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Kathua News: जीएमसी कठुआ में खुलेगा हीमोफीलिया सेंटर, मरीजों को मिलेगी राहत
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-जीएमसी प्रबंधन ने मेडिकल सप्लाई एसोसिएशन को फैक्टर आठ और नौ उपलब्ध करवाने के लिए लिखा
-जिले में 45 लोग इस बीमारी से पीड़ित, इलाज के लिए जाना पड़ता है जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में जल्द हीमोफीलिया का इलाज और इससे जूझ रहे मरीजों की देखभाल संभव हो जाएगी। जीएमसी कठुआ में हीमोफीलिया सेंटर विकसित करने को लेकर कवायद शुरू कर दी गई है।
जीएमसी प्रबंधन ने जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई एसोसिएशन को इस बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए इलाज के लिए फैक्टर आठ और नौ उपलब्ध करवाने के लिए लिखा गया है। उपलब्ध होने के साथ ही जिले के हीमोफीलिया से जूझ रहे ऐसे मरीजों को उपचार के लिए जम्मू के चक्कर नहीं काटने होंगे। बीमारी के बारे में जागरूकता से सही समय पर अन्य लोगों को भी उपचार यहीं जीएमसी कठुआ में मिल सकेगा।
दरअसल, हीमफिलिया अनुवांशिक बीमारी है। जो आंतरिक व बाहरी रक्त स्राव के कारण होती है। खून में प्रोटीन के 13 फैक्टर होते हैं। फैक्टर आठ व फैक्टर नौ की कमी से खून जम नहीं पाता। आंतरिक या बाहरी रक्त स्राव होने से शरीर के किसी हिस्से में ट्यूमर जैसा बन जाता है। इसका स्थायी इलाज नहीं है। इसे जीवन रक्षक इंजेक्शन एएचएफ (एंटी हीमोफीलिया) से नियंत्रित रखा जाता है। इसका निजी स्तर पर इलाज महंगा होता है।
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कोट
जीएमसी कठुआ में मरीजों के उपचार के लिए हीमोफीलिया सेंटर खोलने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिले में लगभग 45 लोगों की पहचान हुई है जो इस बीमारी से ग्रस्त हैं। उपकरण उपलब्ध होने के साथ ही इसका वार्ड सक्रिय कर दिया जाएगा। इन मरीजों को बाकायदा डे केयर भी दी जाएगी।
-डॉ. सुरेंद्र कुमार अत्री, प्रधानाचार्य, जीएमसी कठुआ
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-जिले में 45 लोग इस बीमारी से पीड़ित, इलाज के लिए जाना पड़ता है जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में जल्द हीमोफीलिया का इलाज और इससे जूझ रहे मरीजों की देखभाल संभव हो जाएगी। जीएमसी कठुआ में हीमोफीलिया सेंटर विकसित करने को लेकर कवायद शुरू कर दी गई है।
जीएमसी प्रबंधन ने जम्मू-कश्मीर मेडिकल सप्लाई एसोसिएशन को इस बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए इलाज के लिए फैक्टर आठ और नौ उपलब्ध करवाने के लिए लिखा गया है। उपलब्ध होने के साथ ही जिले के हीमोफीलिया से जूझ रहे ऐसे मरीजों को उपचार के लिए जम्मू के चक्कर नहीं काटने होंगे। बीमारी के बारे में जागरूकता से सही समय पर अन्य लोगों को भी उपचार यहीं जीएमसी कठुआ में मिल सकेगा।
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दरअसल, हीमफिलिया अनुवांशिक बीमारी है। जो आंतरिक व बाहरी रक्त स्राव के कारण होती है। खून में प्रोटीन के 13 फैक्टर होते हैं। फैक्टर आठ व फैक्टर नौ की कमी से खून जम नहीं पाता। आंतरिक या बाहरी रक्त स्राव होने से शरीर के किसी हिस्से में ट्यूमर जैसा बन जाता है। इसका स्थायी इलाज नहीं है। इसे जीवन रक्षक इंजेक्शन एएचएफ (एंटी हीमोफीलिया) से नियंत्रित रखा जाता है। इसका निजी स्तर पर इलाज महंगा होता है।
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जीएमसी कठुआ में मरीजों के उपचार के लिए हीमोफीलिया सेंटर खोलने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिले में लगभग 45 लोगों की पहचान हुई है जो इस बीमारी से ग्रस्त हैं। उपकरण उपलब्ध होने के साथ ही इसका वार्ड सक्रिय कर दिया जाएगा। इन मरीजों को बाकायदा डे केयर भी दी जाएगी।
-डॉ. सुरेंद्र कुमार अत्री, प्रधानाचार्य, जीएमसी कठुआ