{"_id":"613f9f078ebc3e2c206c3a42","slug":"dangal-kathua-news-jmu2435753167","type":"story","status":"publish","title_hn":"बराबरी पर छूटा टारडा का वार्षिक दंगल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बराबरी पर छूटा टारडा का वार्षिक दंगल
विज्ञापन
टारडा गांव में आयोजित दंगल में दमखम लगाते पहलवान, संवाद।
- फोटो : KATHUA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कठुआ। लखनपुर क्षेत्र के गांव टारडा में वार्षिक दंगल का आयोजन किया गया। बाबा सुरगल देव स्थान पर होने वाले इस आयोजन में जम्मू कश्मीर के अलावा पड़ोसी राज्य पंजाब से आए पहलवानों ने शिरकत कर दंगल को रोचक बना दिया।
हालांकि, दंगल में सबसे महत्वपूर्ण छोटी और बड़ी माली का मुकाबला बराबरी पर छूटा। लेकिन, प्रदेश सहित पंजाब से आए कई पहलवानों के बीच हुए करीब 80 मुकाबलों ने वहां मौजूद दर्शकों का काफी मनोरंजन किया। दंगल में छोटी माली का मुकाबला पठानकोट के पहलवान नन्नू और नगरी के पहलवान शालू के बीच हुआ। वहीं बड़ी माली का मुकाबला हीरानगर के पहलवान बाबर और पठानकोट के पहलवान ऋषि के बीच हुआ।
दोनों ही मुकाबलों में पहलवानों ने काफी देर तक जोर आजमाइश की। काफी लंबे चले इन मुकाबलों में किसी भी पहलवान के पीछे न हटने पर आयोजकों ने दोनों ही मुकाबलों को बराबरी का घोषित करते हुए इनाम की राशि बराबर बांट दी। दंगल के आयोजन के बारे में बाबा सुरगल देव स्थान के मुख्य सेवादार जरनैल सिंह ने बताया कि नाग पंचमी के बाद गांव में होने वाले इस आयोजन की परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है। इसे गांव के लोग आज भी निभा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
हालांकि, दंगल में सबसे महत्वपूर्ण छोटी और बड़ी माली का मुकाबला बराबरी पर छूटा। लेकिन, प्रदेश सहित पंजाब से आए कई पहलवानों के बीच हुए करीब 80 मुकाबलों ने वहां मौजूद दर्शकों का काफी मनोरंजन किया। दंगल में छोटी माली का मुकाबला पठानकोट के पहलवान नन्नू और नगरी के पहलवान शालू के बीच हुआ। वहीं बड़ी माली का मुकाबला हीरानगर के पहलवान बाबर और पठानकोट के पहलवान ऋषि के बीच हुआ।
विज्ञापन
दोनों ही मुकाबलों में पहलवानों ने काफी देर तक जोर आजमाइश की। काफी लंबे चले इन मुकाबलों में किसी भी पहलवान के पीछे न हटने पर आयोजकों ने दोनों ही मुकाबलों को बराबरी का घोषित करते हुए इनाम की राशि बराबर बांट दी। दंगल के आयोजन के बारे में बाबा सुरगल देव स्थान के मुख्य सेवादार जरनैल सिंह ने बताया कि नाग पंचमी के बाद गांव में होने वाले इस आयोजन की परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है। इसे गांव के लोग आज भी निभा रहे हैं।
विज्ञापन