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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त सुविधा न होने पर जताया रोष
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कठुआ। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोविंदसर कर्मचारियों की कमी के चलते स्थानीय लोगों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। रविवार को ग्रामीणों ने इसी समस्या के चलते स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए अपना रोष जताया। उन्होंने कहा कि गांव में स्वास्थ्य सुविधा देने के नाम पर प्राथमिक चिकित्सा केंद्र बनाया गया है तो वहां सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता शशि शर्मा ने कहा कि करीब 5 वर्ष पूर्व औद्योगिक क्षेत्र से सटे उनके गांव में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के नाम पर इस केंद्र की स्थापना की गई थी। जब से यहां पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बना है तब से डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हो पाई है। जिन पदों को भरा गया था उन कर्मचारियों को भी हटाया जा रहा है। हालत यह है कि अब कर्मचारियों की कमी के चलते यहां पर होने वाली कोरोना का टीकाकरण भी बंद हो गया है। मजबूरन लोगों को खरोट या कहीं अन्य जगह पर जाकर टीकाकरण करवाना पड़ रहा है। उनका कहना था एक तरफ सरकार लोगों को सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा से गोविंदसर गांव को वंचित किया जा रहा है। कोरोना इस महामारी के दौर में लोग संक्रमण के डर से अपनी छोटी मोटी बीमारियों के लिए जीएमसी कठुआ नहीं जाना चाहते हैं। स्थानीय केंद्र में सुविधा ना होने के कारण लोगों को मजबूरन निजी डॉक्टरों से अपना उपचार करवाना पड़ रहा है। शर्मा ने कहा कि अगर लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से इलाज की सुविधा नहीं मिलनी है तो फिर इसे बनाने का भी कोई औचित्य नहीं है। क्योंकि यहां पर जो भी कर्मचारी तैनात है उनके ऊपर खर्च किया जाने वाला वेतन भी बर्बाद हो रहा है। लिहाजा सरकार अगर लोगों को स्वास्थ्य सुविधा देना ही चाहती है। तो यहां पर मंजूर हुए सभी पदों को भरे ताकि लोग बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त कर सकें। इस मौके पर अनिल कुमार, पुरुषोत्तम लाल, पवन कुमार, रमेश कुमार, रॉकी कुमार, बालकृष्ण, जीत राज आदि उपस्थित रहे।
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प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता शशि शर्मा ने कहा कि करीब 5 वर्ष पूर्व औद्योगिक क्षेत्र से सटे उनके गांव में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के नाम पर इस केंद्र की स्थापना की गई थी। जब से यहां पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बना है तब से डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हो पाई है। जिन पदों को भरा गया था उन कर्मचारियों को भी हटाया जा रहा है। हालत यह है कि अब कर्मचारियों की कमी के चलते यहां पर होने वाली कोरोना का टीकाकरण भी बंद हो गया है। मजबूरन लोगों को खरोट या कहीं अन्य जगह पर जाकर टीकाकरण करवाना पड़ रहा है। उनका कहना था एक तरफ सरकार लोगों को सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा से गोविंदसर गांव को वंचित किया जा रहा है। कोरोना इस महामारी के दौर में लोग संक्रमण के डर से अपनी छोटी मोटी बीमारियों के लिए जीएमसी कठुआ नहीं जाना चाहते हैं। स्थानीय केंद्र में सुविधा ना होने के कारण लोगों को मजबूरन निजी डॉक्टरों से अपना उपचार करवाना पड़ रहा है। शर्मा ने कहा कि अगर लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से इलाज की सुविधा नहीं मिलनी है तो फिर इसे बनाने का भी कोई औचित्य नहीं है। क्योंकि यहां पर जो भी कर्मचारी तैनात है उनके ऊपर खर्च किया जाने वाला वेतन भी बर्बाद हो रहा है। लिहाजा सरकार अगर लोगों को स्वास्थ्य सुविधा देना ही चाहती है। तो यहां पर मंजूर हुए सभी पदों को भरे ताकि लोग बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त कर सकें। इस मौके पर अनिल कुमार, पुरुषोत्तम लाल, पवन कुमार, रमेश कुमार, रॉकी कुमार, बालकृष्ण, जीत राज आदि उपस्थित रहे।
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