व्यक्ति सहजता से प्रभु के अनुग्रह का अधिकारी बन जाता है और दुखों से मुक्ति प्राप्त करता है। उन्होंने परिवार, गुरु, माता-पिता, संतान, व्यवसाय और समाज के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन करने पर बल दिया। कथा के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें कथा में सम्मिलित भक्तों के साथ-साथ बड़ी संख्या में अन्य श्रद्धालुओं ने भी प्रसाद ग्रहण किया।
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