{"_id":"5ba00b1b867a557f6c06893a","slug":"161537215259-kathua-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गढ़ माता मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गढ़ माता मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब
Updated Tue, 18 Sep 2018 01:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कठुआ। हिमाचल और जम्मू कश्मीर की सरहद पर रविवार से शुरू हुए गढ़ मेले में सोमवार को भक्तों का सैलाब उमड़ा। मां चामुंडा के दर पर हाजिरी देने के लिए हिमाचल के चंबा जिला और जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले से लोग कई कई घंटों का पैदल सफर तय कर पहुंचे। मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। दोपहर होते तक मंदिर प्रांगण में पहुंचे भक्तों की संख्या तीस हजार के लगभग पहुंच गई। उधर, दोनों राज्यों की ओर से मेले का आयोजन करने वाली कमेटी ने भी भक्तों के लिए इंतजाम किए थे। दूरदराज के इलाकों से पैदल चलकर आए भक्तों के लिए लंगर की भी व्यवस्था की गई। माता के दरबार पर पहुंचे भक्त नाचते गाते हुए पारंपरिक ढोल और बांसुरी की ताल पर पहुंचे। चढ़ावा चढ़ाने के साथ दोनों राज्यों और भक्तों ने अपने परिवार की खुशहाली की भी कामना की। मंदिर प्रांगण में दर्शनों को लालाइत भक्तों ने कुड नृत्य कर परंपरा को निभाया। इस दौरान पूरा इलाका मां चामुंडा के जयघोष से गूंज उठा।
भक्तों ने बताया कि बनी की ओर से गढ़ माता के लिए लगभग छह से सात घंटे का पैदल सफर तय करना पड़ता है। दूर दराज इलाके के इस मंदिर के बाद हिमाचल का इलाका शुरू हो जाता है। हिमाचल की ओर मंदिर के लिए सड़क संपर्क नजदीक ही है। लोगों की भारी आस्था को देखते ही बनी की ओर से भी गढ़ मंदिर तक सड़क निर्माण करवाया जाना चाहिए।
चौंडी और मणिमहेश में दर्शन का बराबर पुण्य
वार्षिक यात्रा में हजारों की तादाद में भक्तों ने लिया भाग, रात भर चला जागरण
अमर उजाला ब्यूरो
कठुआ। बनी के चौंडी में भगवान शंकर का एक प्राचीन मंदिर ऐसा भी जहां वार्षिक यात्रा को हिमाचल के भरमौर से सटे मणिमहेश दर्शन के बराबर माना जाता है। स्थानीय लोगों की आस्था है कि बनी की कांथल पंचायत के चौंडी से मणिमहेश पर्वत के भी दर्शन होते हैं। यहां हर साल चौंडी तक यात्रा निकाली जाती है। यात्रा आयोजकों ने बताया कि बनी समेत आसपास के दर्जनों गांव से लोग पैदल चलकर चौंडी गांव में पहुंचते हैं, जो लोग मणिमहेश नहीं जा सकते, यह मंदिर उन लोगों के लिए वरदान है। जिस दिन मणि महेश के लिए छड़ी यात्रा रवाना होती है ठीक उसी दिन चौंडी के लिए भी छड़ी को रवाना किया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार कैलाश की ओर जाते समय भगवान शिव ने चौंडी में भी रात गुजारी तभी से ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव का आज भी यात्रा पहुंचने के समय आगमन होता है और भक्त रातभर शिव महिमा का गुणगान करते हैं।
विज्ञापन
रविवार शाम पांच बजे के लगभग कांथल पंचायत से रवाना हुए सैंकड़ों की तादाद में भक्त पैदल सफर तय हर रात ढ़लते तक चौंडी पहुंचे। भक्तों के लिए यहां लंगर और रात के समय चाय पान की व्यवस्था भी की गई थी। स्थानीय विधायक जीवन लाल के घर से पिछले लंबे अर्से से यात्रा चौंडी गांव पहुंचती है। रविवार शाम विधायक ने यात्रा को रवाना किया। चौंडी में रातभर जागरण का आयोजन हुआ, जिसमें हिमाचल से आए भजन गायकों ने रातभर शिव महिमा का गुणगान किया। परंपरा को निभाते हुए रातभर भक्त कुड नृत्य में ढोल और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर नाचते रहे।
त्रंगोट के नाग देव मंदिर में उमड़े भक्त
बनी के त्रंगोट स्थित नाग देव मंदिर में वार्षिक परंपरा अनुसार सोमवार को भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। नाग देव को घी लस्सी, दूध आदि का चढ़ावा चढ़ाकर भक्तों ने फसल की कटाई की अनुमति ली। स्थानीय लोगों ने बताया कि प्राचीन समय से परंपरा चली आ रही है, जिसमें लोग सर्दियों के लिए घास, मक्की और धान की कटाई से पहले नाग देव से अनुमति हासिल करते हैं। उन्हें चढ़ावा चढ़ाकर क्षेत्र के लोगों पर कृपा बनाए रखने की कामना की जाती है। इस दौरान बनी, सुंदरीन, सित्ती आदि गांव से लोग नाग देव के दर्शनों के लिए लगभग तीन से चार घंटे का पैदल सफर तय कर पहुंचे।
विज्ञापन
भक्तों ने बताया कि बनी की ओर से गढ़ माता के लिए लगभग छह से सात घंटे का पैदल सफर तय करना पड़ता है। दूर दराज इलाके के इस मंदिर के बाद हिमाचल का इलाका शुरू हो जाता है। हिमाचल की ओर मंदिर के लिए सड़क संपर्क नजदीक ही है। लोगों की भारी आस्था को देखते ही बनी की ओर से भी गढ़ मंदिर तक सड़क निर्माण करवाया जाना चाहिए।
विज्ञापन
चौंडी और मणिमहेश में दर्शन का बराबर पुण्य
वार्षिक यात्रा में हजारों की तादाद में भक्तों ने लिया भाग, रात भर चला जागरण
अमर उजाला ब्यूरो
कठुआ। बनी के चौंडी में भगवान शंकर का एक प्राचीन मंदिर ऐसा भी जहां वार्षिक यात्रा को हिमाचल के भरमौर से सटे मणिमहेश दर्शन के बराबर माना जाता है। स्थानीय लोगों की आस्था है कि बनी की कांथल पंचायत के चौंडी से मणिमहेश पर्वत के भी दर्शन होते हैं। यहां हर साल चौंडी तक यात्रा निकाली जाती है। यात्रा आयोजकों ने बताया कि बनी समेत आसपास के दर्जनों गांव से लोग पैदल चलकर चौंडी गांव में पहुंचते हैं, जो लोग मणिमहेश नहीं जा सकते, यह मंदिर उन लोगों के लिए वरदान है। जिस दिन मणि महेश के लिए छड़ी यात्रा रवाना होती है ठीक उसी दिन चौंडी के लिए भी छड़ी को रवाना किया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार कैलाश की ओर जाते समय भगवान शिव ने चौंडी में भी रात गुजारी तभी से ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव का आज भी यात्रा पहुंचने के समय आगमन होता है और भक्त रातभर शिव महिमा का गुणगान करते हैं।
विज्ञापन
रविवार शाम पांच बजे के लगभग कांथल पंचायत से रवाना हुए सैंकड़ों की तादाद में भक्त पैदल सफर तय हर रात ढ़लते तक चौंडी पहुंचे। भक्तों के लिए यहां लंगर और रात के समय चाय पान की व्यवस्था भी की गई थी। स्थानीय विधायक जीवन लाल के घर से पिछले लंबे अर्से से यात्रा चौंडी गांव पहुंचती है। रविवार शाम विधायक ने यात्रा को रवाना किया। चौंडी में रातभर जागरण का आयोजन हुआ, जिसमें हिमाचल से आए भजन गायकों ने रातभर शिव महिमा का गुणगान किया। परंपरा को निभाते हुए रातभर भक्त कुड नृत्य में ढोल और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर नाचते रहे।
त्रंगोट के नाग देव मंदिर में उमड़े भक्त
बनी के त्रंगोट स्थित नाग देव मंदिर में वार्षिक परंपरा अनुसार सोमवार को भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। नाग देव को घी लस्सी, दूध आदि का चढ़ावा चढ़ाकर भक्तों ने फसल की कटाई की अनुमति ली। स्थानीय लोगों ने बताया कि प्राचीन समय से परंपरा चली आ रही है, जिसमें लोग सर्दियों के लिए घास, मक्की और धान की कटाई से पहले नाग देव से अनुमति हासिल करते हैं। उन्हें चढ़ावा चढ़ाकर क्षेत्र के लोगों पर कृपा बनाए रखने की कामना की जाती है। इस दौरान बनी, सुंदरीन, सित्ती आदि गांव से लोग नाग देव के दर्शनों के लिए लगभग तीन से चार घंटे का पैदल सफर तय कर पहुंचे।