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बारिश के भरोसे चार लाख कनाल भूमि में खेती

Tue, 19 Jan 2016 01:37 AM IST
कठुआ, महानपुर /अमर उजाला ब्यूरो
कठुआ, महानपुर /अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 19 Jan 2016 01:37 AM IST
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four lac canal agriculture land depends on rain
जिला के एक लाख के अधिक किसानों को पानी की कमी के चलते हर साल करीब 51 प्रतिशत फसल का नुकसान झेलना पड़ता है। करीब चार लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती के लिए किसानों को खु़दा की रहमत पर निर्भर रहना पड़ता है। यानी यदि किसी सीजन में बारिश कम हुई या नहीं हुई तो फसल बर्बाद होना निश्चित है।
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राजस्व विभाग से प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि हर वर्ष 50 प्रतिशत से अधिक बारिश कम होेने के चलते बर्बाद हो जाती है। कठुआ में 78 हजार कनाल से अधिक भूमि पर सींचाई के बिना किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है।
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बिलावर में 57 हजार कनाल से अधिक भूमि पर सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं डिंगा अंब तहसील में 13 हजार कनाल से अधिक भूमि पर सिंचाई नहीं हो पाती है। ऐसे ही पूरे जिला कठुआ की कुल 11 तहसीलों में 3,94,330 कनाल और 10 मरला भूमि पर सिंचाई के लिए कोई व्यवस्था न होने के कारण किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है।
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किसानों की मुसीबत यहीं नहीं थमती है। किसान बमुश्किल छह से सात महीने ही अपने मोटर पंपसेट का इस्तेमाल सिंचाई के लिए कर पाते हैं। इन मोटर पंपों का बिल उन्हें पूरे साल के लिए भरना पड़ता है। ऐसे में उनके लिए यह सबसे महंगा बिल बनता है, जो इस्तेमाल के बिना भी बिल देने के लिए किसानों को मजबूर करता है।

किसान देवराज ने कहा कि किसान धान की फसल की रोपाई और उसके सीजन में मोटर पंप सेट का इस्तेमाल करता है। बारिश और कभी-कभार ही मोटर पंप सेट का इस्तेमाल होता है, लेकिन बिल पूरे साल का देना पड़ता है। सरकार से पंजाब की तर्ज पर डीजल सेट लगाने के लिए कहा गया था, लेकिन अभी तक उस मांग पर गौर नहीं किया गया है।

महानपुर में पिछले एक महीने से बारिश न होने के कारण महानपुर के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें आ गई हैं। किसान सुरजीत सिंह, बाबूराम, रंजीत सिंह, देसराज आदि का कहना है कि बिना बारिश फसल सूखने की कगार पर है।

यदि बारिश नहीं हुई तो किसानों को भारी नुकसान होगा। किसानों ने बताया कि तहसील में 27 हजार कनाल से अधिक भूमि पर फसल बोई गई है, लेकिन बिना बारिश के फसल के बबांद होने का खतरा बना हुआ है।


उन्होंने कहा कि तहसील में केवल 1248 कनाल पर ही सिंचाई हो पाती है, शेष 25 हजार कनाल से अधिक भूमि पर सिंचाई नहीं हो पाती है।

इसके कारण कुदरत की रहमत ही उनके लिए आसरा है। लेकिन अब तक कुदरत ने भी किसी प्रकार से कोई रहमत नहीं बरसाई है। यदि  अगले एक सप्ताह के बीच बारिश नहीं हुई तो फसल के नुकसान के कारण किसानों को कर्ज तले डूबना पड़ सकता है।
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