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प्रभु श्रीराम के हाथों हुआ रावण का अंत
ब्यूरो/अमर उजाला,कठुआ/बिलावर/बसोहली
Updated Sat, 04 Oct 2014 12:50 AM IST
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देश के अन्य भागों की तरह जिले के बिलावर, बसोहली आदि इलाकों में बुराई पर अच्छाई के प्रतीक दशहरा यानी विजय दशमी का पर्व पूर्ण धार्मिक श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या पर पहुंचे दर्शकों ने श्रीराम के जयकारे से माहौल को राम के रंग में रंग दिया।
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कठुआ में रामलीला मंचन के अंतिम दिन राम-रावण युद्ध दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। युद्ध के दृश्य को दोपहर बाद ही मंचित किया गया, जिसमें राम की वानर सेना और रावण की सेना के बीच भीषण युद्ध हुआ। दोनों ओर से बाणों के खूब प्रहार हुए। अंतत: विभीषण द्वारा रावण को मारने का राज बताने पर प्रभु राम ने रावण के प्राण हर लिया।
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भीषण को लंका का राजपाट सौंपने के बाद प्रभु श्रीराम, सीता मैया और लक्ष्मण के साथ अयोध्या के लिए प्रस्थान किया। बिलावर में दशहरा समारोह शंकर रामलीला क्लब की ओर से प्राचीन शिव मंदिर चौगान में आयोजित किया गया। शाम साढे़ चार बजे के करीब शुरू हुआ यह समारोह छह बजे तक जारी रहा।
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सबसे पहले भगवान श्रीराम ने रावण के भाई कुंभकरण का वध किया। उसके बाद लक्ष्मण ने जबरदस्त युद्ध में रावण के पुत्र मेघनाद को ठिकाने लगाया। अंत में भगवान श्रीराम ने रावण की नाभि में तीर चलाकर अमृत कुंड को भेद डाला, जिससे रावण की मृत्य हो गई। रावण के ढेर होते ही रामादल में हर्ष की लहर दौड गई और चारों दिशाओं में भगवान श्रीराम के जयकारे गूंजने लगे।
इसके बाद भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, विभीषण आदि ने रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया। शाम को क्लब ने श्रीराम के राज्याविषेक का मंचन किया। राम के अयोध्या पहुंचने पर नगर को बडे़ ही आकर्षक ढंग से सजाया गया और हर घर में दीवाली मनाई गई। बसोहली में भी रामलीला के बाद रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले जलाए गए।