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सात वर्षों बाद देबो चक के सरकारी स्कूल में फिर से गूंजा जन गण मन
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पहले दिन सुबह की सभा में उज्जवल भविष्य की कामना करते बच्चे। - संवाद।
- फोटो : KATHUA
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हीरानगर। सीमावर्ती गांव देबो चक में बंद पड़े सरकारी स्कूल को खोलने को लेकर लोगों का संघर्ष रंग लाया है। सात वर्षों बाद शुक्रवार को इस गांव के सरकारी प्राइमरी स्कूल को खोल दिया गया और यहां एक बार फिर सुबह की सभा में राष्ट्रीय गान जन गण मन सुनने को मिला।
स्कूल खोलने की खुशी लोगों ने ढोल की थाप पर नाच कर मनाई। जेडईओ देसराज ने स्कूल के कमरों में लगे ताले खोलकर इन्हें शिक्षकों के हवाले किया और गांव में फिर से स्कूल खुलने की लोगों को मुबारकबाद दी। स्कूल खुलने पर स्थानीय लोग बेहद खुश थे, लेकिन उनसे भी ज्यादा खुशी उन बच्चों के चेहरों पर देखने को मिली जो कई माह से इसके खुलने का इंतजार कर रहे थे। पहले दिन यहां कुल 13 बच्चों ने अपना दाखिला कराया है।
बता दें कि बच्चों की संख्या पूरी न होने के कारण सात वर्ष पहले सरकारी आदेशों के अनुसार इस गांव के प्राइमरी स्कूल को बंद कर दिया गया था। यहां के बच्चों को पढ़ाई के लिए ढाई से तीन किलोमीटर दूर दूसरे गांव के स्कूल में जाना पड़ता था। करीब चार माह पहले गांव के लोगों ने स्कूल को फिर से खुलवाने की मांग को लेकर लगातार संघर्ष किया। प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाए। प्रदर्शन भी किए।
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पिछले सप्ताह गांव का एक शिष्टमंडल नवनियुक्त जिला उपायुक्त राहुल पांडे से मिला और स्कूल को खोलने की मांग की। जिस पर उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि जल्द स्कूल को खोल दिया जाएगा। आज लोगों की मांग पूरी हो गई और स्कूल खुल गया है। स्थानीय निवासी दविंदर सिंह ने बताया कि गांव के बहुत से लोग बच्चों को निजी स्कूलों में नहीं पढ़ा सकते हैं। इनके बच्चे कई महीनों से घर बैठे थे, आज स्कूल खुलने पर अभिभावक और बच्चे बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा इस स्कूल को खुलवाने के लिए स्थानीय लोगों को बहुत संघर्ष करना पड़ा, लेकिन हमें खुशी है इस बात की कि हमारा संघर्ष रंग लाया है। इसमें गांव के कई लोगों का सहयोग रहा है।
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स्कूल खोलने की खुशी लोगों ने ढोल की थाप पर नाच कर मनाई। जेडईओ देसराज ने स्कूल के कमरों में लगे ताले खोलकर इन्हें शिक्षकों के हवाले किया और गांव में फिर से स्कूल खुलने की लोगों को मुबारकबाद दी। स्कूल खुलने पर स्थानीय लोग बेहद खुश थे, लेकिन उनसे भी ज्यादा खुशी उन बच्चों के चेहरों पर देखने को मिली जो कई माह से इसके खुलने का इंतजार कर रहे थे। पहले दिन यहां कुल 13 बच्चों ने अपना दाखिला कराया है।
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बता दें कि बच्चों की संख्या पूरी न होने के कारण सात वर्ष पहले सरकारी आदेशों के अनुसार इस गांव के प्राइमरी स्कूल को बंद कर दिया गया था। यहां के बच्चों को पढ़ाई के लिए ढाई से तीन किलोमीटर दूर दूसरे गांव के स्कूल में जाना पड़ता था। करीब चार माह पहले गांव के लोगों ने स्कूल को फिर से खुलवाने की मांग को लेकर लगातार संघर्ष किया। प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाए। प्रदर्शन भी किए।
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पिछले सप्ताह गांव का एक शिष्टमंडल नवनियुक्त जिला उपायुक्त राहुल पांडे से मिला और स्कूल को खोलने की मांग की। जिस पर उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि जल्द स्कूल को खोल दिया जाएगा। आज लोगों की मांग पूरी हो गई और स्कूल खुल गया है। स्थानीय निवासी दविंदर सिंह ने बताया कि गांव के बहुत से लोग बच्चों को निजी स्कूलों में नहीं पढ़ा सकते हैं। इनके बच्चे कई महीनों से घर बैठे थे, आज स्कूल खुलने पर अभिभावक और बच्चे बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा इस स्कूल को खुलवाने के लिए स्थानीय लोगों को बहुत संघर्ष करना पड़ा, लेकिन हमें खुशी है इस बात की कि हमारा संघर्ष रंग लाया है। इसमें गांव के कई लोगों का सहयोग रहा है।