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Kathua News: डॉक्टरों की कमी, मरीजों को असुविधा
Tue, 11 Jul 2023 01:26 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Tue, 11 Jul 2023 01:26 AM IST
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-मेडिसिन, एनेस्थीसिया, बाल रोग विशेषज्ञों की खास कमी, 43 फीसदी स्टाफ से चलाया जा रहा काम
-दुर्घटना चिकित्सा अधिकारी के 12 में से 8 पद खाली, 4 से चलाया जा रहा काम
कठुआ। कठुआ का गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी चल रही है। इसका असर मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों के साथ-साथ अस्पताल में सेहत सुविधाओं पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। हालात यह हैं कि जीएमसी में सेंक्शन पदों के मुकाबले 43 फीसदी स्टाफ से काम चलाया जा रहा है।
जीएमसी कठुआ से मिली जानकारी के मुताबिक इमरजेंसी की हालत में सबसे अधिक जरूरत वाले सीएमओ (दुर्घटना चिकित्सा अधिकारी) के 12 में से 8 पद रिक्त हैं। इसका सीधा असर इमरजेंसी में इलाज करवाने आ रहे मरीजों पर पड़ रहा है। इसके अलावा, एनेस्थीसिया, बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जरी, गायनी में डॉक्टरों की कमी है। बता दें, जीएमसी में डॉक्टरों के अलावा पेरामेडिकल स्टाफ की भी भारी कमी है। इसके अलावा लैब टेक्नीशियन, एनेस्थीसिया टेक्नीशियन, डायलिसिस टेक्नीशियन, सर्जरी टेक्नीशियन की भी कमी जीएमसी को खल रही है। अधिकारियों का कहना है कि डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है। जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
दुर्घटना चिकित्सा अधिकारी और सीनियर रेजीडेंट की भारी कमी
जीएमसी से जुटाई जानकारी के मुताबिक महिला रोग, बाल रोग, एनेस्थीसिया, सर्जरी जैसे अहम विभागों में स्वीकृत प्रोफेसर के पदों 23 में से 11 खाली हैं। इसके अलावा एसोसिएट प्रोफेसर के 32 में से 11 पद रिक्त हैं। वहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर के 48 में से 18, सीनियर रेजीडेंट के 51 में से 18 और दुर्घटना चिकित्सा अधिकारी के 12 में से 8 पद रिक्त हैं। कहा जाता है कि सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर सेहत विभाग की रीड़ होते हैं। लेकिन, जीएमसी में मेडिसन, एनेस्थीसिया, सर्जरी, बाल रोग विभाग में सीनियर रेजीडेंट की भारी कमी है।
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6 सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की रिक्वायरमेंट भेजी
स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहे जीएमसी के अधिकारियों ने अब सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की रिक्वायरमेंट विभाग को भेजी है। जीएमसी की ओर से नेफ्रालॉजिस्ट, कॉर्डियोलॉजिस्ट, ग्रेस्ट्रोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन और पीडियाट्रिक विभाग के सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की डिमांड भेजी गई है। बताया जा रहा है कि एक साल के भीतर पूरी प्रक्रिया मुकम्मल होने के बाद कठुआ व आसपास के लोगों को सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से इलाज करवाने के लिए निजी अस्पतालों में जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी।
-जिन विभागों में डॉक्टरों या स्टाफ की कमी है, उसके लिए उच्चाधिकारियों को लिखित में जानकारी दी गई है। दुर्घटना चिकित्सा अधिकारी की भर्ती प्रक्रिया जारी है। अन्य विभागों में डॉक्टरों व स्टाफ की कमी जल्द दूर की जाएगी।
डाॅ. सुरिंदर अत्री, प्रधानाचार्य, जीएमसी कठुआ।
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-दुर्घटना चिकित्सा अधिकारी के 12 में से 8 पद खाली, 4 से चलाया जा रहा काम
कठुआ। कठुआ का गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी चल रही है। इसका असर मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों के साथ-साथ अस्पताल में सेहत सुविधाओं पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। हालात यह हैं कि जीएमसी में सेंक्शन पदों के मुकाबले 43 फीसदी स्टाफ से काम चलाया जा रहा है।
जीएमसी कठुआ से मिली जानकारी के मुताबिक इमरजेंसी की हालत में सबसे अधिक जरूरत वाले सीएमओ (दुर्घटना चिकित्सा अधिकारी) के 12 में से 8 पद रिक्त हैं। इसका सीधा असर इमरजेंसी में इलाज करवाने आ रहे मरीजों पर पड़ रहा है। इसके अलावा, एनेस्थीसिया, बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जरी, गायनी में डॉक्टरों की कमी है। बता दें, जीएमसी में डॉक्टरों के अलावा पेरामेडिकल स्टाफ की भी भारी कमी है। इसके अलावा लैब टेक्नीशियन, एनेस्थीसिया टेक्नीशियन, डायलिसिस टेक्नीशियन, सर्जरी टेक्नीशियन की भी कमी जीएमसी को खल रही है। अधिकारियों का कहना है कि डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है। जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
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दुर्घटना चिकित्सा अधिकारी और सीनियर रेजीडेंट की भारी कमी
जीएमसी से जुटाई जानकारी के मुताबिक महिला रोग, बाल रोग, एनेस्थीसिया, सर्जरी जैसे अहम विभागों में स्वीकृत प्रोफेसर के पदों 23 में से 11 खाली हैं। इसके अलावा एसोसिएट प्रोफेसर के 32 में से 11 पद रिक्त हैं। वहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर के 48 में से 18, सीनियर रेजीडेंट के 51 में से 18 और दुर्घटना चिकित्सा अधिकारी के 12 में से 8 पद रिक्त हैं। कहा जाता है कि सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर सेहत विभाग की रीड़ होते हैं। लेकिन, जीएमसी में मेडिसन, एनेस्थीसिया, सर्जरी, बाल रोग विभाग में सीनियर रेजीडेंट की भारी कमी है।
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6 सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की रिक्वायरमेंट भेजी
स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहे जीएमसी के अधिकारियों ने अब सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की रिक्वायरमेंट विभाग को भेजी है। जीएमसी की ओर से नेफ्रालॉजिस्ट, कॉर्डियोलॉजिस्ट, ग्रेस्ट्रोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन और पीडियाट्रिक विभाग के सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की डिमांड भेजी गई है। बताया जा रहा है कि एक साल के भीतर पूरी प्रक्रिया मुकम्मल होने के बाद कठुआ व आसपास के लोगों को सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से इलाज करवाने के लिए निजी अस्पतालों में जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी।
-जिन विभागों में डॉक्टरों या स्टाफ की कमी है, उसके लिए उच्चाधिकारियों को लिखित में जानकारी दी गई है। दुर्घटना चिकित्सा अधिकारी की भर्ती प्रक्रिया जारी है। अन्य विभागों में डॉक्टरों व स्टाफ की कमी जल्द दूर की जाएगी।
डाॅ. सुरिंदर अत्री, प्रधानाचार्य, जीएमसी कठुआ।