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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu and Kashmir: There is hope among Kashmiri Pandits, will get a chance to connect with the soil

जम्मू-कश्मीर: कश्मीरी पंडितों में जगी आस, माटी से जुड़ने का मिल सकेगा मौका

Wed, 08 Sep 2021 04:15 PM IST
करिश्मा चिब बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Wed, 08 Sep 2021 04:15 PM IST
सार

उप राज्यपाल के प्रयास को विस्थापितों की घाटी में वापसी की पहल के रूप में देखा जा रहा। पंडित बोले, सरकारी योजनाएं भी पंडितों की जमीन पर क्रियान्वित हुई, इसका भी हो सर्वे।

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Jammu and Kashmir: There is hope among Kashmiri Pandits, will get a chance to connect with the soil
ऑनलाइन पोर्टल (फाइल फोटो)

विस्तार

कश्मीरी विस्थापितों के लिए शुरू की गई ऑनलाइन पोर्टल को लेकर कश्मीरी पंडितों में आस जगी है कि अब उनकी अचल संपत्ति पर उनका मालिकाना हक हो सकेगा। लेकिन उनके मन में कुछ दुविधाएं भी हैं। उन्हें यह आशंका है कि पहले की तरह यह योजना भी भ्रष्टाचारियों की भेंट न चढ़ जाए। इस प्रयास को कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी की पहल के तौर पर भी देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि इससे पंडितों को अपनी माटी से जुड़ने का मौका मिल सकेगा।

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कश्मीरी पंडितों का कहना है कि सरकार का यह प्रयास सराहनीय है। यदि पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण कर दिया गया तो उन्हें उनकी अचल संपत्तियों का मालिकाना हक मिल सकेगा। कश्मीर के लगभग सभी इलाकों में संपत्तियों पर कब्जा है। कई लोगों को शर्तों के साथ कम कीमतों पर संपत्तियां बेचने को मजबूर किया गया। धार्मिक स्थलों की जमीनों पर भी कब्जा है। पंडितों का कहना है कि सरकार ने भी कश्मीरी पंडितों की जमीन पर सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन किया है।
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इसका भी सर्वे किया जाना चाहिए ताकि ऐसी संपत्तियों से कब्जे हटाए जा सकें। उनके अनुसार कई सड़कें तथा पेयजल योजनाएं भी पंडितों की जमीन पर क्रियान्वित की गई हैं। कुछ महीने पहले सरकार ने आदेश भी जारी किया था कि पंडितों की जमीन पर कोई योजनाएं शुरू न की जाएं लेकिन जो योजनाएं पूरी हो चुकी हैं उससे जमीन कैसे मुक्त कराया जाएगा, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
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पहल का दुरुपयोग न हो इसका ध्यान रहे: संजय टिक्कू
कश्मीरी पंडित संजय टिक्कू का कहना है कि केंद्र शासित सरकार ने कदम तो उठाया है लेकिन इसका दुरुपयोग ना हो इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। शिकायतों पर कार्रवाई हो क्योंकि अक्सर देखा गया है कि जो शिकायतें होती है वह उन्हीं अधिकारियों के पास जाती है जो इसमें लिप्त होते हैं। कुछ अच्छा होगा तभी इस कदम को अच्छा माना जाएगा। यहां कई संपत्तियों पर कब्जे हैं जिनके मामले हाई कोर्ट में चल रहे हैं। ऐसा न हो कि ये पोर्टल भी जेके ग्रीवांस सेल की तरह चले।

आतंकवाद के दौर में पलायन करने वालों को मिलेगी राहत: सुनील शर्मा
भाजपा महासचिव सुनील शर्मा के अनुसार ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने का जो कदम एलजी प्रशासन ने उठाया है उसका हम स्वागत करते हैं। यहां जो भूमाफिया थे और जिन्हें नौकरशाहों का संरक्षण प्राप्त था उसे एलजी प्रशासन ने इसके जरिये जवाबदेह बनाया है। उम्मीद है कि इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो आतंकवाद के दौर में घाटी से पलायन कर गए थे।

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