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Kathua News: रावी नदी किनारे रोजाना खुले में फेंका जा रहा 40 टन कचरा
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-निर्माण के दो साल के बाद भी एमआरएफ प्लांट काम नहीं हुआ शुरू, टेक्निकल स्टाफ न होना कारण
- जलक्षेत्र में बढ़ रहे प्रदूषण से प्रदूषण नियंत्रण विभाग बेखबर
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। प्रतिदिन शहर से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने के लिए बनाया गया मेटेरियल रिकवरी फेसिलिटी (एमआरएफ) प्लांट का काम शुरू नहीं हो पाया है। नतीजतन प्रतिदिन 40 टन कचरे को रावी नदी के किनारे फेंका जा रहा है।
इससे न केवल पर्यावरण बल्कि रावी नदी भी प्रदूषित हो रही है। लगातार कचरे के जलते रहने से राहगीरों और आसपास बसने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। दरअसल दो साल पूर्व लोक निर्माण विभाग ने लगभग 80 लाख की लागत से एमआरएफ प्लांट का निर्माण पूरा किया था। शहरी स्थानीय निकाय विभाग प्लांट में लगभग 15 लाख की मशीनरी भी कचरा प्रबंधन के लिए स्थापित कर चुका है।
इस सबके बावजूद के पास नगर परिषद के पास टेक्निकल स्टाफ न होने के चलते न तो कचरे को अलग-अलग किया जा रहा है और इसका प्रसंस्करण हो पा रहा है। एमआरएफ प्लांट के एक किलोमीटर के दायरे में बड़े-बड़े कचरे के ढेर लग लग चुके हैं। जो पिछले कई महीने से लगातार जल रहे हैं। हालांकि नगर परिषद शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने का काम शुरू होते ही एमआरएफ प्लांट को भी शुरू करने का दावा कर रही थी। लेकिन दो साल बीत जाने के बावजूद भी प्लांट शुरू नहीं हो पाया।
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एक किमी तक फैले हैं कचरे के ढेर
कठुआ शहर से रोजाना लगभग 40 टन कचरा इकट्ठा होता है। हर महीने 1200 टन और एक साल में लगभग 15000 टन कचरा निकलता है। इसे पिछले 21 वर्षों से बेड़ियां पत्तन में रावी नदी किनारे डंप किया जा रहा है। कचरे के ढेर रावी नदी किनारे एक किलोमीटर तक फैले हैं। यहां से उठने वाली दुर्गंध से राहगीर परेशान हैं। ये पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रही है।
2021 में लग चुका है 82.40 लाख का जुर्माना
रावी नदी किनारे कचरा फैलाने पर जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति की ओर से वर्ष 2021 में नगर परिषद कठुआ पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) नियम-2016 की अनदेखी के लिए 82.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया चुका है। इसके बाद भी नगर परिषद कोई सबक नहीं लिया।
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एमआरएफ प्लांट को सुचारू बनाने के लिए प्रक्रिया चल रही है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक न केवल नगर परिषद कठुआ, बल्कि नगर कमेटी लखनपुर और नगर कमेटी परोल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) के लिए टेंडर निकालने जा रही है। तीनों निकायों के कचरे को एकत्रित करने से लेकर इसे अलग करने और निस्तारण का जिम्मा किसी कार्यपालक एजेंसी को दिया जाएगा। उम्मीद है कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी।
- अमित शर्मा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद कठुआ।
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- जलक्षेत्र में बढ़ रहे प्रदूषण से प्रदूषण नियंत्रण विभाग बेखबर
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। प्रतिदिन शहर से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने के लिए बनाया गया मेटेरियल रिकवरी फेसिलिटी (एमआरएफ) प्लांट का काम शुरू नहीं हो पाया है। नतीजतन प्रतिदिन 40 टन कचरे को रावी नदी के किनारे फेंका जा रहा है।
इससे न केवल पर्यावरण बल्कि रावी नदी भी प्रदूषित हो रही है। लगातार कचरे के जलते रहने से राहगीरों और आसपास बसने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। दरअसल दो साल पूर्व लोक निर्माण विभाग ने लगभग 80 लाख की लागत से एमआरएफ प्लांट का निर्माण पूरा किया था। शहरी स्थानीय निकाय विभाग प्लांट में लगभग 15 लाख की मशीनरी भी कचरा प्रबंधन के लिए स्थापित कर चुका है।
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इस सबके बावजूद के पास नगर परिषद के पास टेक्निकल स्टाफ न होने के चलते न तो कचरे को अलग-अलग किया जा रहा है और इसका प्रसंस्करण हो पा रहा है। एमआरएफ प्लांट के एक किलोमीटर के दायरे में बड़े-बड़े कचरे के ढेर लग लग चुके हैं। जो पिछले कई महीने से लगातार जल रहे हैं। हालांकि नगर परिषद शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने का काम शुरू होते ही एमआरएफ प्लांट को भी शुरू करने का दावा कर रही थी। लेकिन दो साल बीत जाने के बावजूद भी प्लांट शुरू नहीं हो पाया।
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एक किमी तक फैले हैं कचरे के ढेर
कठुआ शहर से रोजाना लगभग 40 टन कचरा इकट्ठा होता है। हर महीने 1200 टन और एक साल में लगभग 15000 टन कचरा निकलता है। इसे पिछले 21 वर्षों से बेड़ियां पत्तन में रावी नदी किनारे डंप किया जा रहा है। कचरे के ढेर रावी नदी किनारे एक किलोमीटर तक फैले हैं। यहां से उठने वाली दुर्गंध से राहगीर परेशान हैं। ये पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रही है।
2021 में लग चुका है 82.40 लाख का जुर्माना
रावी नदी किनारे कचरा फैलाने पर जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति की ओर से वर्ष 2021 में नगर परिषद कठुआ पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) नियम-2016 की अनदेखी के लिए 82.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया चुका है। इसके बाद भी नगर परिषद कोई सबक नहीं लिया।
एमआरएफ प्लांट को सुचारू बनाने के लिए प्रक्रिया चल रही है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक न केवल नगर परिषद कठुआ, बल्कि नगर कमेटी लखनपुर और नगर कमेटी परोल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) के लिए टेंडर निकालने जा रही है। तीनों निकायों के कचरे को एकत्रित करने से लेकर इसे अलग करने और निस्तारण का जिम्मा किसी कार्यपालक एजेंसी को दिया जाएगा। उम्मीद है कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी।
- अमित शर्मा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद कठुआ।