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झील की गहराई बन रही तलाशी अभियान में रोड़ा
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रंजीत सागर झील में क्रैश हुए हेलीकॉप्टर के तलाशी अभियान में इस्तेमाल की गई क्रेन, संवाद।
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। रंजीत सागर झील में क्रैश के बाद समाए हेलीकॉप्टर के एक हिस्से की तलाश छठे दिन भी किसी निष्कर्ष तक पहुंचती नजर नहीं आई। झील के जिस इलाके में हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ था, उसको चिन्हित कर स्पेशल फोर्सेज की टीमें लगातार तलाशी अभियान जारी रखे हुए हैं।
रंजीत सागर बांध प्रबंधन की ओर से फोर्सेज को दो बेड़े भी उपलब्ध कराए गए हैं। सोनार की मदद भी ली जा रही है, लेकिन झील की अधिक गहराई और विशेष उपकरणों की कमी अभियान में देरी की बड़ी वजह बने हुए हैं। बरसात में रंजीत सागर झील का जलस्तर लगातार बढ़ता रहता है। वर्तमान में भी झील का जलस्तर 520 मीटर से अधिक है।
तीन दशक पहले तैैयार हुई इस कृत्रिम झील में जो इलाका समाया है, वहां पहले पहाड़नुमा इलाके और आबादी वाला क्षेत्र होता था। झील कहीं भी समतल नहीं है, और इसमें पेड़ों से लेकर छोटी पहाड़ियां हैं, जो जलस्तर कम होने पर टापू की तरह बाहर आती हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार हेलीकॉप्टर जिस इलाके में क्रैश हुआ है, वहां की गहराई काफी अधिक है। गोताखोर विशेष उपकरणों की मदद के बिना इतनी गहराई में उतर नहीं पा रहे हैं। लेकिन, जहां तक संभव हो पा रहा है, उपलब्ध उपकरणों की मदद से गोता लगाकर लगातार तलाश जारी रखे हुए हैं।
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सूत्रों के अनुसार हेलीकॉप्टर का जो हिस्सा झील में समाया है, और जिसकी लगातार तलाश जारी है, उसी में पायलट और को पायलट के फंसे होने की आशंका है। अभियान में लगातार बढ़ता समय दोनों के बचने की उम्मीद को भी धूमिल करता जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि सोमवार को विशाखापटनम से विशेष टीम के पहुंचने की उम्मीद है। साथ ही कुछ और उपकरण भी मंगाए जा रहे हैं।
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रंजीत सागर बांध प्रबंधन की ओर से फोर्सेज को दो बेड़े भी उपलब्ध कराए गए हैं। सोनार की मदद भी ली जा रही है, लेकिन झील की अधिक गहराई और विशेष उपकरणों की कमी अभियान में देरी की बड़ी वजह बने हुए हैं। बरसात में रंजीत सागर झील का जलस्तर लगातार बढ़ता रहता है। वर्तमान में भी झील का जलस्तर 520 मीटर से अधिक है।
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तीन दशक पहले तैैयार हुई इस कृत्रिम झील में जो इलाका समाया है, वहां पहले पहाड़नुमा इलाके और आबादी वाला क्षेत्र होता था। झील कहीं भी समतल नहीं है, और इसमें पेड़ों से लेकर छोटी पहाड़ियां हैं, जो जलस्तर कम होने पर टापू की तरह बाहर आती हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार हेलीकॉप्टर जिस इलाके में क्रैश हुआ है, वहां की गहराई काफी अधिक है। गोताखोर विशेष उपकरणों की मदद के बिना इतनी गहराई में उतर नहीं पा रहे हैं। लेकिन, जहां तक संभव हो पा रहा है, उपलब्ध उपकरणों की मदद से गोता लगाकर लगातार तलाश जारी रखे हुए हैं।
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सूत्रों के अनुसार हेलीकॉप्टर का जो हिस्सा झील में समाया है, और जिसकी लगातार तलाश जारी है, उसी में पायलट और को पायलट के फंसे होने की आशंका है। अभियान में लगातार बढ़ता समय दोनों के बचने की उम्मीद को भी धूमिल करता जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि सोमवार को विशाखापटनम से विशेष टीम के पहुंचने की उम्मीद है। साथ ही कुछ और उपकरण भी मंगाए जा रहे हैं।