{"_id":"6876af32aa3e4d7a33023c4a","slug":"always-keep-the-god-seated-in-the-mind-temple-awake-shastri-kathua-news-c-201-1-knt1006-121940-2025-07-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"मन मंदिर में विराजमान भगवान को हमेशा जागृत रखें : शास्त्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मन मंदिर में विराजमान भगवान को हमेशा जागृत रखें : शास्त्री
Wed, 16 Jul 2025 01:12 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Wed, 16 Jul 2025 01:12 AM IST
विज्ञापन
पल्ली मोड़ स्थित लंगर में डोगरा व्यंजनों का स्वाद लेते महाराष्ट्र से आए बाबा बर्फानी के भक्त
- फोटो : mathura
कठुआ। शहर के पटेल नगर स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में गुरु पूजा का कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में उमड़े गुरु भक्तों ने परम पूज्य संत सुभाष शास्त्री जी महाराज का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
वहीं, संत श्री ने सारी संगत को सत्संग से निहाल किया। उन्होंने मन मंदिर में विराजमान भगवान को हमेशा जागृत रखने का संदेश दिया। प्रवचन में भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए संत सुभाष शास्त्री ने कहा कि हम ऐसा सोचते हैं कि जब पाप बढ़ेगा, तभी भगवान प्रकट होते हैं। लेकिन भगवान हमेशा हमारे भीतर रहते हैं। यदि भगवान इस वक्त नहीं है तो यह सृष्टि कैसे चल रही है। भगवान आज भी हमारे अंदर विद्यमान है। बस फर्क सिर्फ इतना है कि कोई उन्हें जगा कर बैठा है तो कोई भूल कर।
शास्त्री जी ने कहा कि मनुष्य में सत्य के ज्ञान के साथ ही प्रेम का होना भी भगवान का प्रकट होना ही है। अर्थात जिसके हृदय में प्रेम है तो मानो प्रेम के रूप में भगवान की प्रकट है। मनुष्य में घमंड, पाखंड और राग द्वेष का होना ही उसके भूलना है। भगवान को जब हम याद करते हैं तो वह हमारे हृदय में प्रकट हो जाते हैं इससे मनुष्य साधु अर्थात सज्जन पुरुष बन जाता है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि मनुष्य पापी तभी होता है ,जब परमात्मा को याद नहीं करता और इस कारण वह मनुष्य से भी नीचे की योनियों में जन्म
लेता है।
युगों- युगों का अर्थ ये ही नहीं है कि प्रभु हजारों साल बाद प्रकट होते हैं युग युग का अर्थ वह पल-पल हमारे भीतर प्रकट होकर हमें पाप से बचाने और फल की चिंता किए बिना अपने काम के मन लगाने की प्रेरणा देते रहते हैं। शास्त्री जी ने कहा कि जो लोग निष्काम भाव से सेवा करते हैं, वहां मानों प्रभु सेवा रूप में ही प्रकट हैं।
विज्ञापन
वहीं, संत श्री ने सारी संगत को सत्संग से निहाल किया। उन्होंने मन मंदिर में विराजमान भगवान को हमेशा जागृत रखने का संदेश दिया। प्रवचन में भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए संत सुभाष शास्त्री ने कहा कि हम ऐसा सोचते हैं कि जब पाप बढ़ेगा, तभी भगवान प्रकट होते हैं। लेकिन भगवान हमेशा हमारे भीतर रहते हैं। यदि भगवान इस वक्त नहीं है तो यह सृष्टि कैसे चल रही है। भगवान आज भी हमारे अंदर विद्यमान है। बस फर्क सिर्फ इतना है कि कोई उन्हें जगा कर बैठा है तो कोई भूल कर।
विज्ञापन
शास्त्री जी ने कहा कि मनुष्य में सत्य के ज्ञान के साथ ही प्रेम का होना भी भगवान का प्रकट होना ही है। अर्थात जिसके हृदय में प्रेम है तो मानो प्रेम के रूप में भगवान की प्रकट है। मनुष्य में घमंड, पाखंड और राग द्वेष का होना ही उसके भूलना है। भगवान को जब हम याद करते हैं तो वह हमारे हृदय में प्रकट हो जाते हैं इससे मनुष्य साधु अर्थात सज्जन पुरुष बन जाता है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि मनुष्य पापी तभी होता है ,जब परमात्मा को याद नहीं करता और इस कारण वह मनुष्य से भी नीचे की योनियों में जन्म
लेता है।
युगों- युगों का अर्थ ये ही नहीं है कि प्रभु हजारों साल बाद प्रकट होते हैं युग युग का अर्थ वह पल-पल हमारे भीतर प्रकट होकर हमें पाप से बचाने और फल की चिंता किए बिना अपने काम के मन लगाने की प्रेरणा देते रहते हैं। शास्त्री जी ने कहा कि जो लोग निष्काम भाव से सेवा करते हैं, वहां मानों प्रभु सेवा रूप में ही प्रकट हैं।