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भागवत कथा सुनने से मिलता है परमधाम : गंगाधर शास्त्री
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कठुआ। पहलगाम आतंकी घटना में मारे गए पर्यटकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना के साथ पिछले 7 दिनों से जारी भगवान श्री परशुराम जन्मोत्सव कार्यक्रम का सोमवार को समापन हो गया। मंगलवार को कार्यक्रम के समापन पर कथा व्यास श्री गंगाधर शास्त्री जी महाराज के साथ वहां मौजूद सैकड़ों भक्तों ने मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर संवेदना व्यक्त की।
कार्यक्रम के तहत ब्राह्मण सभा कठुआ सभागार में सुबह हवन यज्ञ के साथ पुर्णाहूति हुई। उसके बाद स्थापित कलशों का विसर्जन किया गया। वहीं, कथा के अंतिम सत्र में कथावाचक गंगाधर शास्त्री जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत कथा का महात्म बताते हुए कहा कि यह ऐसी कथा है, जो सुनने वाले और बोलने वाले दोनों के लिए परम सुखकारी है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपील की की भागवत कथा का श्रवण अवश्य करें। क्योंकि भगवान की इस कथा का श्रवण करने से वह परमधाम के अधिकारी बन सकते हैं।
कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित डीसी डॉ. राकेश मिन्हास और तहसीलदार डॉ. विक्रम कुमार ने कहा कि एक सप्ताह के भीतर भगवान श्री परशुराम जी चौक को उसका स्वरूप देने के लिए भूमि पूजन किया जाएगा। इसमें चौक पर प्रतीक चिन्ह के रूप में भगवान परशुराम के शस्त्र को स्थापित किया जाएगा।
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इस मौके पर ब्राह्मण सभा के पदाधिकारी ने डीसी और तहसीलदार को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। वह अंत में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम के संबंध में ब्राह्मण सभा कठुआ के प्रधान डॉ. दुष्यंत उब्बट ने कहा कि हर साल ब्राह्मण सभा कठुआ द्वारा भगवान परशुराम का जन्मोत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस बार भी इसकी पूरी तैयारी की गई थी। लेकिन पहलगाम में हुई घटना के बाद इसे सीमित कर दिया गया है। इसमें शोभायात्रा को भी स्थगित कर दिया गया है।
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कार्यक्रम के तहत ब्राह्मण सभा कठुआ सभागार में सुबह हवन यज्ञ के साथ पुर्णाहूति हुई। उसके बाद स्थापित कलशों का विसर्जन किया गया। वहीं, कथा के अंतिम सत्र में कथावाचक गंगाधर शास्त्री जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत कथा का महात्म बताते हुए कहा कि यह ऐसी कथा है, जो सुनने वाले और बोलने वाले दोनों के लिए परम सुखकारी है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपील की की भागवत कथा का श्रवण अवश्य करें। क्योंकि भगवान की इस कथा का श्रवण करने से वह परमधाम के अधिकारी बन सकते हैं।
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कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित डीसी डॉ. राकेश मिन्हास और तहसीलदार डॉ. विक्रम कुमार ने कहा कि एक सप्ताह के भीतर भगवान श्री परशुराम जी चौक को उसका स्वरूप देने के लिए भूमि पूजन किया जाएगा। इसमें चौक पर प्रतीक चिन्ह के रूप में भगवान परशुराम के शस्त्र को स्थापित किया जाएगा।
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इस मौके पर ब्राह्मण सभा के पदाधिकारी ने डीसी और तहसीलदार को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। वह अंत में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम के संबंध में ब्राह्मण सभा कठुआ के प्रधान डॉ. दुष्यंत उब्बट ने कहा कि हर साल ब्राह्मण सभा कठुआ द्वारा भगवान परशुराम का जन्मोत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस बार भी इसकी पूरी तैयारी की गई थी। लेकिन पहलगाम में हुई घटना के बाद इसे सीमित कर दिया गया है। इसमें शोभायात्रा को भी स्थगित कर दिया गया है।