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पागल कुते का आतंक, दो दिन में ग्यारह को बनाया शिकार
Updated Tue, 22 May 2018 02:26 PM IST
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कठुआ।
शहर के साथ लगते औद्योगिक क्षेत्र में दो दिन में 11 लोगों को पागल कुत्ते ने काट लिया, लेकिन जिले के सबसे बड़े अस्पताल में जब वे पहुंचे तो पता चला कि वहां एंटी रेबीज का टीका ही नहीं है। इससे उनको बाजार से महंगे दाम पर यह टीका खरीदकर लगवाना पड़ा। इस पर लोगों ने रोष जताते हुए कहा कि जो टीका हर स्वास्थ्य केंद्र में होना चाहिए, उसका जिला अस्पताल में भी नहीं होना सरकार की संवेदनहीनता को दिखाता है।
जानकारी के मुताबिक बुधवार को औद्योगिक क्षेत्र में पागल कुत्ते ने तीन लोगों को काट लिया। घायलों की पहचान 21 वर्षीय सुनील, आठ वर्षीय सुरेखा और 85 वर्षीय कृष्ण चंद के रूप में हुई है। सुनील ने बताया कि वह काम पर जा रहा था कि अचानक सामने से आ रहे कुत्ते ने उसे काट लिया। सुरेखा ने बताया कि वह अपने घर के बाहर खेल रही थी जब कुत्ते ने उसे काटा। तीनों को उपचार के लिए जिला अस्पताल कठुआ पहुंचाया गया। घायलों ने बताया कि मंगलवार को भी इसी कुत्ते ने आठ लोगों को अपना शिकार बनाया था। उन्होंने कहा कि एक तरफ गर्मी बढ़ने के साथ ही इलाके में कुत्तों के पागल होने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जबकि जिला अस्पताल में इसको लेकर कोई तैयारी नहीं है। हालत यह है कि जो एंटी रेबीज का टीका गांव के भी किसी स्वास्थ्य केंद्र में मिलना चाहिए, वह जिला अस्पताल में भी नहीं है। ऐसे में समझा जा सकता है कि यदि किसी गरीब आदमी को कुत्ता काट ले तो उसकी जान पर भी बन सकती है।
राम भरोसे लोगों का स्वास्थ्य
गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में रेबीज के मामले भी बढ़ने लगे हैं। मई और जून का महीना रेबीज के लिए पीक सीजन माना जाता है, लेकिन जिला अस्पताल कठुआ में एंटी रेबीज का टीका तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में रेबीज के मरीजों को बाहर से टीका खरीदना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही एक बार फिर सामने आई जब मंगलवार और बुधवार को पहुंचे रेबीज के मरीजों को बीपीएल कोटा देखकर दवा दी गई, बाकी को प्राथमिक उपचार देकर दवा लिख दी गई। अस्पताल प्रशासन की मानें तो इन दिनों हर दिन कुत्ते काटने के दो-तीन मामले आ रहे हैं, लेकिन एंटी रेबीज का टीका नहीं होने से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। ऐसा पहली बार नहीं है कि अस्पताल में यह टीका नहीं हो, दो साल पूर्व भी ऐसे ही हालात बने थे। उस समय भी मरीजों को बाहर से महंगे दाम पर एंटी रेबीज के इंजेक्शन लेने पड़े थे।
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जिला अस्पताल में एंटी रेबीज का टीका खत्म हो गया है। इसका कोटा मेडिकल सप्लाई से आ गया है। अब इसको जांच के लिए भेजा गया है। जांच में 15-20 दिन लगेंगे। इसके बाद यह रेबीज के मरीजों से लिए अस्पताल में उपलब्ध होगा। बहरहाल, बीपीएल मरीजों के लिए इसे खरीदकर दिया जा रहा है।
-सुरेश कुमार, अस्पताल अधीक्षक
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शहर के साथ लगते औद्योगिक क्षेत्र में दो दिन में 11 लोगों को पागल कुत्ते ने काट लिया, लेकिन जिले के सबसे बड़े अस्पताल में जब वे पहुंचे तो पता चला कि वहां एंटी रेबीज का टीका ही नहीं है। इससे उनको बाजार से महंगे दाम पर यह टीका खरीदकर लगवाना पड़ा। इस पर लोगों ने रोष जताते हुए कहा कि जो टीका हर स्वास्थ्य केंद्र में होना चाहिए, उसका जिला अस्पताल में भी नहीं होना सरकार की संवेदनहीनता को दिखाता है।
जानकारी के मुताबिक बुधवार को औद्योगिक क्षेत्र में पागल कुत्ते ने तीन लोगों को काट लिया। घायलों की पहचान 21 वर्षीय सुनील, आठ वर्षीय सुरेखा और 85 वर्षीय कृष्ण चंद के रूप में हुई है। सुनील ने बताया कि वह काम पर जा रहा था कि अचानक सामने से आ रहे कुत्ते ने उसे काट लिया। सुरेखा ने बताया कि वह अपने घर के बाहर खेल रही थी जब कुत्ते ने उसे काटा। तीनों को उपचार के लिए जिला अस्पताल कठुआ पहुंचाया गया। घायलों ने बताया कि मंगलवार को भी इसी कुत्ते ने आठ लोगों को अपना शिकार बनाया था। उन्होंने कहा कि एक तरफ गर्मी बढ़ने के साथ ही इलाके में कुत्तों के पागल होने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जबकि जिला अस्पताल में इसको लेकर कोई तैयारी नहीं है। हालत यह है कि जो एंटी रेबीज का टीका गांव के भी किसी स्वास्थ्य केंद्र में मिलना चाहिए, वह जिला अस्पताल में भी नहीं है। ऐसे में समझा जा सकता है कि यदि किसी गरीब आदमी को कुत्ता काट ले तो उसकी जान पर भी बन सकती है।
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राम भरोसे लोगों का स्वास्थ्य
गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में रेबीज के मामले भी बढ़ने लगे हैं। मई और जून का महीना रेबीज के लिए पीक सीजन माना जाता है, लेकिन जिला अस्पताल कठुआ में एंटी रेबीज का टीका तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में रेबीज के मरीजों को बाहर से टीका खरीदना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही एक बार फिर सामने आई जब मंगलवार और बुधवार को पहुंचे रेबीज के मरीजों को बीपीएल कोटा देखकर दवा दी गई, बाकी को प्राथमिक उपचार देकर दवा लिख दी गई। अस्पताल प्रशासन की मानें तो इन दिनों हर दिन कुत्ते काटने के दो-तीन मामले आ रहे हैं, लेकिन एंटी रेबीज का टीका नहीं होने से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। ऐसा पहली बार नहीं है कि अस्पताल में यह टीका नहीं हो, दो साल पूर्व भी ऐसे ही हालात बने थे। उस समय भी मरीजों को बाहर से महंगे दाम पर एंटी रेबीज के इंजेक्शन लेने पड़े थे।
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जिला अस्पताल में एंटी रेबीज का टीका खत्म हो गया है। इसका कोटा मेडिकल सप्लाई से आ गया है। अब इसको जांच के लिए भेजा गया है। जांच में 15-20 दिन लगेंगे। इसके बाद यह रेबीज के मरीजों से लिए अस्पताल में उपलब्ध होगा। बहरहाल, बीपीएल मरीजों के लिए इसे खरीदकर दिया जा रहा है।
-सुरेश कुमार, अस्पताल अधीक्षक