इंदिरा गांधी के योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी की जमीन पर बन रहा अंतरराष्ट्रीय योग केंद्र
भारतीय योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय धीरेंद्र ब्रह्मचारी को जाता है। वे नेहरूजी के दौर में ही दिल्ली आ गए थे। बहुत पहले से ही वे तीन मूर्ति भवन में इंदिरा गांधी को योग की बारीकियां सिखाते रहे...
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मानतलाई (उधमपुर,जम्मू) से लौटकर। इंदिरा गांधी के योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के मानतलाई क्षेत्र में जिस योग केंद्र की स्थापना की थी, अब वहीं पर केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन मिल कर अंतरराष्ट्रीय योग केंद्र बना रहे हैं। इस केंद्र का लगभग 75 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। मार्च 2021 तक इस प्रोजेक्ट के शुरू होने की उम्मीद है।
उधमपुर के डीसी डॉ. पीयूष सिंगला बताते हैं यह एक समन्वित योजना है। इसमें मानतलाई-सुद्ध महादेव-पटनीटॉप सर्किट शामिल है। जब यह सर्किट पूरा होगा, तो पर्यटन के मामले में इसका कोई मुकाबला नहीं होगा। यह सर्किट इस क्षेत्र के लोगों का ड्रीम प्रोजेक्ट है। जब धार्मिक स्थल और अंतरराष्ट्रीय योग केंद्र एक साथ शुरू होंगे, तो पर्यटन के जरिए स्थानीय विकास को एक नई गति मिलेगी।
नेहरू जी के दौर में ही दिल्ली आए थे
स्थानीय लोगों का कहना है कि हमें अपनी तकदीर बदलने का भरोसा तब भी था, जब यहां की एक महिला बिंडी देवी ने धीरेंद्र ब्रह्मचारी को दो कनाल जमीन दी थी। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के योग गुरु उसी जमीन की सीढ़ी बनाकर इस क्षेत्र की हजार कनाल भूमि पर बढ़ते चले गए। हालांकि तब यहां के लोगों को कुछ फायदा नहीं हुआ। इस बार उन्हें पक्की उम्मीद है कि मानतलाई का अंतरराष्ट्रीय योग केंद्र लोगों की तकदीर बदल कर रख देगा।
बता दें कि भारतीय योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय धीरेंद्र ब्रह्मचारी को जाता है। वे नेहरू जी के दौर में ही दिल्ली आ गए थे। बहुत पहले से ही वे तीन मूर्ति भवन में इंदिरा गांधी को योग की बारीकियां समझाते रहे। अगर राजनीतिक दायरे की बात करें, तो अभी तक कोई दूसरा योग गुरु उनके कद की बराबरी नहीं कर सका। मानतलाई के रहने वाले रत्नचंद, जिन्होंने धीरेंद्र ब्रह्मचारी को करीब से देखा था, वे बताते हैं कि ब्रह्मचारी के आने से पहले यह इलाका ज्यादा नहीं पहचाना जाता था।
ब्रह्मचारी ने यहां के लोगों से कहा, वे कुटिया बनाना चाहते हैं, इसलिए उन्हें दो कनाल जमीन दे दो। पहले तो यहां के लोग तैयार नहीं हुए, लेकिन बाद में जब ब्रह्मचारी ने सरपंच और दूसरे लोगों को समझाया कि योग को लेकर यहां पर जो गतिविधियां शुरू होंगी, उससे इलाके का जीवन संवर जाएगा।
गांव की एक महिला बिंडी देवी ने अपने परिवार के विरोध के बावजूद ब्रह्मचारी के आश्रम के लिए दो कनाल जमीन दे दी। यहीं से आश्रम की शुरुआत हो गई। देखते-देखते ब्रह्मचारी ने यहां की एक हजार कनाल से अधिक जमीन ले ली। उन्होंने लोगों से कहा, यहां पर स्कूल, कालेज और यूनिवर्सिटी बनेगी।
देखते-देखते कुटिया ने आश्रम का रूप ले लिया। बतौर रत्नचंद, इंदिरा गांधी भी यहां आई थीं। ब्रह्मचारी, पहले जीप में आते थे और बाद में चार सवारी वाले जेट में आने लगे। जेट और हेलीपैड भी बन गए। उन्होंने योग का तीन माह का कोर्स शुरू किया। पहले 12वीं पास छात्रों को, लेकिन बाद में ग्रेजुएशन वालों को दाखिला दिया जाने लगा।
देश-विदेश से छात्र योग सीखने आते थे। जून 1994 में यहीं पर उनका प्लेन क्रैश हो गया। उनके ट्रक, जेट, जीप और दूसरे वाहनों का मलबा आज भी वहीं पर पड़ा है। उनके जाने के बाद होस्टल, योग केंद्र, कुटिया, होटल और कृषि से जुड़े सारे प्रोजेक्ट बंद हो गए।
अंतरराष्ट्रीय योग केंद्र से इसलिए बंधी उम्मीद
धीरेंद्र ब्रह्मचारी के समय में भले ही यहां वीवीआईपी लोगों का आना जाना था, मगर स्थानीय लोगों को उससे कोई फायदा नहीं हुआ। लोग आते और चले जाते। इसकी वजह भी रही। पहले से पर्यटन की नजर से देखा ही नहीं गया। मानतलाई-सुद्ध महादेव-पटनीटॉप, ये तीनों जगह तो तब भी थीं, लेकिन इन्हें यहीं के लोग जानते थे।
बाहर के लोगों की उपस्थिति न के बराबर रही। जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव, आवास एवं शहरी विकास महकमा, धीरज गुप्ता कहते हैं, इसमें कोई शक नहीं है कि यह प्रोजेक्ट केवल यहीं के लोगों का जीवन नहीं बदलेगा, बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर के लोगों को इससे फायदा होगा।
मानतलाई-सुद्धमहादेव-पटनीटॉप, इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। कई दूसरे पर्यटक स्थल भी विकसित किए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि यहां मिलने वाली सुविधाएं भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की हों, इस बाबत विशेष काम हो रहा है। सड़कों को चौड़ा बनाया जा रहा है।
ग्रामीण रत्नचंद के अनुसार, प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद उन्हें उम्मीद है कि इससे मानतलाई ही नहीं, केंद्रशासित प्रदेश के दूसरे हिस्सों को भी फायदा पहुंचेगा। रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इस प्रोजेक्ट के मैनेजर बताते हैं कि एकीकृत योजना पर 9782.41 लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है।
यहां योग केंद्र, वेलनेस स्पा, पर्यटक सुविधा केंद्र, डाइनिंग सेंटर, कैफेटेरिया, ईको हट्स, इंटीग्रेटेड कॉटेज डिजाइन, ईको पार्क, हब गार्डन, पॉली हाउस, सेब के बागान में मेडिटेशन एंक्लेव, हेलीपैड, एंबुलेंस शेड, फायर टेंडर, विंड वैन, ओपन एयर एंपीथियेटर, ग्रीन रूम, पार्किंग एरिया, सिक्योरिटी फेंसिंग एवं गार्ड रूम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, एसटीपी, डब्लूटीपी, इंटरनल अप्रोच रोड्स और रैंप्स, सोलर पावर सौ केवी और ग्रीन ट्रांसपोर्टेशन आदि सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। वहीं धीरेंद्र ब्रह्मचारी का सामान एक म्यूजियम में रखा जाएगा।