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Kathua News: ओलावृष्टि ने मचाई तबाही, रबी और बागवानी की फसलें बर्बाद
Mon, 21 Apr 2025 01:28 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Mon, 21 Apr 2025 01:28 AM IST
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बनी में ओलावृष्टि से टूटकर गिरे आड़ू के फल। संवाद
- फोटो : kathua
बनी क्षेत्र के कई हिस्सों में अचानक हुई ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, लहसुन को सबसे ज्यादा नुकसान
5 से 10 मिनट तक हुई ओलावृष्टि के दौरान गिरे 20 से 30 ग्राम तक के ओले
बनी। क्षेत्र के कई हिस्सों में अचानक हुई तेज ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। करीब 5 से 10 मिनट तक चली ओलावृष्टि के दौरान 20 से 30 ग्राम तक के ओले गिरने ने खेतों में खड़ी रबी की फसलों और बागवानी को भारी नुकसान पहुंचाया है।
ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर बनी के ऊपरी इलाकों में देखने को मिला, जिनमें कोटी, चांदल, कंथाल, ढग्गर और मच्छावा जैसे इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में रबी और खरीफ दोनों ही फसलों को गंभीर क्षति पहुंची है। संवाद
उनकी पूरी फसल और नर्सरी इस ओलावृष्टि में बर्बाद हो गई। खेत में कुछ भी नहीं बचा है, सिर्फ टूटे हुए पौधे और बर्फ की सफेदी नजर आ रही है। इतनी तेज ओलावृष्टि पहले कभी नहीं देखी।
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- तिलक राज, स्थानीय किसान
अपनी जमीन में करीब 100 पेड़ लगाए थे, जिनमें सेब के साथ-साथ कुछ पलम और खुमानी के पेड़ भी शामिल थे। ओलावृष्टि ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। छोटे-छोटे फल जमीन पर गिरकर नष्ट हो गए और पेड़ों की टहनियां भी टूट गईं। इससे भारी नुकसान हुआ है।
मदन लाल, किसान
कोट
लहसुन की फसल का काफी नुकसान हुआ है। वहीं प्याज को भी काफी नुकसान पहुंचा है। किसानों से बातचीत कर नुकसान का आकलन किया जा रहा है। नुकसान का सटीक अनुमान देना संभव नहीं है। इसके अलावा खरीफ की फसलों में मिर्च, बैंगन और टमाटर की नर्सरी को भी ओलावृष्टि ने प्रभावित किया है।
संजय कुमार, अधिकारी कृषि विभाग
इलाके में सेब, पलम और खुमानी जैसी फलदार फसलें ओलावृष्टि से सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं। क्योंकि इस मौसम में इनमें फूल लग रहे थे। इस साल बंपर पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन ओलावृष्टि के चलते फल और फूल झड़ गए हैं और कई पौधों को नुकसान पहुंचा है। पलम और खुमानी फलों पर चोट लगने से फंगल संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। तापमान में गिरावट से फ्लावरिंग प्रक्रिया पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।
शकील अहमद, अधिकारी बागवानी विभाग
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5 से 10 मिनट तक हुई ओलावृष्टि के दौरान गिरे 20 से 30 ग्राम तक के ओले
बनी। क्षेत्र के कई हिस्सों में अचानक हुई तेज ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। करीब 5 से 10 मिनट तक चली ओलावृष्टि के दौरान 20 से 30 ग्राम तक के ओले गिरने ने खेतों में खड़ी रबी की फसलों और बागवानी को भारी नुकसान पहुंचाया है।
ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर बनी के ऊपरी इलाकों में देखने को मिला, जिनमें कोटी, चांदल, कंथाल, ढग्गर और मच्छावा जैसे इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में रबी और खरीफ दोनों ही फसलों को गंभीर क्षति पहुंची है। संवाद
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उनकी पूरी फसल और नर्सरी इस ओलावृष्टि में बर्बाद हो गई। खेत में कुछ भी नहीं बचा है, सिर्फ टूटे हुए पौधे और बर्फ की सफेदी नजर आ रही है। इतनी तेज ओलावृष्टि पहले कभी नहीं देखी।
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- तिलक राज, स्थानीय किसान
अपनी जमीन में करीब 100 पेड़ लगाए थे, जिनमें सेब के साथ-साथ कुछ पलम और खुमानी के पेड़ भी शामिल थे। ओलावृष्टि ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। छोटे-छोटे फल जमीन पर गिरकर नष्ट हो गए और पेड़ों की टहनियां भी टूट गईं। इससे भारी नुकसान हुआ है।
मदन लाल, किसान
कोट
लहसुन की फसल का काफी नुकसान हुआ है। वहीं प्याज को भी काफी नुकसान पहुंचा है। किसानों से बातचीत कर नुकसान का आकलन किया जा रहा है। नुकसान का सटीक अनुमान देना संभव नहीं है। इसके अलावा खरीफ की फसलों में मिर्च, बैंगन और टमाटर की नर्सरी को भी ओलावृष्टि ने प्रभावित किया है।
संजय कुमार, अधिकारी कृषि विभाग
इलाके में सेब, पलम और खुमानी जैसी फलदार फसलें ओलावृष्टि से सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं। क्योंकि इस मौसम में इनमें फूल लग रहे थे। इस साल बंपर पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन ओलावृष्टि के चलते फल और फूल झड़ गए हैं और कई पौधों को नुकसान पहुंचा है। पलम और खुमानी फलों पर चोट लगने से फंगल संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। तापमान में गिरावट से फ्लावरिंग प्रक्रिया पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।
शकील अहमद, अधिकारी बागवानी विभाग