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खौफ: माताओं ने बच्चों को कृष्ण रूप धरने से मना कर दिया
राघवेंद्र नारायण मिश्र
Updated Thu, 29 Aug 2013 12:01 AM IST
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उम्र बीत जाती है एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में। शायर बशीर बद्र की ये पंक्तियां जम्मू के किश्तवाड़ के दंगाइयों को कोसती नजर आती है। दंगा हुआ 19 दिन बीत चुके हैं और दिन का कर्फ्यू भी कागजी तौर पर हट चुका है लेकिन लोग सहमे हैं। जरा सी हट अनजाना खौफ पैदा करती है।
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लोगबाग सिर्फ अजनबियों को ही नहीं, बल्कि जाने-पहचाने चेहरों को शक की नजरों से घूरते हैं। बारात हो या वारदात, सड़क किनारे बनी कोठियों की खिड़कियां नहीं खुलतीं। छतों पर कपड़े सुखाने से भी महिलाएं डरती हैं। बालकनी पर सीमा सुरक्षा बल के जवानों का पहरा है। छतों पर भी राष्ट्रीय रायफल्स के जवान चौकसी बरत रहे हैं।
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इस बार जन्माष्टमी की झांकियां तो निकलीं लेकिन वाहनों पर बच्चे बाल गोपाल के वेश में नजर नहीं आए। वाहनों पर भगवान कृष्ण के बाल रूप की तस्वीरें लगाई गईं। यह बदलाव अनजाने खौफ की वजह से हुआ। माताओं ने बच्चों को कृष्ण रूप धरने से मना कर दिया। सरकारी फाइलों में बुधवार को भी दिन का कर्फ्यू नहीं था, लेकिन दोनों समुदायों की दुकानें बंद रहीं।
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सुरक्षा बल और पुलिस ने बहुसंख्यक समाज से कहा था कि वे दुकानें खोल सकते हैं लेकिन दुकानें एहतियातन बंद रहीं। अल्पसंख्यक समाज की दुकानें भी बंद रहीं। जन्माष्टमी पर अनजानी अनहोनी की आशंका ने अघोषित कर्फ्यू लगा दिया। झांकियां निकली और जयकारे भी लगे लेकिन इस उत्सव में शामिल लोग रह-रहकर बाएं-दाएं झांकते भी नजर आएं।
छबीलें भी लगीं लेकिन इस बार दूसरे समुदाय के लोग उसके आसपास भी नहीं फटके। घरों की सीढ़ियों के पास अधखुले दरवाजों से झांकती निगाहें झांकियों से ज्यादा माहौल के तापमान को मापती नजर आ रही थीं।
डोडा से किश्तवाड़ में प्रवेश के साथ ही बस स्टैंड आता है। यहां जन्माष्टमी की चहलपहल की बजाए सुरक्षा बलों की चहलकदमी ही नजर आ रही थी। कर्फ्यू नहीं था फिर भी मुख्य सड़क को तारबंदी से रोक दिया गया था।
वाहनों को अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई। तारबंदी के बगल से शहर में घुसते ही शक से घूरती नजरों से साबका पड़ता है। पुलिस और सुरक्षा बल के जवान भी निश्चिंत नहीं हैं। यही कारण है कि झांकियों का काफिला गुजरते ही राष्ट्रीय रायफल्स के मेजर राघव ने राहत की सांस ली और दक्षिण भारत में अपने परिवार के लोगों को खैरियत रिपोर्ट दी।
उन्होंने कहा, ‘बच्चों को बता दिया सब ठीक है।’ झांकी का अंतिम वाहन गुजरते ही डीएसपी समीर दल बदल के साथ सड़कों पर उतरे और सड़कों के किनारे खड़े इक्का-दुक्का लोगों को हटाने लगे। ‘आई वांट नो बाडी आन द रोड।’ इस एलान के साथ ही पुलिस हरकत में आई और सड़कों पर सन्नाटा छा गया।
चौगान मैदान के पास स्थित शिव गौरी मंदिर से शुरू होकर झांकियां एनएचपीसी कालोनी के पास राम मंदिर पर आकर समाप्त हुईं, लेकिन सड़कों की रौनक गायब थी। जली दुकानें बीते दिनों की बेरहमी की यादें ताजा कर रही थीं।
तनाव के क्षणों में ही कुछ लोग जली दुकानों से मलबा बाहर निकालते भी दिखे। शक्ति नगर के शीतल शर्मा और राजेश शर्मा 9 अगस्त को याद करके ही कांप जाते हैं। उन्होंने कहा कि सबकुछ तयशुदा था। 90 दुकानें जलाई गईं और करीब 70 वाहन। जले वाहन पुलिस आफिस में कतार से लगे हैं और जली दुकानें क्रूरता की दास्तां सुना रही हैं।