कुख्यात आतंकी संगठन आईएस की राह पर कश्मीर के आतंकी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर जाकिर मूसा का सामने आया वीडियो इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि आतंकी आईएस की राह पर हैं। विशेषज्ञ इस वीडियो को कश्मीर में आतंकवाद की स्ट्रेटेजी में बदलाव के रूप में देख रहे हैं। मूसा की चेतावनी में बदली रणनीति का संदेश नजर आ रहा है। सेवानिवृत्त डीजी मिलिट्री इंटेलीजेंस लेफ्टिनेंट जनरल आरएन सिंह का कहना है कश्मीर में आतंकी आईएस की रणनीति फॉलो करने लगे हैं।
शुक्रवार को मूसा का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उसने हुर्रियत नेताओं को धमकी दी थी। कहा था कि इस्लाम के लिए किए जा रहे संघर्ष में उन्होंने कांटा बनने की कोशिश की तो सिर काटकर लाल चौक पर टांग दिए जाएंगे। इससे लगता है कि आतंकियों ने अपनी करतूतों को इस्लाम से जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है। दूसरी घटना छुट्टी पर गए लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या की है। खास तौर पर लेफ्टिनेंट की हत्या के बाद आतंकियों को स्थानीय समर्थन मिलने में दिक्कत आ सकती है। ऐसे में वे धर्म को आधार बनाकर अपनी करतूतें जारी रखना चाहते हैं।
रिटायर्ड डीजी मिलिट्री इंटेलीजेंस लेफ्टिनेंट जनरल आरएन सिंह का कहना है कश्मीर में आतंकी आईएस की रणनीति फॉलो करने लगे हैं। इस्लाम धर्म को आधार बनाकर अब वह आगे बढ़ना चाहते हैं। गलत काम के लिए धर्म के नाम पर लोगों जोड़ने की उनकी यह कोशिश है। यह ठीक उसी तरह है जब आईएस को सीरिया और इराक में नकार दिया गया तो उन्होंने इस्लाम धर्म को आधार बनाया। अब वे कश्मीर से इस्लामिक स्टेट की रणनीति को साउथ एशिया तक फैलाना चाहते हैं।
2016 में बड़े आतंकवादी हमले
मेरठ कॉलेज के डिफेंस स्टडी विभाग के शिक्षक डॉ. संजय कुमार का कहना है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद का इस्लामीकरण करने की कोशिश की लगातार जा रही है। कश्मीर में जिस तरह विकास हो रहा है, उससे वहां के युवाओं को रोजगार मिल रहा है। वह हिंसा और कर्फ्यू नहीं चाहते। ऐसे में आतंकी संगठन इस्लाम का सहारा लेकर वहां के युवाओं को बरगलाना चाहते हैं। कश्मीर में छेड़ी गई हिंसा का स्वरूप बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में पिछले नौ साल में 2016 में सबसे ज्यादा हमले हुए हैं। इस बीच सुरक्षा बल के जवानों की मौतें और घायलों की संख्या बढ़ी हैं। मेरठ कैंट निवासी उपेंद्र ने गृह मंत्रालय से 2006 से लेकर 2016 तक जम्मू-कश्मीर में हुई हिंसा में जवानों फोर्सेज की मौतों और घायलों का आंकड़ा आरटीआई में मांगा था।
सूचना के मुताबिक 2006 में मृत्यु का आंकड़ा 182, घायल 484, 2007 में मृत्यु 122 और घायलों की संख्या 336 थी। वहीं, 2016 में मौतों की संख्या 82 थी। घायलों की संख्या 219 रही। हालांकि इस बीच बड़ी संख्या में आतंकी भी मारे गए।