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तीन महीनें से बंद है लिफ्ट सिंचाई योजना, बारिश पर टिकी सौ एकड़ भूमि
Updated Wed, 03 Oct 2018 01:28 AM IST
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कठुआ। गांव जुथाना के किसानों को सींचाई विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। तीन माह से लिफ्ट सिंचाई योजना बंद पड़ी हुई है। इस सीजन में किसानों ने बारिश के दम पर ही धान की फसल भी लगाई है। इलाके कि किसानों में विभाग के खिलाफ रोष व्याप्त है।
किसान नेता अशोक सिंह, शेर अली, संसार सिंह, संजय सिंह आदि ने बताया कि इलाके में करीब सौ एकड़ भूमि पर सिंचाई के लिए सिंचाई विभाग की ओर से लिफ्ट सिंचाई योजना के लिए पंप स्टेशन बनाया गया। इसमें दो पंप लगे हैं, लेकिन वर्तमान में एक भी पंप काम नहीं कर रहा है। इस कारण करीब 50 किसानों की सौ एकड़ भूमि पर लगी फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि लाखों खर्च करने के बाद भी किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पंप आपरेटर के रूप में चार कर्मचारियों को तैनात किया गया है। वह भी क्या करें जब पंप ही नहीं चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि पंप स्टेशन के अंदर कीचड़ भरा हुआ है और विभाग इसकी खबर लेने को नहीं आ रहा है।
उन्होंने बताया कि वह कई बार सिंचाई विभाग के मेकेनिकल विंग को बता चुके हैं, लेकिन कोई इसकी सुध लेने के लिए नहीं आ रहा है। इतने पैसे खर्च करने के बाद जब मशीनों का ध्यान ही नहीं रखना है तो फिर पैसे खर्च ही क्यों करना है। उन्होंने किसानों के नुकसान के लिए विभाग को जिम्मेदार ठहराया। किसानों को सड़कों पर आने के लिए मजबूर न किया जाए।
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किसान नेता अशोक सिंह, शेर अली, संसार सिंह, संजय सिंह आदि ने बताया कि इलाके में करीब सौ एकड़ भूमि पर सिंचाई के लिए सिंचाई विभाग की ओर से लिफ्ट सिंचाई योजना के लिए पंप स्टेशन बनाया गया। इसमें दो पंप लगे हैं, लेकिन वर्तमान में एक भी पंप काम नहीं कर रहा है। इस कारण करीब 50 किसानों की सौ एकड़ भूमि पर लगी फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि लाखों खर्च करने के बाद भी किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पंप आपरेटर के रूप में चार कर्मचारियों को तैनात किया गया है। वह भी क्या करें जब पंप ही नहीं चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि पंप स्टेशन के अंदर कीचड़ भरा हुआ है और विभाग इसकी खबर लेने को नहीं आ रहा है।
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उन्होंने बताया कि वह कई बार सिंचाई विभाग के मेकेनिकल विंग को बता चुके हैं, लेकिन कोई इसकी सुध लेने के लिए नहीं आ रहा है। इतने पैसे खर्च करने के बाद जब मशीनों का ध्यान ही नहीं रखना है तो फिर पैसे खर्च ही क्यों करना है। उन्होंने किसानों के नुकसान के लिए विभाग को जिम्मेदार ठहराया। किसानों को सड़कों पर आने के लिए मजबूर न किया जाए।
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