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Kathua News: किसानों ने सिंचाई के लिए कनेक्शन लिए, लेकिन बिजली नहीं मिल रही
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कठुआ। बदहाल व्यवस्था के कारण बिजली के संकट का सामना कर रहे कोटपुन्नू के किसानों ने बिजली विभाग के खिलाफ कड़ा रोष जताया है। किसानों का कहना है कि अगर बिजली आपूर्ति व्यवस्था ऐसी ही रहती है तो सिंचाई के लिए बिजली के कनेक्शन लेने का कोई औचित्य नही रह जाएगा।
किसान कुलदीप कुमार ने रोष जताते हुए कहा कि इलाके में एक दर्जन के करीब बिजली के खंबे जमीन पर गिरे हुए हैं। इनकी सुध विभाग खुद लेता नही है और अगर कोई किसान फोन से इसकी शिकायत करता है तो विभाग के कर्मचारी उसका फोन भी नही उठाते हैं। उन्होंने बताया कि इलाके में गिरे बिजली के खंभों को ठीक करने के लिए वह खुद विभाग के जेई से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान करने के बजाय किसानों पर ही बिजली के बिल का भुगतान न करने का आरोप लगा दिया जाता है।
वहीं दर्शन सिंह ने कहा कि इस समय धान की पनीरी लगाने का वक्त है लेकिन पिछले पंद्रह दिनों से इलाके में बिजली की सप्लाई ठप पड़ी है। अगर किसान डीजल इंजन चलाकर ही सिंचाई करने के लिए मजबूर होगा तो वह बिजली के भुगतान क्यों करेगा। उन्होंने बताया कि इलाके के कुछ किसान अपनी जमीन से मिट़्टी बेच रहे हैं, जो बिजली के खंभों के गिरने कारण बन रहे है। इस बारे में मिट्टी की खुदाई करने वाले ठेकेदार से बात की जाती है तो उसका कहना है कि उसने मिट्टी की खुदाई करने की विभाग से अनुमति ली है। अगर इस तरह की अनुमति से बिजली ढांचे को नुकसान हो रहा है। तो संबंधित विभाग की ही जिम्मेदारी है कि वह इसकी मरम्मत करे।
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किसानों ने कहा कि एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुना करने की बात करती है। वहीं इलाके में बिजली न मिलने से किसान परेशान हैं। जिले में सबसे ज्यादा धान का उत्पादन करने वाले क्षेत्र में अगर किसानों को सिंचाई की सुविधा नहीं मिलेगी तो वह अपनी आय को कैसे बढ़ा सकते हैं।
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किसान कुलदीप कुमार ने रोष जताते हुए कहा कि इलाके में एक दर्जन के करीब बिजली के खंबे जमीन पर गिरे हुए हैं। इनकी सुध विभाग खुद लेता नही है और अगर कोई किसान फोन से इसकी शिकायत करता है तो विभाग के कर्मचारी उसका फोन भी नही उठाते हैं। उन्होंने बताया कि इलाके में गिरे बिजली के खंभों को ठीक करने के लिए वह खुद विभाग के जेई से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान करने के बजाय किसानों पर ही बिजली के बिल का भुगतान न करने का आरोप लगा दिया जाता है।
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वहीं दर्शन सिंह ने कहा कि इस समय धान की पनीरी लगाने का वक्त है लेकिन पिछले पंद्रह दिनों से इलाके में बिजली की सप्लाई ठप पड़ी है। अगर किसान डीजल इंजन चलाकर ही सिंचाई करने के लिए मजबूर होगा तो वह बिजली के भुगतान क्यों करेगा। उन्होंने बताया कि इलाके के कुछ किसान अपनी जमीन से मिट़्टी बेच रहे हैं, जो बिजली के खंभों के गिरने कारण बन रहे है। इस बारे में मिट्टी की खुदाई करने वाले ठेकेदार से बात की जाती है तो उसका कहना है कि उसने मिट्टी की खुदाई करने की विभाग से अनुमति ली है। अगर इस तरह की अनुमति से बिजली ढांचे को नुकसान हो रहा है। तो संबंधित विभाग की ही जिम्मेदारी है कि वह इसकी मरम्मत करे।
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किसानों ने कहा कि एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुना करने की बात करती है। वहीं इलाके में बिजली न मिलने से किसान परेशान हैं। जिले में सबसे ज्यादा धान का उत्पादन करने वाले क्षेत्र में अगर किसानों को सिंचाई की सुविधा नहीं मिलेगी तो वह अपनी आय को कैसे बढ़ा सकते हैं।