{"_id":"f04fabf62b0569733c97925e9fd9fe4a","slug":"getting-50-per-cent-quota-ration-supplies-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"50 फीसदी कोटे से हो रही राशन आपूर्ति ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
50 फीसदी कोटे से हो रही राशन आपूर्ति
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
Updated Wed, 29 Oct 2014 02:06 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक तरफ जिले के पहाड़ी इलाकों के साथ मैदानी इलाकों में भी सर्दी की दस्तक हो चुकी है लेकिन राशन भंडारण की समस्या से निपटने के लिए विभाग के पास वर्तमान में कोई योजना नहीं है।
विज्ञापन
दिसंबर की शुरूआत में पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी भी शुरू हो जाने का अनुमान है और पहाड़ी बाशिंदों के जीवन की एक और अगिभन परीक्षा शुरू हो चुकी है।
बर्फबारी के चलते तीन से चार महीनों तक देश और दुनिया से कटने वाला जीवन से निपटने के लिए इन दिनों लोग व्यस्त हैं।
भंडार के सरपंच मनसा राम, रोलका सरपंच बिशंबर दास, कोटी चंडियार के सरपंच अमर सिंह और डुग्गन के सरपंच देसराज ने बताया कि सर्दियों का सीजन पहाड़ी इलाकों के जीवन को थमा सा देता है।
विज्ञापन
बुनियादी सुविधाएं मयस्सर नहीं होतीं और लोग महीनों लगातार घरों में कैद हो जाते हैं। ऐसे में लोगों को सारा सामान समय से पूर्व जमा करना पड़ता है जिनमें ईंधन के लिए लकड़ी, केरोसीन व खाने पीने की सामग्री शामिल हैं। माल मवेशियों के लिए चारा इकट्ठा करना भी चुनौती से कम नहीं होता।
विज्ञापन
हर वर्ष औसतन चार महीने तक लोगों को घरों में कैद होकर रहना पड़ता है। इस दौरान कभी कभी तो बिजली, पानी, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं से भी महरूम होना पड़ता है।
लोगाें को अपने स्तर पर ही कोई व्यवस्था कर काम चलाना पड़ता है। हर साल समय पर राशन कोटा नहीं मिलता है, और लोगों को मक्की पर ही तीन से चार महीने गुजारने पड़ते हैं।