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Kathua News: एनडीपीएस एक्ट के मामले में आरोपी को मिली सशर्त जमानत
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अदालत से... का लोगो लगाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिला सत्र न्यायाधीश ने एनडीपीएस अधिनियम मामले में आरोपी को सशर्त जमानत दी है। अदालत ने आरोपी को जमानत के लिए 50 हजार रुपये के निजी मुचलके सहित समान राशि के दो जमानती पेश करने का आदेश दिया है।
पुलिस की ओर दायर रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी जतिंद्र सिंह निवासी वार्ड 12 कठुआ को जीआरपी ने लगभग सात ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 22 के तहत मामला दर्ज किया था। बीती 13 फरवरी को आरोपी की जमानत के लिए आवेदन दिया गया। आरोपी के वकील ने कहा कि उसका मुव्वकिल निर्दोष है और पुलिस ने उसे झूठे मामले में फंसाया है। लिहाजा उसे जमानत दी जाए। जमानत का अभियोजन पक्ष की ओर विरोध किया गया।
कहा कि आरोपी की ओर से किया गया अपराध गैर-जमानती, जघन्य और समाज के खिलाफ है। मामले में कार्यवाही अंतिम चरण में है। ऐसे में अगर उसे जमानत मिलती है तो अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इस पर आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि अभियुक्त के कब्जे से बरामद हेरोइन की मात्रा सिर्फ छह से सात ग्राम के बीच है जो मध्यवर्ती मात्रा की श्रेणी में आती है। ऐसे में मामले में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 की कठोरता लागू नहीं होती।
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वर्तमान मामले में अभियुक्त को और अधिक हिरासत में रखना उचित नहीं होगा। आरोपी को हिरासत में रखना उसकी दोष सिद्धि से पूर्व दंडित करने के समान होगा। लिहाजा आरोपी की जमानत दी जाए। कोर्ट ने आरोपी को सशर्त जमानत दे दी। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपी जांच को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के लिए जांच अधिकारी से सहयोग करे और किसी भी तरीके से अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित न करे। इसमें से अगर आरोपी किसी भी शर्त की उल्लंघन करता है तो अभियोजन पक्ष उसकी जमानत रद्द करने की मांग कर सकता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिला सत्र न्यायाधीश ने एनडीपीएस अधिनियम मामले में आरोपी को सशर्त जमानत दी है। अदालत ने आरोपी को जमानत के लिए 50 हजार रुपये के निजी मुचलके सहित समान राशि के दो जमानती पेश करने का आदेश दिया है।
पुलिस की ओर दायर रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी जतिंद्र सिंह निवासी वार्ड 12 कठुआ को जीआरपी ने लगभग सात ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 22 के तहत मामला दर्ज किया था। बीती 13 फरवरी को आरोपी की जमानत के लिए आवेदन दिया गया। आरोपी के वकील ने कहा कि उसका मुव्वकिल निर्दोष है और पुलिस ने उसे झूठे मामले में फंसाया है। लिहाजा उसे जमानत दी जाए। जमानत का अभियोजन पक्ष की ओर विरोध किया गया।
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कहा कि आरोपी की ओर से किया गया अपराध गैर-जमानती, जघन्य और समाज के खिलाफ है। मामले में कार्यवाही अंतिम चरण में है। ऐसे में अगर उसे जमानत मिलती है तो अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इस पर आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि अभियुक्त के कब्जे से बरामद हेरोइन की मात्रा सिर्फ छह से सात ग्राम के बीच है जो मध्यवर्ती मात्रा की श्रेणी में आती है। ऐसे में मामले में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 की कठोरता लागू नहीं होती।
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वर्तमान मामले में अभियुक्त को और अधिक हिरासत में रखना उचित नहीं होगा। आरोपी को हिरासत में रखना उसकी दोष सिद्धि से पूर्व दंडित करने के समान होगा। लिहाजा आरोपी की जमानत दी जाए। कोर्ट ने आरोपी को सशर्त जमानत दे दी। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपी जांच को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के लिए जांच अधिकारी से सहयोग करे और किसी भी तरीके से अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित न करे। इसमें से अगर आरोपी किसी भी शर्त की उल्लंघन करता है तो अभियोजन पक्ष उसकी जमानत रद्द करने की मांग कर सकता है।