फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Kathua News ›   cultural

महाकाली मंदिर जसरोटा में आठ हजार भक्तों ने किए दर्शन

विज्ञापन
cultural
चैत्र नवरात्र के पहले दिन सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। जिला भर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कतारें लगी रहीं। इस बीच माता के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा। सबसे ज्यादा श्रद्धालु महाकाली मंदिर जसरोटा पहुंचे। यहां आठ हजार भक्तों ने दर्शन किए।
विज्ञापन

भक्तों के उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोरोना महामारी के बीच भी कोविड नियमों का पालन करते हुए बड़ी संख्या में भक्त देवी मंदिरों में पहुंच रहे हैं। शहर से सटे माता बाला सुंदरी मंदिर और शहर के बीचों बीच स्थित माता आशापूर्णी मंदिर में श्रद्धालुओं दर्शनों के लिए अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। बाला सुंदरी मंदिर नगरी में जहां तीन हजार श्रद्धालुओं ने माथा टेका, वहीं बाला सुंदरी मंदिर बिलावर में पांच सौ श्रद्धालु पहुंचे। शेर कोटला मंदिर में भी करीब आठ सौ श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। कुछ ऐसा ही नजारा जसरोटा स्थित काली माता मंदिर, लखनपुर स्थित किले वाली माता मंदिर परिसर में भी नजर आया। जांडी किले माता मंदिर में 850 भक्तों ने माथा टेका। जिले के दूरदराज इलाकों में स्थित ऐतिहासिक प्राचीन मंदिरों को भी प्रथम नवरात्र पर दर्शनों के लिए मंगलवार से खोल दिया गया है। जोडेयां माता, दोले माता मंदिर, शक्ति माता मंदिर बनी, माता वनखंडी महानपुर, चंचलो माता बसोहली में भी दिन भर भक्त दर्शनों के लिए पहुंचते नजर आए। सुकराला माता बिलावर में 35 सौ भक्त पहुंचे। हालांकि इस बार बड़े मंदिरों में मेले की अनुमति नहीं दी गई है।
विज्ञापन

महिलाओं ने लगाई साख
माता के प्रथम शैलपुत्री स्वरूप की अराधना के लिए श्रद्धालुओं ने जबरदस्त उत्साह दिखाया। नवरात्र पूजन की शुरूआत में साख लगाने के लिए भी महिलाओं का उत्साह देखते ही बना। इस दौरान प्रशासन ने सभी मंदिरों में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त रखे। पुलिसकर्मी मंदिरों में श्रद्धालुओं को कतारबद्ध और सोशल डिस्टेसिंग का पालन करने की हिदायत देते नजर आए।
विज्ञापन
विज्ञापन

पालकी में दरबार पहुंची जोड़ेयां माता
नवरात्र पर्व पर छड़ी यात्रा की परंपरा सामान्य रूप से अधिकांश मंदिरों के लिए निकलती हैं। लेकिन नवरात्रों में जोड़ेयां माता मंदिर की परंपरा इन सब से हटकर है। यहां पर हर नवरात्र तड़के माता की निशान यात्रा मंदिर पहुंचती है और हर शाम विधिवत पूजा के बाद वापस लौट जाती है और यह क्रम पूरे नवरात्र के दौरान जारी रहता है। दरअसल माता के आभूषण पालकी में सजाकर मंदिर परिसर तक लाए जाते हैं। इस दौरान पारंपरिक बांसुरी और ढोल की थाप पर श्रद्धालु दन्नी गांव से झूमते हुए पहुंचते हैं। सूर्योदय के समय मंदिर पहुंचकर पहले सूर्य नमस्कार किया जाता है जिसके बाद माता का श्रृंगार कर विधिवत पूजा आरंभ होती है। मंदिर पहुंची निशान यात्रा का श्रद्धालुओं और मां शीतला वेलफेयर चैरिटेबल ट्रस्ट के सदस्यों ने भव्य स्वागत किया। पूरा इलाका महामाई के जयघोष से गूंज उठा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed