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सरकार के खिलाफ सरपंचों का गुस्सा फूटा
Kathua
Updated Tue, 11 Jun 2013 05:30 AM IST
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कठुआ। सरकार की ओर से फैसले का इंतजार कर रहे विभिन्न पंचायतों के सरपंचों का गुस्सा सोमवार को फूट पड़ा। इस दौरान उन्होने सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। सरपंचों ने आगामी चुनाव में सरकार को इसकी सजा भुगतने की चेतावनी भी दी।
सोमवार को शहीद भगत सिंह पार्क में एकत्रित हुए विभिन्न पंचायतों के सरपंचों ने पंचायती राज एक्ट 73 में संशोधन और 74 को लागू करने की मांग को जोरशोर से उठाया। सरपंच रघुनंदन सिंह बबलू ने सरकार की पंचायत प्रतिनिधि विरोधी नीतियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने विधायकों और विधान परिषद सदस्यों पर सरपंचों के अधिकारों को लेकर चुप्पी साधने पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार ने पंचायत चुनाव के नाम पर प्रतिनिधियों के साथ मजाक किया है। इसका खामियाजा सरकार को आने वाले चुनाव में भुगतना होगा। वहीं सरपंच मोहन सिंह ने कहा कि सरकार ने पंच-सरपंचों को वेतन जारी करने की छह माह पहले घोषणा की थी, लेकिन अभी तक वेतन नहीं दिया है। वेतन जारी करने के नाम पर एक तो पहले ही भद्दा मजाक किया है। वेतन तो चौकीदारों के बराबर है, लेकिन वह भी जारी नहीं किया गया है। वहीं लोकसेवा के लिए भी सरपंचों को खुद के पैसे खर्च कर कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। सरपंचों को कहने को 14 विभागों की निगरानी के लिए रखा है, लेकिन 14 विभागों के अधिकारी सरपंचों की बात सुनने तक को तैयार नही हैं। इस दौरान विजय सिंह, पंजाब सिंह, रविंद्र कुमार, राज कुमार, रमेश सिंह, नसीब सिंह, दविंद्र सिंह, अंग्रेज चंद आदि ने भी विचार रखे।
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सोमवार को शहीद भगत सिंह पार्क में एकत्रित हुए विभिन्न पंचायतों के सरपंचों ने पंचायती राज एक्ट 73 में संशोधन और 74 को लागू करने की मांग को जोरशोर से उठाया। सरपंच रघुनंदन सिंह बबलू ने सरकार की पंचायत प्रतिनिधि विरोधी नीतियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने विधायकों और विधान परिषद सदस्यों पर सरपंचों के अधिकारों को लेकर चुप्पी साधने पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार ने पंचायत चुनाव के नाम पर प्रतिनिधियों के साथ मजाक किया है। इसका खामियाजा सरकार को आने वाले चुनाव में भुगतना होगा। वहीं सरपंच मोहन सिंह ने कहा कि सरकार ने पंच-सरपंचों को वेतन जारी करने की छह माह पहले घोषणा की थी, लेकिन अभी तक वेतन नहीं दिया है। वेतन जारी करने के नाम पर एक तो पहले ही भद्दा मजाक किया है। वेतन तो चौकीदारों के बराबर है, लेकिन वह भी जारी नहीं किया गया है। वहीं लोकसेवा के लिए भी सरपंचों को खुद के पैसे खर्च कर कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। सरपंचों को कहने को 14 विभागों की निगरानी के लिए रखा है, लेकिन 14 विभागों के अधिकारी सरपंचों की बात सुनने तक को तैयार नही हैं। इस दौरान विजय सिंह, पंजाब सिंह, रविंद्र कुमार, राज कुमार, रमेश सिंह, नसीब सिंह, दविंद्र सिंह, अंग्रेज चंद आदि ने भी विचार रखे।
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