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कला संस्कृति की मिसाल बनेगा इस बार बैसाखी मेला
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कठुआ। बनी कस्बा में इस बार बैसाखी मेला भव्यता के साथ मनाया जाएगा। कोरोना महामारी के कारण दो साल बाद होने वाले इस मेले में अबकी जम्मू कश्मीर के साथ हिमाचल की कला, संस्कृति की छाप भी देखने को मिलेगी। पहाड़ी सिड्डू से लेकर कसरोड़ का साग, लोक गीतों से लेकर लोक नृत्यों की प्रस्तुति मेले का मुख्य आकर्षण होंगे। मैदानी क्षेत्रों में तापमान चढ़ने के कारण मेला जिले की पहाड़ी सब डिवीजन के लिए पर्यटन के द्वार भी खोलेगा। इस बार भाषा और कला संस्कृति अकादमी के सहयोग से बनी बैैसाखी उत्सव समिति की ओर मेले को शानदार बनाने का पूरा इंतजाम है।
बतादें कि दो दिवसीय बनी बैसाखी मेले का आगाज 13 अप्रैल को होगा। मेले में सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ ही पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाएंगे। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि मेले में अपनी विरासत को बचाना पहला मकसद है। इसी को ध्यान में रखते हुए पारंपरिक व्यंजन सिड्डू, मक्की की रोटी और कसरोड़ का साग उपलब्ध करवाया जाएगा। इसके अलावा स्थानीय पहनावे के स्टाल भी होंगे। जिसमें कंबल (पट्टू), कोट (तानी), चोला, गौरेया प्रस्तुत करने वाली महिलाओं के वस्त्र दौड़ शामिल हैं।
मेले में स्थानीय संस्कृति को लोक कलाकार प्रस्तुत करेंगे। जिसमें कुड और गौरेया आकर्षण का केंद्र होंगा। आयोजकों ने बताया कि स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले लकड़ी के उत्पादों और औजार के स्टाल भी क्राफ्ट मेले में लगाए जा रहे हैं। बैसाखी उत्सव में भागीदारी के लिए 110 कलाकार बनी पहुंच रहे हैं। इनमें बनी के गायक दरमेज संधू, चंबा से जोनी, चंबा से पूनम भारद्वाज, बनी से पवन भारद्वाज शामिल हैं। जम्मू संभाग की संस्कृतियों को भी बनी मेले के दौरान दर्शक देख सकेंगे। इसके लिए पाडर से टीम आएगी। रामनगर, रियासी और मछेडी से भी टीमें आकर प्रस्तुति देंगी।
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सरथल और ढग्गर के लिए पर्यटन के द्वारा खोलेगा बैसाखी मेला
जिले के बनी सब डिवीजन में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहने वाले सरथल और ढग्गर की वादियों का द्वार इस साल बैसाखी मेले से खुलने वाला है। मैदानी क्षेत्रों में 40 डिग्री पार कर रहे तापमान और लू के थपेड़ों से हटकर लोग इन इलाकों में बर्फ से लदे पहाड़ों का मजा ले सकेंगे। आयोजकों के अनुसार क्षेत्र की संस्कृति को बचाने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यह महत्वपूर्ण आयोजन है। क्षेत्र में लोगों को इससे अवगत करवाने के लिए मुनादी भी कराई जा रही है।
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बतादें कि दो दिवसीय बनी बैसाखी मेले का आगाज 13 अप्रैल को होगा। मेले में सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ ही पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाएंगे। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि मेले में अपनी विरासत को बचाना पहला मकसद है। इसी को ध्यान में रखते हुए पारंपरिक व्यंजन सिड्डू, मक्की की रोटी और कसरोड़ का साग उपलब्ध करवाया जाएगा। इसके अलावा स्थानीय पहनावे के स्टाल भी होंगे। जिसमें कंबल (पट्टू), कोट (तानी), चोला, गौरेया प्रस्तुत करने वाली महिलाओं के वस्त्र दौड़ शामिल हैं।
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मेले में स्थानीय संस्कृति को लोक कलाकार प्रस्तुत करेंगे। जिसमें कुड और गौरेया आकर्षण का केंद्र होंगा। आयोजकों ने बताया कि स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले लकड़ी के उत्पादों और औजार के स्टाल भी क्राफ्ट मेले में लगाए जा रहे हैं। बैसाखी उत्सव में भागीदारी के लिए 110 कलाकार बनी पहुंच रहे हैं। इनमें बनी के गायक दरमेज संधू, चंबा से जोनी, चंबा से पूनम भारद्वाज, बनी से पवन भारद्वाज शामिल हैं। जम्मू संभाग की संस्कृतियों को भी बनी मेले के दौरान दर्शक देख सकेंगे। इसके लिए पाडर से टीम आएगी। रामनगर, रियासी और मछेडी से भी टीमें आकर प्रस्तुति देंगी।
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सरथल और ढग्गर के लिए पर्यटन के द्वारा खोलेगा बैसाखी मेला
जिले के बनी सब डिवीजन में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहने वाले सरथल और ढग्गर की वादियों का द्वार इस साल बैसाखी मेले से खुलने वाला है। मैदानी क्षेत्रों में 40 डिग्री पार कर रहे तापमान और लू के थपेड़ों से हटकर लोग इन इलाकों में बर्फ से लदे पहाड़ों का मजा ले सकेंगे। आयोजकों के अनुसार क्षेत्र की संस्कृति को बचाने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यह महत्वपूर्ण आयोजन है। क्षेत्र में लोगों को इससे अवगत करवाने के लिए मुनादी भी कराई जा रही है।