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फ्लोर टेस्ट के लिए बागी पार्षद ले आए हाई कोर्ट का आदेश
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कठुआ नगर परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को हाईकोर्ट के आदेश की प्रति देते पार्षद, संवाद।
- फोटो : KATHUA
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कठुआ। नगर परिषद में एक महीने से जारी सियासी घमासान फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। 12 जुलाई को 12 पार्षदों की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में त्रुटियों के चलते ट्रिब्यूनल में गए नगर परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को फिर बड़ा झटका लगा है।
शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले 12 पार्षदों का दल नगर परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्यालय में पहुंचा। उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश की प्रति मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप अबरोल को सौंपी। साथ ही मांग रखी है कि जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट कराया जाए, क्योंकि अब मामले में कोई भी कानूनी पेंच नहीं है। उधर, दिलीप अबरोल ने आदेश की प्रति स्वीकार करते हुए कहा कि फिलहाल उन्हें आदेश के संबंध में कानूनी अधिकारी से राय लेनी है। इसके बाद म्यूनिसिपल एक्ट के तहत अगली कार्रवाई की जाएगी।
माननीय उच्च न्यायालय की ओर से ताजा आदेश की प्रति लिए नगर परिषद कार्यालय पहुंचे 12 पार्षदों ने साफ किया है कि उनकी ओर से 12 जुलाई को लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को पहले ही वापस ले लिया गया था। ऐसे में माननीय उच्च न्यायालय ने भी माना है कि प्रस्ताव वापस लिए जाने के बाद याचिका निष्फल हो गई है। पार्षदों ने साफ किया है कि त्रुटियों में सुधार करते हुए उनकी ओर से 29 जुलाई को नया अविश्वास प्रस्ताव नगर परिषद में दाखिल कर दिया गया था। ऐसे में इसपर अब कोई रोक नहीं है।
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हाई कोर्ट के आदेश की प्रति मुख्य कार्यकारी को सौंपने पहुंचे पार्षद रवींद्र पठानिया ने बताया कि 12 जुलाई को 12 पार्षदों की ओर से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। फ्लोर टेस्ट की तारीख तय हुई। लेकिन, जब यह होना था, तब ट्रिब्यूनल कोर्ट के आदेेश के तहत यथास्थित बनाए रखने की रोक लगा दी गई। इसमें लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में त्रुटियों का हवाला दिया गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें यह ट्रिब्यूनल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र नहीं लग रहा था। ऐसे में उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। ट्रिब्यूनल की ओर से 18 अगस्त को अगली तारीख तय कर गई थी।
उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट ने साफ किया है कि 12 जुलाई के अविश्वास प्रस्ताव को लाए जाने पर आपत्ति थी, जिसे 28 जुलाई को प्रस्ताव पारित कर वापस ले लिया गया था। अब नए प्रस्ताव के अनुसार फ्लोर टेस्ट जल्द कराए जाने की मांग रखी गई है, ताकि जल्द से जल्द फैसला हो सके। पार्षदों पर इस अवधि में बहुत से आरोप लगाए गए हैं। विकास और विस्तार को रोकने के आरोप लगे हैं, जिसकी उनमें से किसी की भी मंशा नहीं है। ऐसे में फौरी तौर पर फैसला होने से मामले का निपटारा होगा। लोगों को भी ऐसा नहीं लगना चाहिए कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। यदि अब भी मामले को लटकाया गया तो वह इसमें हाई कोर्ट के आदेश की अवमानना की याचिका दायर करेंगे।
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ये पार्षद लाए हैं अविश्वास प्रस्ताव
अविश्वास प्रस्ताव लाने वालों में वार्ड सात के पार्षद अनिरुद्ध शर्मा, वार्ड 14 के पार्षद भोपिंदर राज, वार्ड 17 के पार्षद जोगिंदर पाल, वार्ड 20 के पार्षद रवींद्र पठानिया, वार्ड 11 के पार्षद करण सिंह, वार्ड 12 की पार्षद रेणु बाला, वार्ड 10 के पार्षद अजय कुमार, वार्ड 1 की पार्षद मीरा कुमारी, वार्ड 16 की पार्षद पुष्पा देवी, वार्ड 21 के पार्षद बलजीत सिंह, वार्ड 2 के पार्षद चौधरी राजिंद्र सिंह बब्बी, वार्ड 18 की पार्षद वंदना अंडोत्रा शामिल हैं।
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ट्रिब्यूनल कोर्ट में याचिका हमारी ओर से दायर की गई थी, और हाई कोर्ट में अविश्वास लाने वाले 12 पार्षद गए थे। ये पार्षद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनने के लिए उतावले हैं। लेकिन, कोर्ट जो फैसला देगा, हमें वह मंजूर होगा।
- नरेश शर्मा , अध्यक्ष, नगर परिषद कठुआ
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शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले 12 पार्षदों का दल नगर परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्यालय में पहुंचा। उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश की प्रति मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप अबरोल को सौंपी। साथ ही मांग रखी है कि जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट कराया जाए, क्योंकि अब मामले में कोई भी कानूनी पेंच नहीं है। उधर, दिलीप अबरोल ने आदेश की प्रति स्वीकार करते हुए कहा कि फिलहाल उन्हें आदेश के संबंध में कानूनी अधिकारी से राय लेनी है। इसके बाद म्यूनिसिपल एक्ट के तहत अगली कार्रवाई की जाएगी।
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माननीय उच्च न्यायालय की ओर से ताजा आदेश की प्रति लिए नगर परिषद कार्यालय पहुंचे 12 पार्षदों ने साफ किया है कि उनकी ओर से 12 जुलाई को लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को पहले ही वापस ले लिया गया था। ऐसे में माननीय उच्च न्यायालय ने भी माना है कि प्रस्ताव वापस लिए जाने के बाद याचिका निष्फल हो गई है। पार्षदों ने साफ किया है कि त्रुटियों में सुधार करते हुए उनकी ओर से 29 जुलाई को नया अविश्वास प्रस्ताव नगर परिषद में दाखिल कर दिया गया था। ऐसे में इसपर अब कोई रोक नहीं है।
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हाई कोर्ट के आदेश की प्रति मुख्य कार्यकारी को सौंपने पहुंचे पार्षद रवींद्र पठानिया ने बताया कि 12 जुलाई को 12 पार्षदों की ओर से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। फ्लोर टेस्ट की तारीख तय हुई। लेकिन, जब यह होना था, तब ट्रिब्यूनल कोर्ट के आदेेश के तहत यथास्थित बनाए रखने की रोक लगा दी गई। इसमें लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में त्रुटियों का हवाला दिया गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें यह ट्रिब्यूनल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र नहीं लग रहा था। ऐसे में उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। ट्रिब्यूनल की ओर से 18 अगस्त को अगली तारीख तय कर गई थी।
उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट ने साफ किया है कि 12 जुलाई के अविश्वास प्रस्ताव को लाए जाने पर आपत्ति थी, जिसे 28 जुलाई को प्रस्ताव पारित कर वापस ले लिया गया था। अब नए प्रस्ताव के अनुसार फ्लोर टेस्ट जल्द कराए जाने की मांग रखी गई है, ताकि जल्द से जल्द फैसला हो सके। पार्षदों पर इस अवधि में बहुत से आरोप लगाए गए हैं। विकास और विस्तार को रोकने के आरोप लगे हैं, जिसकी उनमें से किसी की भी मंशा नहीं है। ऐसे में फौरी तौर पर फैसला होने से मामले का निपटारा होगा। लोगों को भी ऐसा नहीं लगना चाहिए कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। यदि अब भी मामले को लटकाया गया तो वह इसमें हाई कोर्ट के आदेश की अवमानना की याचिका दायर करेंगे।
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ये पार्षद लाए हैं अविश्वास प्रस्ताव
अविश्वास प्रस्ताव लाने वालों में वार्ड सात के पार्षद अनिरुद्ध शर्मा, वार्ड 14 के पार्षद भोपिंदर राज, वार्ड 17 के पार्षद जोगिंदर पाल, वार्ड 20 के पार्षद रवींद्र पठानिया, वार्ड 11 के पार्षद करण सिंह, वार्ड 12 की पार्षद रेणु बाला, वार्ड 10 के पार्षद अजय कुमार, वार्ड 1 की पार्षद मीरा कुमारी, वार्ड 16 की पार्षद पुष्पा देवी, वार्ड 21 के पार्षद बलजीत सिंह, वार्ड 2 के पार्षद चौधरी राजिंद्र सिंह बब्बी, वार्ड 18 की पार्षद वंदना अंडोत्रा शामिल हैं।
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ट्रिब्यूनल कोर्ट में याचिका हमारी ओर से दायर की गई थी, और हाई कोर्ट में अविश्वास लाने वाले 12 पार्षद गए थे। ये पार्षद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनने के लिए उतावले हैं। लेकिन, कोर्ट जो फैसला देगा, हमें वह मंजूर होगा।
- नरेश शर्मा , अध्यक्ष, नगर परिषद कठुआ