{"_id":"5fa9dc6fe23e54bebced53e126c715a3","slug":"jammu-n-kashmir-bjp-pdp","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू-कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन के पक्ष में संघ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू-कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन के पक्ष में संघ
सुजय मेहदूदिया/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 22 May 2014 10:55 AM IST
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लोकसभा चुनावों में जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस गठबंधन के सफाए के बाद इसी वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और मुफ्ती मोहम्मद सईद की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के बीच ऐतिहासिक गठबंधन संबंधी अटकलें बढ़ गई हैं।
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भाजपा के सूत्रों के अनुसार वास्तव में इस तरह के गठबंधन के संबंध में भाजपा के शीर्ष नेता आरएसएस (संघ) के नेतृत्व से चर्चा भी कर चुके हैं।
जम्मू-कश्मीर जैसे महत्वपूर्ण राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए इस तरह के ऐतिहासिक गठबंधन में संघ ने भी रुचि दिखाई है। बीजेपी और पीडीपी ने लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी छह सीटें जीती हैं तो वहीं कांग्रेस-नेशनल कांफ्रेंस गठबंधन का जम्मू-कश्मीर में अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन रहा है, वे एक सीट भी नहीं जीत सके हैं।
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नेशनल कांफ्रेंस के दिग्गज फारुक अब्दुल्ला और कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद बड़े अंतर से चुनाव हारे हैं। आरएसएस पीडीपी के साथ गठबंधन के पक्ष में है, ऐसा संभव है कि इस वर्ष के अंत तक ऐतिहासिक गठबंधन हो जाए।
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मुफ्ती और उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती का एनडीए के प्रति रुख नरम रहा है, दोनों ही कहते रहे हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में के दौरान कश्मीर को काफी फायदा मिला।
आरएसएस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि इस तरह का गठबंधन दोनों के लिए फायदेमंद होगा क्योंकि लोग कांग्रेस-नेशनल कांफ्रेंस की राज्य सरकार से आजिज आ चुके हैं।
पीडीपी एनडीए में शामिल हो जाए इस बात की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। क्योंकि कश्मीर घाटी में एनडीए के पक्ष में जनभावनाएं हैं, अटल बिहारी वाजपेयी के प्रति यहां के लोगों में सम्मान है, उनकी सरकार ने कश्मीर को शोष भारत से जोड़ने के लिए कई कदम उठाए।
जबकि अपने एक दशक के शासन में यूपीए सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों की समस्याओं को हल करने में न केवल नाकाम रही बल्कि उसने इसके लिए किसी तरह का प्रयास ही नहीं किए। चुनाव प्रचार के दौरान मुफ्ती और महबूबा के भाजपा के प्रति रुख नरम को लेकर नेशनल कांफ्रेंस के नेतृत्व (फारुक और उमर अब्दुल्ला) ने पीडीपी पर जमकर निशाना साधा।
अब्दुल्ला ने चुनाव में इसे मुद्दा बनाने की कोशिश करते हुए कहा पीडीपी ने सांप्रदायिक ताकतों से समझौता कर लिया है। हालांकि सीमावर्ती राज्य में लोकसभा चुनाव नतीजों से स्पष्ट हो गया कि लोगों ने फारुक और उमर की राजनीति को खारिज कर दिया।
भाजपा और आरएसएस सूत्रों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में मजबूत व स्थिर सरकार की जरूरत है और बीजेपी-पीडीपी का गठबंधन इस कमी को पूरा कर सकता है। नेशनल कांफ्रेंस का यह तर्क की पीडीपी ने सांप्रदायिक ताकतों से हाथ मिला रही है ज्यादा मायने नहीं रखता क्योंकि नेशनल कांफ्रेंस पहले एनडीए में खुद शामिल रह चुका है।
खबरों से मिल रहे संकेतों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में भाजपा के कुछ नेता पीडीपी नेतृत्व के संपर्क में हैं। पीडीपी के नेता भी महसूस कर रहे हैं कि इस समय एनडीए से गठबंधन करके राज्य को फायदा मिल सकता है। इस तरह का कोई कदम राज्य में दिसंबर 2014 में होने वाले विधानसभा चुनाव में मुफ्ती का जनाधार और बढ़ा सकता है और पीडीपी राज्य की सत्ता हासिल कर सकती है। मुफ्ती जम्मू-कश्मीर के एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने पहले कभी भी भारत विरोधी रुख नहीं अपनाया।