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पीडीपी और भाजपा ने किया राज्य को बदनाम करने का काम
Updated Sun, 15 Apr 2018 01:36 AM IST
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कठुआ।
रसाना मामले में भाजपा के दो मंत्रियों के त्यागपत्र के बाद अब सरकार को विभिन्न संगठन घेर रहे हैं। पीडीपी और भाजपा पर राज्य को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए युवा संगठन एवं एंटी पाल्यूशन मूवमेंट ने पत्रकार वार्ता का आयोजन किया। वार्ता के दौरान दोनों संगठनों के सदस्यों ने कहा कि भाजपा के दो मंत्रियों ने त्याग पत्र दिया लेकिन पीडीपी अब भी इस मामले पर चुप्पी साधे है। उप मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधते हुए सदस्यों ने कहा कि ऐसे उप मुख्यमंत्री का क्या लाभ जो अपने अवाम के लिए बोल भी न सके।
वार्ता के दौरान अजय सिंह, उपप्रधान कौशल शर्मा, महासचिव भूपिंदर सिंह, बलविंदर सिंह ने कहा कि राज्य में रसाना मामला इतना उलझा दिया गया कि अब हर जगह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य बदनाम हो चुका है। राज्य को सांप्रदायिक होने का टैग दिया जा रहा है और यह सब पीडीपी और भाजपा के उन 23 विधायकों के कारण है, जो इस मामले को धर्म जाति का मामला बनाने के लिए काम करते रहे। उन्होंने कहा कि एक बच्ची के साथ दरिंदगी होती है और सरकार उसके आरोपियों को सजा दिलाने के स्थान पर इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने का काम किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में जनवरी महीने से लेकर अब तक जो भी हुआ उसके पीछे केवल सरकार की धर्म जात के नाम पर वोट बैंक की राजनीति है। दो मंत्रियों ने देरी से ही सही त्याग पत्र दिया और अब भी इस मामले को भाजपा बनाम पीडीपी कर पेश किया जा रहा है। दोनों पार्टियों के आला नेता इस मामले में उस बच्ची को भूल गए और केवल अपना वोट बैंक देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री को तो शर्म से ही अपना त्यागपत्र दे देना चाहिए, क्योंकि वे बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए एक शब्द तक नहीं बोले हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्होंने क्राइम ब्रांच को मामला देने में देरी नहीं की तो फिर सीबीआई के लिए इतना भय क्यों। क्या उन्हें सीबीआई जांच से अपने धर्म जात के ऐजेंडे के खुल्लासे का डर है। जब कश्मीर में हुए मामले की जांच सीबीआई कर सकती है तो फिर जम्मू में बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए सीबीआई जांच क्यों नहीं।
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रसाना मामले में भाजपा के दो मंत्रियों के त्यागपत्र के बाद अब सरकार को विभिन्न संगठन घेर रहे हैं। पीडीपी और भाजपा पर राज्य को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए युवा संगठन एवं एंटी पाल्यूशन मूवमेंट ने पत्रकार वार्ता का आयोजन किया। वार्ता के दौरान दोनों संगठनों के सदस्यों ने कहा कि भाजपा के दो मंत्रियों ने त्याग पत्र दिया लेकिन पीडीपी अब भी इस मामले पर चुप्पी साधे है। उप मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधते हुए सदस्यों ने कहा कि ऐसे उप मुख्यमंत्री का क्या लाभ जो अपने अवाम के लिए बोल भी न सके।
वार्ता के दौरान अजय सिंह, उपप्रधान कौशल शर्मा, महासचिव भूपिंदर सिंह, बलविंदर सिंह ने कहा कि राज्य में रसाना मामला इतना उलझा दिया गया कि अब हर जगह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य बदनाम हो चुका है। राज्य को सांप्रदायिक होने का टैग दिया जा रहा है और यह सब पीडीपी और भाजपा के उन 23 विधायकों के कारण है, जो इस मामले को धर्म जाति का मामला बनाने के लिए काम करते रहे। उन्होंने कहा कि एक बच्ची के साथ दरिंदगी होती है और सरकार उसके आरोपियों को सजा दिलाने के स्थान पर इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने का काम किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में जनवरी महीने से लेकर अब तक जो भी हुआ उसके पीछे केवल सरकार की धर्म जात के नाम पर वोट बैंक की राजनीति है। दो मंत्रियों ने देरी से ही सही त्याग पत्र दिया और अब भी इस मामले को भाजपा बनाम पीडीपी कर पेश किया जा रहा है। दोनों पार्टियों के आला नेता इस मामले में उस बच्ची को भूल गए और केवल अपना वोट बैंक देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री को तो शर्म से ही अपना त्यागपत्र दे देना चाहिए, क्योंकि वे बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए एक शब्द तक नहीं बोले हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्होंने क्राइम ब्रांच को मामला देने में देरी नहीं की तो फिर सीबीआई के लिए इतना भय क्यों। क्या उन्हें सीबीआई जांच से अपने धर्म जात के ऐजेंडे के खुल्लासे का डर है। जब कश्मीर में हुए मामले की जांच सीबीआई कर सकती है तो फिर जम्मू में बच्ची को इंसाफ दिलाने के लिए सीबीआई जांच क्यों नहीं।
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