{"_id":"68af56494cd19a48c0027c66","slug":"deployment-of-consultant-gynecologist-in-sub-district-hospital-kathua-news-c-201-1-knt1009-123470-2025-08-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kathua News: उपजिला अस्पताल में कंसलटेंट गायनेकोलॉजिस्ट की तैनाती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kathua News: उपजिला अस्पताल में कंसलटेंट गायनेकोलॉजिस्ट की तैनाती
Thu, 28 Aug 2025 12:32 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Thu, 28 Aug 2025 12:32 AM IST
विज्ञापन
अमर उजाला में प्रकाशित खबरें
- फोटो : mathura
कठुआ। पहाड़ी उपजिला अस्पताल बनी में स्त्री विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से और बारिश के चलते बंद पड़े मार्गों के चलते लगातार रेफर गर्भवती महिलाएं के चलते स्वास्थ्य विभाग ने एक कंसलटेंट स्त्रीरोग विशेषज्ञ की अस्पताल में तैनाती कर दी है। स्वास्थ्य विभाग ने आपातकालीन स्थित में स्त्री विशेषज्ञ डॉक्टर को उपजिला अस्पताल बिलावर से बनी में स्थानांतरित किया है। अमर उजाला ने लगातार मामले को प्राथमिकता से उजागर किया था।
दरअसल, एक सप्ताह के भीतर बनी अस्पताल के दो प्रसव के दो मामले सामने आए। जिसने केवल स्थानीय लोगों को झकझोर कर रखा दिया, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की स्वास्थ्य सुविधाओं की भी पोल खोल दी थी। जिसे अमर उजाला अखबार ने दोनों मामलों को प्रमुखता से उठाया था। जिसमें एक महिला के नवजात शिशु की बनी अस्पताल में ही मौत हो गई, वहीं, महिला की रेफर करने के दो दिन बाद जीएमसी में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। जबकि अन्य महिला को कई घंटों की मशक्कत के बाद जीएमसी कठुआ पहुंचाया गया।
26 अगस्त को अमर उजाला में प्रकाशित खबर-आखों में आंसू, कंधे पर पत्नी का शव...35 किमी पैदल चले गुलशन में ढग्गर की महिला उषा प्रसव पीढ़ा के चलते उपजिला अस्पताल बनी में भर्ती होती है। जहां उसके नवजात शिशु की मौत हो जाती है और महिला की नाजुक स्थिति को देखते हुए 22 अगस्त को जीएमसी कठुआ रेफर किया जाता है और उसकी उपचार के दौरान 24 अगस्त को मौत हो जाती है। वहीं, अन्य खबर- कराहती रही गर्भवती.....एंबुलेंस फंसी रही, ग्रामीणों ने कंबल में लिटाकर अस्पताल पहुंचाया। इस मामले में प्रसव पीड़ा से बनी अस्पताल से रेफर महिला की एंबुलेंस कई घंटे सूखे नाले के पास पस्सियां गिरने से फंसी रही। बाद में लोगों ने भारी मशक्कत के बाद कंबल पर लिटाकर जीएमसी कठुआ पहुंचाया गया। यहां उसका उपचार जारी है।
विज्ञापन
पहाड़ी उपमंडल बनी के एक मात्र उपजिला अस्पताल में लंबे समय से न तो कोई स्त्री विशेषज्ञ डॉक्टर और न ही बच्चों के डॉक्टर की तैनाती है। जिसके चलते क्रिटिकल स्थिति में अस्पताल में पहुंचने वालों मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद जीएमसी कठुआ रेफर कर दिया जाता है। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अस्पताल में सभी तरह के डॉक्टरों की तैनाती होती तो शायद महिला और उसके नवजात शिशु की जान को बचाया जा सकता था और दूसरी महिला को रेफर के दौरान पूरे दिन की पीड़ा नहीं उठानी पड़ती।
विज्ञापन
दरअसल, एक सप्ताह के भीतर बनी अस्पताल के दो प्रसव के दो मामले सामने आए। जिसने केवल स्थानीय लोगों को झकझोर कर रखा दिया, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की स्वास्थ्य सुविधाओं की भी पोल खोल दी थी। जिसे अमर उजाला अखबार ने दोनों मामलों को प्रमुखता से उठाया था। जिसमें एक महिला के नवजात शिशु की बनी अस्पताल में ही मौत हो गई, वहीं, महिला की रेफर करने के दो दिन बाद जीएमसी में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। जबकि अन्य महिला को कई घंटों की मशक्कत के बाद जीएमसी कठुआ पहुंचाया गया।
विज्ञापन
26 अगस्त को अमर उजाला में प्रकाशित खबर-आखों में आंसू, कंधे पर पत्नी का शव...35 किमी पैदल चले गुलशन में ढग्गर की महिला उषा प्रसव पीढ़ा के चलते उपजिला अस्पताल बनी में भर्ती होती है। जहां उसके नवजात शिशु की मौत हो जाती है और महिला की नाजुक स्थिति को देखते हुए 22 अगस्त को जीएमसी कठुआ रेफर किया जाता है और उसकी उपचार के दौरान 24 अगस्त को मौत हो जाती है। वहीं, अन्य खबर- कराहती रही गर्भवती.....एंबुलेंस फंसी रही, ग्रामीणों ने कंबल में लिटाकर अस्पताल पहुंचाया। इस मामले में प्रसव पीड़ा से बनी अस्पताल से रेफर महिला की एंबुलेंस कई घंटे सूखे नाले के पास पस्सियां गिरने से फंसी रही। बाद में लोगों ने भारी मशक्कत के बाद कंबल पर लिटाकर जीएमसी कठुआ पहुंचाया गया। यहां उसका उपचार जारी है।
विज्ञापन
पहाड़ी उपमंडल बनी के एक मात्र उपजिला अस्पताल में लंबे समय से न तो कोई स्त्री विशेषज्ञ डॉक्टर और न ही बच्चों के डॉक्टर की तैनाती है। जिसके चलते क्रिटिकल स्थिति में अस्पताल में पहुंचने वालों मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद जीएमसी कठुआ रेफर कर दिया जाता है। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अस्पताल में सभी तरह के डॉक्टरों की तैनाती होती तो शायद महिला और उसके नवजात शिशु की जान को बचाया जा सकता था और दूसरी महिला को रेफर के दौरान पूरे दिन की पीड़ा नहीं उठानी पड़ती।

अमर उजाला में प्रकाशित खबरें- फोटो : mathura